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व्यायाम का सूर्य नमस्कार से बेहतर विकल्प है नमाज: मौलाना वाहिद खत्री

व्यायाम का सूर्य नमस्कार से बेहतर विकल्प है नमाज: मौलाना वाहिद खत्री

राजस्थान सरकार की ओर से स्कूलों में सूर्य नमस्कार की अनिवार्यता पर विरोध जारी है। खासकर मुस्लिम समुदाय इसे अनिवार्य करने की खिलाफत में है। जमाते उल्मा हिंद सहित प्रदेश में सक्रिय मुस्लिम संगठन इसके विरोध में आवाज बुलंद कर चुके है। हाल ही में जयपुर में हुई मुस्लिम कांफ्रेंस में सूर्य नमस्कार पर मुस्लिम नेताओं ने खुलकर अपना विरोध दर्ज करवाया। ईटीवी-न्यूज 18 संवाददाता ने इस मसले पर जमाते उल्मा हिंद प्रदेश महासचिव मौलाना वाहिद खत्री से बात की और जानने की कोशिश की आखिर क्यों मुस्लिम समुदाय सूर्य नमस्कार के विरोध में हैं।

राजस्थान सरकार की ओर से स्कूलों में सूर्य नमस्कार की अनिवार्यता पर विरोध जारी है। खासकर मुस्लिम समुदाय इसे अनिवार्य करने की खिलाफत में है। जमाते उल्मा हिंद सहित प्रदेश में सक्रिय मुस्लिम संगठन इसके विरोध में आवाज बुलंद कर चुके है। हाल ही में जयपुर में हुई मुस्लिम कांफ्रेंस में सूर्य नमस्कार पर मुस्लिम नेताओं ने खुलकर अपना विरोध दर्ज करवाया। ईटीवी-न्यूज 18 संवाददाता ने इस मसले पर जमाते उल्मा हिंद प्रदेश महासचिव मौलाना वाहिद खत्री से बात की और जानने की कोशिश की आखिर क्यों मुस्लिम समुदाय सूर्य नमस्कार के विरोध में हैं।

राजस्थान सरकार की ओर से स्कूलों में सूर्य नमस्कार की अनिवार्यता पर विरोध जारी है। खासकर मुस्लिम समुदाय इसे अनिवार्य करने की खिलाफत में है। जमाते उल्मा हिंद सहित प्रदेश में सक्रिय मुस्लिम संगठन इसके विरोध में आवाज बुलंद कर चुके है। हाल ही में जयपुर में हुई मुस्लिम कांफ्रेंस में सूर्य नमस्कार पर मुस्लिम नेताओं ने खुलकर अपना विरोध दर्ज करवाया। ईटीवी-न्यूज 18 संवाददाता ने इस मसले पर जमाते उल्मा हिंद प्रदेश महासचिव मौलाना वाहिद खत्री से बात की और जानने की कोशिश की आखिर क्यों मुस्लिम समुदाय सूर्य नमस्कार के विरोध में हैं।

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    राजस्थान सरकार की ओर से स्कूलों में सूर्य नमस्कार की अनिवार्यता पर विरोध जारी है। खासकर मुस्लिम समुदाय इसे अनिवार्य करने की खिलाफत में है। जमाते उल्मा हिंद सहित प्रदेश में सक्रिय मुस्लिम संगठन इसके विरोध में आवाज बुलंद कर चुके है। हाल ही में जयपुर में हुई मुस्लिम कांफ्रेंस में सूर्य नमस्कार पर मुस्लिम नेताओं ने खुलकर अपना विरोध दर्ज करवाया। ईटीवी-न्यूज 18 संवाददाता ने इस मसले पर जमाते उल्मा हिंद प्रदेश महासचिव मौलाना वाहिद खत्री से बात की और जानने की कोशिश की आखिर क्यों मुस्लिम समुदाय सूर्य नमस्कार के विरोध में हैं।

    व्यायाम का बेहतर विकल्प नमाज

    मौलाना वाहिद खत्री का कहना है कि अगर राज्य सरकार सूर्य नमस्कार को बच्चों के स्वास्थ्य के लिहाज से अनिवार्य करना चाहती है, तो नमाज से बेहतर कोई व्यायाम नहीं है। नमाज की मुद्राएं पूरे शरीर में रक्त संचरण और एकाग्रता को बढ़ाती है। मुस्लिम समाज से सभी शैक्षणिक संस्थानों में नियमित नमाज अता की जाती है। ऐसे में केवल इस आधार पर सूर्य नमस्कार को सभी स्कूलों में लागू करना उचित नहीं है।

    वंदना इस्लाम में नहीं है स्वीकार्य

    सूर्य नमस्कार, सूर्य की स्थिति या वंदना इस्लाम में स्वीकार्य नहीं है। इस्लाम धर्म के अनुसार अल्लाह ही पूरी दुनिया का मालिक है। अगर कोई सूर्य नमस्कार करता है तो वह इस्लाम का हिस्सा नहीं है। इस मूल सिद्धांत के तहत सूर्य नमस्कार को अनिवार्य नहीं किया जा सकता है।

    शिर्क की श्रेणी में है सूर्य नमस्कार

    मौलाना वाहिद के अनुसार सूर्य नमस्कार इस्लाम धर्म के तहत शिर्क की श्रेणी में आता है। शिर्क का मतलब अपने मालिक की श्रेणी में किसी अन्य को शामिल करना है। इस्लाम में सभी गुनाहों की माफी है पर शिर्क की नहीं है।

    मंत्रोच्चार की इजाजत नहीं देता इस्लाम

    इस्लाम मंत्रोच्चार की इजाजत नहीं देता है। सुर्य नमस्कार की मुद्राके अनुसार मंत्रोच्चारण करना होता है। जिसे इस्लाम के तहत स्वीकार नहीं किया गया है।

    संविधान के तहत नहीं है उपबंध

    भारत का संविधान भी स्कूलों में इसकी अनिवार्यता की इजाजत नहीं देता है। संविधान में साफ उपबंध है कि किस धार्मिक क्रिया को अध्ययन में सभी पर लागू नहीं किया सकता है। संविधान के तहत राज्य का कोई धर्म नहीं होगा। साल 1984 में एसआर बोम्मई वर्सेज भारत सरकार के केस में सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को किसी भी धर्म या धर्म के किसी भाग को प्रोत्साहित करने के लिए बैन किया हुआ है।

    छात्रों पर पड़ेगा विपरीत प्रभाव

    राज्य सरकार अगर इसे स्कूलों में लागू करती है तो छात्रों पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ेगा। स्कूलों में छात्र दो गुटों में बंट जाएंगे। एक गुट होगा सूर्य नमस्कार करने वालों का और दूसरा गुट इसे नहीं करने वालों का। मौलाना का कहना है कि क्या सांप्रदायिकता का बीजारोपण शुरू में करना उचित होगा। इससे बच्चों के मानसिक विकास पर भी प्रभाव पड़ेगा। बच्चे अध्ययापन की बजाए इन कार्यों में अधिक संलग्न होंगे।

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