जयपुर जू में बाहुबली की जगह आया मल्लिकार्जुन, देवसेना और अवंतिका के साथ बनायेगा जोड़ी

2200 किलोमीटर का सड़क मार्ग का सफर पूरा कर चेन्नई से नर शतुरमुर्ग  मल्लिकार्जुन को जयपुर से लाया गया है.

2200 किलोमीटर का सड़क मार्ग का सफर पूरा कर चेन्नई से नर शतुरमुर्ग मल्लिकार्जुन को जयपुर से लाया गया है.

अगर सबकुछ ठीकठाक रहा तो आने वाले समय में जयपुर (Jaipur Zoo) में धरती के सबसे बड़े और सबसे वजनी पक्षी शतुरमुर्ग (Ostrich) की आबादी बढ़ सकेगी. इसके लिये जयपुर जू में चेन्नई से नया नर शतुरमुर्ग मल्लिकार्जुन (Mallikarjun) को लाया गया है.

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जयपुर. जयपुर जू (Jaipur Zoo) में नर शतुरमुर्ग की कमी को पूरा कर दिया गया है. पिछले साल गर्मी की वजह से जयपुर जू के इकलौते नर शतुरमुर्ग बाहुबली (Ostrich bahubali) की मौत हो गई थी. उसके बाद से जू को नये नर शतुरमुर्ग का इंतजार था. वह इंतजार अब 9 महीने बाद खत्म हो गया है. जयपुर जू में चेन्नई से 4 साल के नर शतुरमुर्ग मल्लिकार्जुन (Mallikarjun) को लाया गया है.

करीब 7 दिन के लंबे सफर के बाद 125 किलो वजनी मल्लिकार्जुन सड़क मार्ग से जयपुर लाया गया है. अभी मल्लिकार्जुन को कुछ दिन क्वारेंटाइन रखा जाएगा. उसके बाद उसे जयपुर जू में पहले से मौजूद मादा शतुरमुर्ग देवसेना और अवंतिका के साथ रखा जाएगा. जयपुर हेरिटेज जू में पक्षियों का देश का सबसे बेहतरीन कलेक्शन तैयार करने के लिए वन विभाग लंबे अरसे से अपनी कोशिशें जारी रखे हुए है.

करीब 9 महीने से दोनों मादा शतुरमुर्ग अकेली ही रह रहीं थी

इसी कोशिश को मुकम्मल करने के सिलसिले में धरती के सबसे बड़े और सबसे वजनी पक्षी शतुरमुर्ग को जयपुर जू में आबाद करने की कवायद की जा रही है. लेकिन जयपुर जू को इस कोशिश में हर बार नाकामी ही मिल रही है. पहले मादा शतुरमुर्ग देवसेना प्रथम की मौत हो गई थी. उसके बाद यहां लाए गए नर शतुरमुर्ग बाहुबली की मौत हो गई. बाहुबली की मौत के बाद में करीब 9 महीने से दोनों मादा शतुरमुर्ग अकेली ही रह रहीं थी.
मल्लिकार्जुन की जोड़ी देवसेना और अवंतिका दोनों के साथ बनाई जाएगी

उसके बाद अब फिर से 2200 किलोमीटर का सड़क मार्ग का सफर पूरा कर चेन्नई से नर शतुरमुर्ग मल्लिकार्जुन को जयपुर से लाया गया है. मल्लिकार्जुन की जोड़ी देवसेना और अवंतिका दोनों के साथ बनाई जाएगी. इस जोड़े से वन विभाग को काफी उम्मीदें हैं. अफ्रीका महाद्वीप का यह पक्षी राजस्थान के माहौल में ढलने में थोड़ा समय जरूर लेगा, लेकिन एक बार अगर यहां इनका इनका प्रजनन सफल हो गया तो जयपुर में शतुरमुर्गों की अच्छी आबादी देखने को मिल सकती है.
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