विधायकों से 'डील' पर BJP प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव पेश, जानें पूरा माजरा
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विधायकों से 'डील' पर BJP प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव पेश, जानें पूरा माजरा
लोढ़ा ने राज्य विधानसभा प्रक्रिया कार्य संचालन के नियम 158 के तहत दिये अपने नोटिस में कहा है कि विधायक के रूप में विधानसभा की सार्वभौमिकता व प्रतिष्ठा बनाये रखना उनका कर्तव्य है. (फाइल फोटो)

भाजपा (BJP) प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया (Satish punia) ने सरकार पर 23 विधायकों से डील करने आरोप लगाया और जल्द ही प्रमाण के साथ खुलासा करने की बात कही थी.

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जयपुर. भले ही राजस्थान (Rajasthan) में कांग्रेस और बीजेपी के बीच तीखी तकरार के दौरान राज्यसभा चुनाव संपन्न हो गए हो. लेकिन राज्यसभा चुनाव की सियासत अभी भी परवान पर है. आरोप- प्रत्यारोप का दौर अभी भी जारी है. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया (Satish punia) ने सरकार पर  23 विधायकों से डील करने आरोप लगाया और जल्द प्रमाण के साथ खुलासा करने की बात कही थी. इस पर निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा (MLA Sanyam Lodha) ने सतीश पूनिया के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव पेश किया है. लोढ़ा ने विधानसभा प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियम 158 के तहत विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी को संबोधित करते हुए विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव प्रस्तुत किया है. लोढ़ा ने स्पीकर के निर्देश पर विधानसभा सचिव के निवास पर जाकर इसे प्रस्तुत किया है.

विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव में लोढ़ा ने जिस मीडिया रिपोर्ट का जिक्र किया है, उसमें कहा गया है कि राज्यसभा चुनाव के बाद सतीश पूनिया ने आरोप लगाया था कांग्रेस विधायकों के दस दिन की बाड़ेबंदी के दौरान 23 विधायकों को खान, रीको में प्लॉट व कैश ट्रांजेक्शन की डील हुई थी. साथ ही उन्होंने कहा था कि किन- किन विधायकों से क्या डील हुई है उसके ऊपर भी प्रमाण हैं?

विधानसभा की प्रतिष्ठा खराब करने का आरोप



लोढ़ा ने राज्य विधानसभा प्रक्रिया कार्य संचालन के नियम 158 के तहत दिये अपने नोटिस में कहा है कि विधायक के रूप में विधानसभा की सार्वभौमिकता व प्रतिष्ठा बनाये रखना उनका कर्तव्य है. राज्य विधानसभा के 23 सदस्यों के खिलाफ बिना नाम जाहिर किये झूठे आरोप लगाये गये हैं. इससे राज्य विधानसभा की प्रतिष्ठा को कलंकित करने का प्रयास हुआ है.
विधानसभा की छवि खराब

लोढ़ा ने कहा कि मैं ऐसा समझता हूं कि पूनिया के आचरण से राज्य विधानसभा की छवि तार-तार हुई है. बिना किसी प्रमाण के सदस्यों के खिलाफ इस तरह के आरोप लगाना है पूरी तरह गलत है.अतः पूनिया ने अपने इस आचरण से राज्य विधानसभा व उनके सदस्यों के विशेषाधिकार का हनन किया है. अपने नोटिस में राज्य विधानसभा प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियम 157, 158, 159 का उल्लेख किया है. इसके साथ संसदीय इतिहास में विशेषाधिकार के संबंध में हुए मामलों का विवरण एवं उनके निर्णय की प्रति भी लोढ़ा ने संलग्न की है.
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