यहां शेरों और बाघों को 'हंटर' से तो निजात मिली, लेकिन 'जिंदगी' नहीं मिल सकी

कभी सर्कस की क्रूरता से आजादी दिलाकर जयपुर के नाहरगढ़ रेस्क्यू सेंटर में लाए गए 58 शेर और बाघ गुमनामी में ही इस दुनिया से विदा हो गए किसी को पता ही नहीं चला. इन शेर और बाघों में से अब एक अकेली शेरनी 'बेगम' बची है.

Arbaaz Ahmed | News18 Rajasthan
Updated: July 15, 2019, 3:55 PM IST
यहां शेरों और बाघों को 'हंटर' से तो निजात मिली, लेकिन 'जिंदगी' नहीं मिल सकी
फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।
Arbaaz Ahmed | News18 Rajasthan
Updated: July 15, 2019, 3:55 PM IST
कभी सर्कस की क्रूरता से आजादी दिलाकर जयपुर के नाहरगढ़ रेस्क्यू सेंटर में लाए गए 58 शेर और बाघ गुमनामी में ही इस दुनिया से विदा हो गए किसी को पता ही नहीं चला. इन शेर और बाघों में से अब एक अकेली शेरनी 'बेगम' बची है. वह जिदंगी के 25 साल पूरी कर चुकी है. अब वो भी अपने अंतिम दिन गुजार रही है। मौजूदा हालात को देखते हुए उसकी मौत के बाद ये रेस्क्यू सेंटर इतिहास की बात हो जाएगी. दुनिया की नजर से दूर नज़रबंदी में नाहरगढ़ रेस्क्यू सेंटर में रखे गए इन शेरों और बाघों को किन हालात में रखा गया कभी कोई नहीं जान पाया.

बेहतर जिंदगी देने के लिए आजाद कराया गया था
सर्कस में शेरों और बाघों के उपयोग और प्रदर्शन पर जब पाबंदी लगी तो सभी सर्कस से इनको आजाद कराया गया था. तब उम्मीद ये की गई थी इन जानवरों को सर्कस के रिंग मास्टर की क्रूरता से दूर के एक बेहतर जिंदगी मिल पाएगी. इसीलिए जयपुर में 2002 में नाहरगढ़ रेस्क्यू सेंटर बनाया गया. यहां 2002 से लेकर 2010 तक बाघों और शेरों के आने का सिलसिला जारी रहा. तब यहां लाए गए कुल जीवों की संख्या 58 थी. शेर और बाघ के अलावा इनमें एक बेहद दुर्लभ टाइगोन भी था.

Nahargarh Rescue Center - नाहरगढ़ रेस्क्यू सेंटर
नाहरगढ़ रेस्क्यू सेंटर


प्रजनन नहीं कराया गया
इन बेजुबानों को यहां शिफ्ट तो कर दिया गया, लेकिन यहां आकर भी इन्हें आजाद जिंदगी नहीं मिल पाई. इन जीवों के मिक्स ब्रीड होने की वजह से यहां इनका प्रजनन नहीं कराया गया. नतीजा ये रहा कि यहां ज्यादातर शेरनी व बाघिनों को बच्चेदानी में संक्रमण की वजह से जिंदगी गंवानी पड़ी. वहीं प्रजनन नहीं होने के तनाव से बहुत जानवर यहां कैंसर के कारण मारे गए. पब्लिक डिस्प्ले पर पाबंदी की वजह से यहां से न तो शेर और बाघ की होने वाली मौतों की जानकारियां दी गईं और न ही इन जीवों के लिए कुछ बेहतर जिंदगी देने के लिए कुछ किया जा सका.

बहुत से वन्यजीव हार्ट अटैक के कारण मारे गए
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2016 तक यहां शेर व बाघ की मौत जानकारी सार्वजनिक की जाती थी, लेकिन उसके बाद वो सिलसिला भी खत्म हो गया. यहां ज्यादातर शेर और बाघ की मौत का कारण कैंसर रहा. बहुत से वन्यजीव हार्ट अटैक के कारण मारे गए. वन्यजीव प्रेमी लगातार यहां बाघों और शेरों की मौत के कारणों पर सवाल उठाते रहे, लेकिन उन्हें कभी कोई जवाब नहीं मिला. 2012 में मामले में हाईकोर्ट ने स्पप्रेरित प्रसंज्ञान लेकर जवाब तलब किया. तब यहां शेर और बाघों की मौत की वजह उनकी उम्र बताई गई.

Nahargarh Rescue Center - नाहरगढ़ रेस्क्यू सेंटर
फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।


यूं हुआ इनका दुखद अंत
2015 में नाहरगढ़ रेस्क्यू सेंटर में शेरनी सोना की मौत हुई. उसकी मौत का कारण कैंसर बताया गया. तब तक यहां 12 बिग केट्स जिंदा थे. उनमें से 6 शेरनी, 3 शेर, 4 टाइगर और एक टाइगोन था. 2015 जून में ही सिंबा नाम के टाइगोन की मौत हो गई. उसके बाद यहां शेर व बाघों की मृत्यु की जानकारी सार्वजिक नहीं की गई. तब से लेकर अब तक बचे 13 जीवों में 12 की मौत हो चुकी है.

डीएनए टेस्ट कराया तो ज्यादातर मिक्स ब्रीड के निकले
सुप्रीम कोर्ट ने यहां शेर और बाघों को पर्यटकों दिखाने पर पाबंदी लगाई थी. लेकिन इन बेजुबान जीवों के प्रजनन पर किसने पाबंदी लगाई इसका कोई जवाब किसी के पास नहीं हैं. जबकि सेंट्रल जू अथॉरिटी की साफ गाइडलाइन है कि जीवों जोड़ों में साथ रखा जाए ताकि वे तनाव में न रहें और उनका प्रजनन भी कराया जा सके. लेकिन गुमनामी की जिंदगी गुजाराने वाले इन जीवों बदकिस्मती देखिए जब कुछ जीवों का डीएनए टेस्ट कराया गया भी तो ज्यादातर मिक्स ब्रीड के निकले.

सबका अंत बेहद दुखद रहा
नाहरगढ़ रेस्क्यू सेंटर में इन जीवों को खाना, मेडिकल सुविधा और रहने की जगह तो मिली, लेकिन इन सब अंत बेहद दुखद रहा. रेस्क्यू सेंटर लाए गए इन जीवों को रिंग मास्टर के हंटर से तो निजात मिल गई, लेकिन जो जिदंगी उन्हें मिली उसे 'जिदंगी' नहीं 'काला पानी' की सजा कहा जा सकता है.

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First published: July 15, 2019, 3:39 PM IST
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