Rajasthan: मानसून दस्तक देने को तैयार, सरकार की तैयारियां शून्य, फिर बन सकते हैं बाढ़ के हालात !

गत वर्ष कोटा में बाढ़ से निपटने के लिए सेना को बुलाना पड़ा था. (फाइल फोटो)
गत वर्ष कोटा में बाढ़ से निपटने के लिए सेना को बुलाना पड़ा था. (फाइल फोटो)

राजस्थान में मानसून (Monsoon) दस्तक देने वाला है. मौसम विभाग (Weather department) की ओर से मानसून के आगमन की सूचना के साथ ही अत्यधिक और भारी बारिश (Heavy rain) का अलर्ट जारी किया गया है. यदि मानसून इस बार भी गत बार की तरह रहा तो राज्य में फिर कई इलाकों में बाढ़े के हालात हो सकते हैं.

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जयपुर. राजस्थान में मानसून (Monsoon) दस्तक देने वाला है. मौसम विभाग (Weather department) की ओर से मानसून के आगमन की सूचना के साथ ही अत्यधिक और भारी बारिश (Heavy rain) का अलर्ट जारी किया गया है. यदि मानसून इस बार भी गत बार की तरह रहा तो राज्य में फिर कई इलाकों में बाढ़े के हालात हो सकते हैं. मानसून पूर्व की तैयारियों को लेकर आपदा से निबटने के सरकार के दावे कमजोर नजर आ रहे हैं. आपदा से पहले, आपदा के दौरान और इसके बाद जो तैयारियां होनी चाहिए थी वे फिलहाल नहीं है. बाढ़ और अतिवृष्टि से बचाव के लिए जमीनी स्तर पर कोई कार्ययोजना नहीं बन पाई है. अधिकारी कहते हैं ''बारिश तो आने दीजिये''.

पिछले साल मारे गए थे डेढ़ सौ लोग
पिछले साल बाढ़ से प्रदेश के आधा दर्जन जिलों में हाहाकार मच गया था. राज्य में बिहार और असम जैसे हालात हो गए थे. गत वर्ष हुई भारी बारिश के कारण बाढ़ ने कहर बरपा दिया था. इसके कारण हजारों लोग बाढ़ में फंस गए थे. राज्य में वर्षा जनित हादसों में करीब डेढ़ सौ लोग मारे गए थे. एक लाख पशुधन की हानि हुई थी. भारी बारिश के कारण रेलमार्ग से संपर्क तक टूट गया था.

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ब्यूरोक्रेट्स का ढुलमुल रवैया


आपदा राहत एवं बचाव मंत्री मास्टर भंवरलाल मेघवाल गुड़गांव के एक निजी हॉस्पिटल में अपना इलाज करा रहे हैं. नौकरशाहों के ढुलमुल रवैये का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अभी तक प्री-मानसून की तैयारियों को लेकर डिजास्टर मैनेजमेंट की उच्च स्तरीय बैठक तक नहीं हुई है. आपदा विभाग के अधिकारियों से बाढ़ नियंत्रण के उपाय पर सवाल करने पर जवाब मिलता है ''बारिश तो आने दीजिए। हालांकि मुख्य सचिव डीबी गुप्ता ने सचिवालय में स्वायत्त शासन विभाग के अधिकारियों के साथ जलभराव एवं बाढ़ नियंत्रण को लेकर मंथन किया है.

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राज्य के आधा दर्जन जिलों में हुई थी मूसलाधार बारिश
जयपुर में पिछले वर्ष हुई भारी बारिश ने प्रशासन के तमाम दावों की पोल खोल दी थी. भारी बारिश के कारण आधा दर्जन इलाके जलमग्न हो गए थे. जयपुर में गत वर्ष औसत से 26.5% ज्यादा बारिश हुई थी. जयपुर में बारिश होनी थी 502.50 मिमी, लेकिन हुई 735.83 मिमी. वहीं भारी बारिश के कारण कोटा, बारां, प्रतापगढ़, झालावाड़, भीलवाड़ा और पाली सहित आधा दर्जन जिलों में बाढ़ के हालात बन गए थे. कोटा के कैथून में मदद के लिए सेना को बुलाना पड़ा. राजस्थान में 3.26 लाख हैक्टेयर क्षेत्र बाढ़ से प्रभावित हुआ था.
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