Home /News /rajasthan /

सूर्य नमस्कार के विरोध में उतरे मुस्लिम संगठन, पढ़ें- यह कितना सही, कितना गलत

सूर्य नमस्कार के विरोध में उतरे मुस्लिम संगठन, पढ़ें- यह कितना सही, कितना गलत

राजस्‍थान सरकार के शिक्षा विभाग की ओर से सभी निजी और सरकारी स्‍कूलों में सूर्य नमस्कार को अनिवार्य किए जाने के बाद से मुस्लिम संगठन इसकी खिलाफत करते नजर आ रहे हैं। ऐसे ही विरोध और असंतोष का माहौल शनिवार को राजधानी जयपुर में आयोजित ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के जलसे में दिखा। इसमें उलेमा ने शरीयत में किसी प्रकार की छेड़छाड़ को बर्दाश्‍त के बाहर बताया। इस जलसे में वक्‍ताओं ने कहा कि वे अपनी शरीयत में बाल के बराबर भी कटौती नहीं होने देंगे। यही नहीं इस मसले पर लॉ बोर्ड अब सरकार से कानूनी लड़ाई लड़ने का मानस भी बना चुका है।

राजस्‍थान सरकार के शिक्षा विभाग की ओर से सभी निजी और सरकारी स्‍कूलों में सूर्य नमस्कार को अनिवार्य किए जाने के बाद से मुस्लिम संगठन इसकी खिलाफत करते नजर आ रहे हैं। ऐसे ही विरोध और असंतोष का माहौल शनिवार को राजधानी जयपुर में आयोजित ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के जलसे में दिखा। इसमें उलेमा ने शरीयत में किसी प्रकार की छेड़छाड़ को बर्दाश्‍त के बाहर बताया। इस जलसे में वक्‍ताओं ने कहा कि वे अपनी शरीयत में बाल के बराबर भी कटौती नहीं होने देंगे। यही नहीं इस मसले पर लॉ बोर्ड अब सरकार से कानूनी लड़ाई लड़ने का मानस भी बना चुका है।

राजस्‍थान सरकार के शिक्षा विभाग की ओर से सभी निजी और सरकारी स्‍कूलों में सूर्य नमस्कार को अनिवार्य किए जाने के बाद से मुस्लिम संगठन इसकी खिलाफत करते नजर आ रहे हैं। ऐसे ही विरोध और असंतोष का माहौल शनिवार को राजधानी जयपुर में आयोजित ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के जलसे में दिखा। इसमें उलेमा ने शरीयत में किसी प्रकार की छेड़छाड़ को बर्दाश्‍त के बाहर बताया। इस जलसे में वक्‍ताओं ने कहा कि वे अपनी शरीयत में बाल के बराबर भी कटौती नहीं होने देंगे। यही नहीं इस मसले पर लॉ बोर्ड अब सरकार से कानूनी लड़ाई लड़ने का मानस भी बना चुका है।

अधिक पढ़ें ...
राजस्‍थान सरकार के शिक्षा विभाग की ओर से सभी निजी और सरकारी स्‍कूलों में सूर्य नमस्कार को अनिवार्य किए जाने के बाद से मुस्लिम संगठन इसकी खिलाफत करते नजर आ रहे हैं। ऐसे ही विरोध और असंतोष का माहौल शनिवार को राजधानी जयपुर में आयोजित ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के जलसे में दिखा। इसमें उलेमा ने शरीयत में किसी प्रकार की छेड़छाड़ को बर्दाश्‍त के बाहर बताया। इस जलसे में वक्‍ताओं ने कहा कि वे अपनी शरीयत में बाल के बराबर भी कटौती नहीं होने देंगे। यही नहीं इस मसले पर लॉ बोर्ड अब सरकार से कानूनी लड़ाई लड़ने का मानस भी बना चुका है।

