खुशखबरी! अब जिला अस्पतालों में नहीं होगी डॉक्टरों की कमी, सरकार ने निकाला ये उपाय

जिला अस्पतालों में मरीजों की भीड़ और डॉक्टरों की कमी दूर करने का राज्य सरकार ने उपाय ढूंढ लिया है. अब इन अस्पतालों में भी मेडिकल के छात्र इंटर्नशिप यानी जूनियर डॉक्टर के रूप में काम कर सकेंगे.

Sachin Sharma | News18 Rajasthan
Updated: May 22, 2019, 11:32 AM IST
Sachin Sharma | News18 Rajasthan
Updated: May 22, 2019, 11:32 AM IST
राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए आने वाले मरीजों और प्रदेश के मेडिकल छात्रों के लिए एक बड़ी राहत वाली खबर है. मरीजों को अब अस्पतालों में डॉक्टर की कमी होने या डॉक्टर के नहीं आने के कारण घर लौटना नहीं पड़ेगा. सरकार ने इसके लिए एक अच्छा उपाय निकाला है. अब मेडिकल के छात्र पास करने के बाद प्रदेश में मेडिकल कॉलेज से सम्बद्ध अस्पतालों के अलावा अपने पास के किसी भी अधिकृत नॉन टीचिंग हॉस्पिटल से भी इंटर्नशिप कर सकेंगे. राज्य सरकार ने इंटर्नशिप यानी जूनियर डॉक्टर के रूप में काम करने के लिए संबद्ध अस्पतालों की सूची के साथ आदेश जारी कर दिए हैं.

क्या होता है इंटर्नशिप


मेडिकल के छात्रों के लिए पढ़ाई पूरी करने के बाद भारतीय चिकित्सा परिषद (एमसीआई) में अस्थायी रजिस्ट्रेशन कराना होता है. उसके बाद उन्हें मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पताल में प्रैक्टिकल अनुभव के लिए एक साल काम करना होता है जिसे इन्टर्नशिप कहते हैं. इस अवधि में सरकार उन्हें स्टाइपेंड भी देती है. इस दौरान इन जूनियर डॉक्टरों की विभिन्न विभागों में ड्यूटी लगाई जाती है. इस तरह एक साल काम करने का प्रमाण-पत्र मिलने के बाद ही डॉक्टरों को एमसीआई से स्थाई रजिस्ट्रेशन नंबर मिलता है जिसके आधार पर वे कहीं नौकरी या प्रैक्टिस करते हैं.

रोटेटिंग इंटर्नशिप

रोटेटिंग इंटर्नशिप के जरिए मेडिकल छात्रों को राहत मिल सकेगी. इसके साथ ही अधिकृत नॉन टीचिंग अस्पतालों में भी एमबीबीएस के छात्र इंटर्नशिप करने आएंगे तो इसका लाभ अस्पताल के मरीजों को मिल सकेगा. राज्य सरकार ने एसएमएस जयपुर सहित अजमेर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा और बीकानेर मेडिकल कॉलेज से मान्यता प्राप्त नॉन टीचिंग अस्पतालों को अधिकृत किया है. मेडिकल के छात्र इन अस्पतालों से इंटर्नशिप का सर्टिंफिकेट लेकर जमा करा सकेंगे.

अधिकृत नॉन टीचिंग हॉस्पिटल जहां से इंटर्नशिप हो सकेगी :-
1:- एसएमएस मेडिकल कॉलेज, जयपुर - शहादत हॉस्पिटल टोंक, अलवर और करौली को किया अधिकृत
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2:- जेएलएन मेडिकल कॉलेज, अजमेर - एके हॉस्पिटल ब्यावर, जिला अस्पताल नागौर को किया अधिकृत

3:- मेडिकल कॉलेज, कोटा - जनरल व मेटरनिटी हॉस्पिटल बूंदी को किया अधिकृत

4:- आरएनटी मेडिकल कॉलेज, उदयपुर- रैफरल हॉस्पिटल चित्तौडगढ, सिरोही व एमजी हॉस्पिटल बांसवाडा को किया अधिकृत

5:- एसपी मेडिकल कॉलेज, बीकानेर- एसएनजे रतनगढ, एसआरवी वीमन हॉस्पिटल रतनगढ, श्रीगंगानगर हॉस्पिटल, बीडीके झुंझुनू को किया अधिकृत

6:- एसएन मेडिकल कॉलेज जोधपुर- जवाहर हॉस्पिटल जैसलमेर व जालोर को किया अधिकृत

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