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वन विभाग को बिना सूचना दिए अब नहीं पाल सकेंगे विदेशी प्रजाति के पशु-पक्षी, ये हैं नए नियम...

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

Exotic Animals भारतीय नहीं होने की वजह से अभी तक वन्य-जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के दायरे से बाहर हैं, लेकिन अब इन विदेशी प्रजातियों के जीवों का लेखा-जोखा भी वन-विभाग (Forest Department) अपने पास रखेगा. ऐसे जीवों की आधिकारिक तौर पर घोषणा के लिए वन विभाग सभी को 6 महीने का समय देगा.

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जयपुर. अगर आप भी विदेशी प्रजाति के जीव-जंतु पालने के शौकीन हैं तो ये जानकारी आपके लिए बेहद अहम है. अब आप बिना वन-विभाग (Forest Department) को जानकारी दिए और अपने Pet का रजिस्ट्रेशन कराए बिना उसे पाल नहीं सकते हैं. इसके लिए बाकायदा एडवाइजरी भी जारी की गई है. राजस्थान वन विभाग ने इसके लिये एक फॉर्मेट भी जारी किया है. 6 माह में जानकारी देना अनिवार्य किया गया है.

इन शर्तों के साथ रजिस्ट्रेशन अनिवार्य
राजस्थान में विदेशी प्रजाति के वन्य-जीव आयात के मामलों को लेकर वन-विभाग ने एडवाइजरी जारी कर यह आदेश निकाला है कि राजस्थान में ऐसे सभी लोग जो विदेश से लाये या आये जीवों को पाल रहे या उनकी खरीद-फरोख्त का कारोबार कर रहे हैं उन्हें इस से संबधित जानकारी वन विभाग से साझा करनी होगी. हाल ही में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने ज़िंदा विदेशी जीवों को आयात करने की प्रक्रिया को कारगर बनाने और औपचारिक रूप से इसकी जानकारी जारी करने के लिए एक एडवाइजरी जारी की जिसके बाद आज राजस्थान वन-विभाग की ओर से भी ये एडवाइजरी जारी करते हुए कहा गया है कि राजस्थान में ऐसे जीवों को रखने, पालने, प्रजनन करने या उनके कारोबार की घोषणा करनी होगी और रजिस्ट्रेशन कराना होगा. वन विभाग ने इसके लिये एक फॉर्मेट जारी किया है, जिसके मुताबिक इसके लिए राज्य के मुख्य वन्य-जीव प्रतिपालक की अनुमति अनिवार्य कर दी गयी है. प्रदेश में बहुत से लोग ऐसे जीवों को पालना पसंद करते हैं, जो विदेश से लाये जाते हैं. इनमें ज्यादातर विदेशी नस्ल के पक्षी होते हैं. लव बर्ड्स (Love Birds), मकाऊ तोता (Macau Parrot), अफ्रीकी तोते (African Parrots), चूहे (Mice), विदेशी कछुए (Exotic Turtles) विदेशी छिपकली (Exotic Lizards) समेत ऐसे सैंकड़ों प्रजातियों के जीवों का आजकल कारोबार किया जाता है. लोग उन्हें पालतू बनाकर घरों में रखते हैं. अब तक उसका कोई रिकॉर्ड नहीं हुआ करता था.

वन-विभाग करेगा पंजीकरण
भारतीय नहीं होने की वजह से अभी तक ये वन्य-जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के दायरे से बाहर हैं, लेकिन अब इन विदेशी प्रजातियों के जीवों का लेखा-जोखा भी वन-विभाग अपने पास रखेगा. ऐसे जीवों की आधिकारिक तौर पर घोषणा के लिए वन विभाग सभी को 6 महीने का समय देगा. अगर इस दौरान कोई अपने पास मौजूद ऐसे Exotic Animals की जानकारी छुपायेगा तो उसके पास मौजूद ऐसे वन्य जीवों को गैर-कानूनी माना जायेगा. वन विभाग की ओर जारी की गई एडवाइजरी के मुताबिक इस योजना के जरिये  प्रदेश में विदेशी प्रजातियों के जीवित जीवों की एक लिस्ट बनेगी. 6 महीने में सभी को ऐसे जीवों की खुद आगे आकर घोषणा करनी होगी. जिसका वन-विभाग पंजीकरण करेगा.

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फिजिकल वेरिफिकेशन भी किया जाएगा
1 जनवरी 2020 तक कि स्थिति के हिसाब से ऐसे जीवों के मालिक या उनका स्टॉक रखने वालों का मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक की ओर से परिवेश पोर्टल के जरिये पंजीकरण किया जाएगा. उनके स्टॉक की जानकारी दी जाएगी और विदेश से आयात किये गए ऐसे जीवों की उत्पत्ति की जानकारी दी जाएगी. ऐसे जीवों का पंजीकरण और फिजिकल वेरिफिकेशन करने के बाद ऐसे जीवों को रखने का ऑनलाइन सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा. ऐसे जीवों के फिजिकल वेरिफिकेशन के लिए मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक की ओर से एक अधिकारी नियुक्त किया जाएगा. ये अधिकारी उस जगह का मुआयना भी करेगा जहां ऐसे जीवों को रखा जाता है. घोषणा के बाद किसी भी जीव को किसी और को दिए जाने या उसकी मृत्यु हो जाये या फिर उसका कोई व्यापार हो तो इसकी जानकारी भी मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक को 30 दिनों के भीतर देनी होगी. इसकी एक रसीद मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक द्वारा जारी की जाएगी. अगर ऐसे जीवों को रखने वाले या उनका स्टॉक रखने वाले किसी भी चिड़ियाघर में ऐसे जीवों को सरेंडर करने की इच्छा रखते हैं तो संबंधित चिड़ियाघर से स्वीकृति के लिए अनुरोध किया जा सकता है. यहां ये जरुर परखा जाएगा कि विदेशी जीव मापदंडों के मुताबिक सभी तरह के संक्रमण से मुक्त है. इस तरह मामलों में विदेश से अब ऐसे नए जीव आयात करने से पहले भी सभी आयातकों को मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक से एक बार अपना पंजीकरण कराना होगा. साथ ही इन जीवों के लिए आवास की सुविधाओं का विवरण भी देना होगा.

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