उल्‍लेखनीय है कि संगठन की ओर से राजधानी में आयोजित दो दिवसीय अधिवेशन में इस मसलें पर खुलकर चर्चा हुई जिसमें सदस्यों ने एक स्वर में इस सरकारी आदेश के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए सहमति बन गई है। संगठन की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि सरकारी स्कूलों में मुस्लिम छात्रों पर सूर्य नमस्कार व गीता पढ़ाने की बाध्यता ठिक नहीं है। यदि सरकार इस फैसले को वापस नही लेती है तो कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी।



 

सूर्य नमस्कार को लेकर छिड़ी जंग सियासी रुप लेती दिखाई दे रही है। इससे पूर्व इस मामले में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी विधानसभा में सफाई दे चुकी है। राजे ने मुस्लिम संगठनों के विरोध के बाद कहा था सूर्य नमस्कार एक व्यायाम है और पूरी दुनिया इसे मान रही है, हमें भी इसे मानना चाहिए। मुख्यमंत्री द्वारा सफाई देने के बाद भी प्रदेश में इस सरकारी आदेश का व्यापक विरोध दिखाई दे रहा है। इससे पूर्व मध्य प्रदेश में भी जब सूर्य नमस्कार को लागू किया गया था तो सरकार को इसी प्रकार के विरोध का सामना करना पड़ा था।

सूर्य नमस्‍कार की जिस आग ने मध्य प्रदेश में तपन पैदा की, वही आग अब प्रदेश में भी गर्मी पैदा कर रही है। राजस्थान में सूर्य नमस्कार लागू किए जाने के विरोध की कड़ी में कई मुस्लिम संगठन जुड़ते जा रहे है। इनमें ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड, जमीयतउलेमा-ए-हिंद, राजस्थान और पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया जैसे संगठनों के नाम प्रमुख है। इस सभी ने सूर्य नमस्कार के खिलाफ जंग छेड़ने का बीड़ा उठाया है।



जानिए क्‍या है राज्‍य सरकार का आदेश
सूर्यनमस्कार को लेकर राज्य सरकार के आदेश के मुताबिक सभी माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूल प्रतिदिन 20 मिनट तक बाल सभा का आयोजन करेंगे। इस 20 मिनट के दौरान सूर्य नमस्कार, चिंतन और अखबार पाठ जैसी गतिविधियां शामिल होंगी। यह आदेश प्रदेश की सभी सरकारी व निजी 48,000 स्कूलों में लागू कर दिया गया है। मध्य प्रदेश सरकार को जो कि सूर्य नमस्कार को लागू करने वाला पहला राज्य है, ने भी इसी तरह के निर्देश स्कूलों को दिए थे।
कोर्ट भी सूर्य नमस्‍कार को बता चुका है असंवैधानिक: जमीयत

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रदेश महासचिव अब्दुल वाहिद खत्री का कहना है कि स्कूलों में सूर्य नमस्कार की अनिवार्यता को जबलपुर हाइकोर्ट सहित अन्य कई कोर्ट में असंवैधानिक बताया है। यही नहीं ऐसा आदेश संवैधानिक स्वतंत्रता का उल्लंघन है। पहले तो शांतिपूर्ण तरीके से इस आदेश का विरोध करेंगे, इसके बाद न्यायपालिका की शरण में जाएंगे।
धर्म विरोधी गतिविधियों को नहीं किया जा सकता अनिवार्य: अंसारी

इस मामले में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के प्रदेशाध्यक्ष अनीश अंसारी ने कहा कि जब वोटिंग के लिए दबाव नहीं डाला जा सकता तो इस तरह की धर्म विरोधी गतिविधियों को कैसे अनिवार्य किया जा सकता है। सूर्य नमस्कार में हिंदू धर्म के श्लोक हैं, जबकि मुस्लिम धर्म में पूजा नहीं होती, फिर इसे कैसे थोपा जा सकता है।

