Rajasthan: जयपुर, जोधपुर और कोटा में 4 दिन बंद रहेंगे शराब ठेके, यह है वजह

इन चार दिनों में इन शहरों में शराब की बिक्री पर पूरी तरह से पांबदी रहेगी.
इन चार दिनों में इन शहरों में शराब की बिक्री पर पूरी तरह से पांबदी रहेगी.

Municipal Corporation elections: चुनावों को देखते हुये जयपुर, जोधपुर और कोटा शहर में 27 अक्टूबर से 29 अक्टूबर की शाम तक और 30 अक्टूबर से 1 नवंबर की शाम तक शराब के ठेके बंद रहेंगे.

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जयपुर. नगर निगम चुनाव (Municipal Corporation elections) के चलते राजधानी जयपुर समेत जोधपुर में 4 दिन शराब के ठेके (Wine shops) बंद रहेंगे. इस दौरान शराब की बिक्री पर पूरी तरह पाबंदी रहेगी. इन तीनों शहरों में दो फेज में चुनाव हो रहे हैं. लिहाजा मतदान से एक दिन पहले से लेकर मतदान की समाप्ति तक इन नगर निगमों के क्षेत्रों से लगते 5 किलामीटर क्षेत्र में यह आदेश प्रभावी होगा.

नगर निगम के आम चुनाव के लिए 29 अक्टूबर और 1 नवंबर को ड्राई डे घोषित किया गया है. पहले चरण में जयपुर हैरिटेज, कोटा (उत्तर) और जोधपुर (उत्तर) नगर निगम के लिये मतदान होंगे. मतदान को देखते हुए 27 अक्टूबर को शाम 5.30 बजे से 29 अक्टूबर को शाम 5.30 बजे तक इन क्षेत्रों में शराब की बिक्री नहीं हो पायेगी. इसी तरह 1 नवंबर को जयपुर ग्रेटर, कोटा (दक्षिण) और जोधपुर (दक्षिण) नगर निगम के लिये वोट डाले जायेंगे. इसको देखते हुये 30 अक्टूबर को शाम 5.30 बजे से 1 नवंबर को शाम 5.30 बजे तक शराब की बिक्री पर पांबदी रहेगी.

आयोग ने मतदान का समय घंटे बढ़ाया
कोरोना संक्रमण को देखते हुए इस बार चुनाव आयोग ने मतदान का समय बढ़ा दिया है. इस बार मतदान सुबह 7.30 बजे से शाम 5.30 बजे तक होगा. नगर निगमों में मतगणना 3 नवंबर को सुबह 9 बजे से होगी. उसके तत्काल बाद परिणाम घोषित कर दिया जाएगा. प्रथम चरण के चुनाव में अब महज दो दिन शेष हैं. प्रचार की समय सीमा को देखते हुये प्रत्याशियों ने इसके लिये पूरा जोर लगा दिया है. सभी 6 नगर निगमों में चुनाव प्रचार जोरों पर है.
जमकर उड़ रही है कोरोना गाइडलाइन की धज्जियां


चुनाव के मद्देनजर चुनाव आयोग की ओर से जारी की गई कोरोना गाइडलाइन की कई जगह जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं. सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क लगाने का ध्यान नहीं रखा जा रहा है. प्रत्याशी बड़ी संख्या में समर्थकों के साथ चुनाव प्रचार में जुटे हैं. कहीं-कहीं प्रत्याशी कोरोना गाइडलाइन की पूरी तरह से पालन भी कर रहे हैं. लेकिन, ऐसे प्रत्याशियों की संख्या बेहद कम है.
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