नगर निगम चुनाव: जयपुर में सिविल लाइन में कांग्रेस ने आधी आबादी को दिया पूरा हक, 50 फीसदी प्रत्याशी महिलायें

संभवतया किसी भी स्थानीय चुनाव में यह पहला मौका है जब कांग्रेस ने किसी एक निर्वाचन क्षेत्र में इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं को आगे किया है.
संभवतया किसी भी स्थानीय चुनाव में यह पहला मौका है जब कांग्रेस ने किसी एक निर्वाचन क्षेत्र में इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं को आगे किया है.

Municipal Corporation elections: कांग्रेस ने इस बार जयपुर के सिविल लाइन विधानसभा क्षेत्र के 24 वार्डों में से 12 में महिलाओं को अपना प्रत्याशी बनाकर उदाहरण पेश किया है.

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जयपुर. निकाय चुनाव में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण (Reservation) का प्रावधान है. लेकिन राजधानी जयपुर के सिविल लाइंस विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस (Congress) ने इस बार नगर निगम चुनाव में महिलाओं को 33 फीसदी की बजाय 50 फीसदी को टिकट दिए हैं. कई ओपन कैटेगरी की सीटों पर महिला उम्मीदवारों (Female candidates)  को मौका दिया गया है. परिवहन मंत्री और निवर्तमान कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रतापसिंह खाचरियावास के निर्वाचन क्षेत्र में नगर निगम के 24 वार्डों में से 12 में महिला उम्मीदवारों को टिकट थमाये गये हैं.

निकाय चुनाव में कांग्रेस का जयपुर में महिलाओं को टिकट देने का औसत 39 फीसदी है. इनमें सबसे ज्यादा महिला उम्मीदवारों को मौका सिविल लाइंस से मिला है. परिवहन मंत्री प्रतापसिंह खाचरियवास ने कहा कि हमने 33 फीसदी की जगह 50 फीसदी महिला आरक्षण दिया है. लोग महिला उम्मीदवारों को उत्साहवर्धन करेंगे.

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39 फीसदी महिलाओं को टिकट
राजधानी जयपुर के नगर निगम ग्रेटर और हेरिटेज में इस बार कांग्रेस ने 39 फीसदी टिकट महिलाओं को दिये हैं. जयपुर के ग्रेटर नगर निगम में 150 वार्ड हैं. इनमें से 33 फीसदी के हिसाब से 49 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित हैं. वहीं नगर निगम हेरिटेज में 100 वार्ड हैं. इनमें से 33 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित हैं. ग्रेटर नगर निगम में 10 महिलाओं को आरक्षित सीटों के अलावा टिकट दिया गया है. जबकि नगर निगम हेरिटेज से महिलाओं के लिये आरक्षित वार्डों के मुकाबले 6 अतिरिक्त महिलाओं को टिकट दिया गये हैं.

संभवतया यह पहला मौका है
संभवतया किसी भी स्थानीय चुनाव में यह पहला मौका है जब कांग्रेस ने किसी एक निर्वाचन क्षेत्र में इतनी बड़ी संख्या में महिलाओें को आगे किया है. अन्यथा हर बार वह आरक्षण की निर्धारित संख्या से आगे नहीं बढ़ती है. इसे महिलाओं में पार्टी के प्रति विश्वास जगाने की मुहिम के तौर पर देखा जा सकता है. प्रदेश में महिलाओं पर बढ़ रहे अत्याचारों के बीच कांग्रेस की यह मुहिम क्या रंग दिखायेगी यह तो आने वाला समय ही बतायेगा.
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