यहां ध्यान देने योग्य बात यह भी है कि मध्य प्रदेश सरकार ने केवल सरकारी स्कूलों में सूर्य नमस्कार लागू करवाया था। जबकि राजस्थान सरकार ने एक कदम आगे बढ़ते हुए इस दायरे में सरकारी के अलावा निजी स्कूलों को भी शामिल कर लिया।

विरोध के स्वर केवल मुस्लिम धर्म कि ओर से ही नहीं उठ रहे है बल्कि अन्य धर्म भी दबी जु़बान में ही सही लेकिन इस आदेश का विरोध जता रहे है। विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों का मत है कि सूर्य नमस्कार, प्रार्थना और चिंतन बिना किसी मंत्र के संभव नहीं हैं।

संकुचित मानसिकता को त्‍यागे लोग: इन्‍द्रेश

तमाम तरह के विरोधाभासों के बीच देश के सबसे पुराने संगठनों में से एक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने राज्य में सूर्य नमस्कार को लागू किए जाने के कदम को स्वागत योग्य बताया है। संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य इन्दे्रश कुमार ने सूर्य नमस्कार का समर्थन करते हुए इसका विरोध कर रहे लोगों से संकुचित मानसिकता त्यागने को कहा है।

इंद्रेश ने सभी सरकारी व निजी स्कूलों में सूर्य नमस्कार की व्यवस्था का समर्थन करते हुए कहा कि यह भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण अंग है और पूर्णत: वैज्ञानिक है। सूर्य नमस्कार शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य बनाए रखने का सबसे बढ़िया तरीका है। सूर्य नमस्कार का विरोध करने वालों को कट्टरता त्यागनी चाहिए।

खैर इस मसलें पर समाज दो धड़ों में जरुर बंट गया हो लेकिन यहां ध्यान देने योग्य बात यें है कि आखिर पुराणों में सूर्य नमस्‍कार को क्यों विशेष बताया गया है।
जानिए क्या फायदे है सूर्य नमस्कार के

सूर्य नमस्‍कार अकेला ऐसा योगासन है जो विभिन्न व्यायामों के बराबर फायदेमंद माना जाता है और इसे किसी भी उम्र का व्यक्ति कर सकता है। इसमें 12 आसन होते हैं और 12 आसनों के साथ-साथ 12 श्लोकों का उच्चारण किया जाता है। इसे सर्वांग व्यायाम भी कहते हैं। सूर्य नमस्कार न सिर्फ वजन घटाने और फिट शरीर के लिए उपयोगी है बल्कि इसके बहुतेरे लाभ हैं। इसके कुछ लाभ इसप्रकार हैं-

  • खुले वातावरण में सूर्य नमस्कार करने से शरीर को भरपूर मात्रा में विटामिन डी मिलता है जिससे हड्डियों में ताकत आती है।

  • वजन घटाने में यह बहुत उपयोगी है। इसके नियमित अभ्यास से डाइटिंग से भी ज्यादा फायदा पहुंचता है।

  • नियमित रूप से इसके 12 आसनों को करने से शरीर में खूम का प्रवाह सही ढंग से होता है और ब्लड प्रेशर की आशंका घटती है।

  • क्रोध और तनाव पर काबू पाने में यह बहुत मददगार है।

  • मानसिक शांति मिलती है और व्यक्ति सारा दिन तरोताजा रहता है।

  • इससे रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है।

  • शरीर लचीला होता है।

  • त्वचा के लिए यह बहुत लाभदायक योगासन है।


आप hindi.news18.com की खबरें पढ़ने के लिए हमें फेसबुक और टि्वटर पर फॉलो कर सकते हैं.

विज्ञापन

राशिभविष्य

मेष

वृषभ

मिथुन

कर्क

सिंह

कन्या

तुला

वृश्चिक

धनु

मकर

कुंभ

मीन

प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
और भी पढ़ें
विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें

अगली ख़बर