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Jaipur: एक ट्रेन, 178 कुली, भुखमरी की नौबत; सबको काम मिले इसलिए बांधी 'बारी'

Jaipur: एक ट्रेन, 178 कुली, भुखमरी की नौबत; सबको काम मिले इसलिए बांधी 'बारी'

जयपुर जंक्शन पर पिछले 33 साल से काम कर रहे कुली इस्लामुद्दीन बताते हैं कि उन्होंने अपनी जिंदगी में ऐसा समय कभी नहीं देखा.

जयपुर जंक्शन पर पिछले 33 साल से काम कर रहे कुली इस्लामुद्दीन बताते हैं कि उन्होंने अपनी जिंदगी में ऐसा समय कभी नहीं देखा.

लंबे लॉकडाउन (Lockdown) के बाद हुए Unlock-1 में चली ट्रेनें भी बेरोजगार बैठे कुलियों को राहत नहीं दे पाई है. जयपुर में कुलियों (Porters) के हालात इस कदर खराब हो चुके हैं कि 178 कुलियों के बीच एक ट्रेन है जो उनकी पेट भराई का जरिया है.

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जयपुर. लंबे लॉकडाउन (Lockdown) के बाद हुए अनलॉक-1 (Unlock-1) में चली ट्रेनें भी बेरोजगार बैठे कुलियों को राहत नहीं दे पाई है. जयपुर में कुलियों (Porters) के हालात इस कदर खराब हो चुके हैं कि 178 कुलियों के बीच एक ट्रेन है, जो उनकी पेट भराई का जरिया है. हालात के मारे आधे से ज्यादा कुली यहां से पलायन कर चुके हैं. शेष बचे कुलियों ने सबके घरों में चूल्हा जलता रहे और बाल बच्चों का पेट भरता रहे इसके लिए अब बारी (Rotation) बांधी ली है. एक दिन आधे कुली ट्रेन पर आते हैं तो दूसरे दिन आधे.

सदियों की तरह गुजरा है तीन महीने का समय

कहने को ये लॉकडाउन 3 महीने का था, लेकिन यह समय जयपुर जंक्शन पर काम करने वाले कुलियों के लिए सदियों की तरह गुजरा हैं. जयपुर जंक्शन पर वर्तमान में दिनभर में एक ही ट्रेन ऐसी है जो इन कुलियों के लिए जिंदा रहने का सहारा है. वह ट्रेन है मुंबई-जयपुर. जयपुर जंक्शन पर कुल 178 कुली हैं. लॉकडाउन से पहले प्रतिदिन लगभग नियमित और साप्ताहिक मिलाकर 125 ट्रेनें चलती थी. अब महज 4 से 6 ट्रेनें चल रही हैं.

अधिकांश कम दूरी की ट्रेनें हैं

इनमें से भी अधिकांश कम दूरी की ट्रेनें हैं. इनमें सफर करने वाले यात्रियों को कुलियों की ज़रूरत ही नहीं पड़ती. लंबी दूरी की केवल एक ट्रेन दोपहर में मुंबई से जयपुर आती है. पहले सभी 178 कुली उसके पीछे दौड़ते थे, लेकिन हालात को देखकर आधे से ज्यादा कुल अपने-अपने गांव लौट गए. अब पीछे बचे 60 कुली अब केवल इसी ट्रेन के सहारे है. यही लंबी दूरी की ट्रेन यहां आती है और वापस जाती है, जिससे कुलियों को थोड़ा-बहुत रोजगार मिलता है.

ताकि सभी के घरों में जैसे-तैसे कर परिवार पलता रहे

हालात के मद्देनजर शेष बचे करीब 60 कुलियों ने आपस में समझौता किया. इसके तहत आधे कुल एक दिन आते हैं और आधे दूसरे दिन. यह व्यवस्था कुलियों ने स्वयं मिलकर आपसी समझौते के तहत इसलिए की ताकि सभी के घरों में जैसे-तैसे कर परिवार पलता रहे. हालांकि इस बात की भी गारंटी नहीं होती है कि इस ट्रेन से सभी को रोजगार मिल जाए, क्योंकि फिलहाल यात्री भी सीमित संख्या में यात्रा कर रहे हैं.

जिंदगी में ऐसा समय कभी नहीं देखा

जयपुर जंक्शन पर पिछले 33 साल से काम कर रहे कुली इस्लामुद्दीन बताते हैं कि उन्होंने अपनी ज़िंदग़ी में ऐसा समय कभी नहीं देखा. कुलियों की गुहार है कि सरकार उनके लिए भी किसी राहत पैकेज की घोषणा करें. कुली उन सामाजिक संस्थाओं का धन्यवाद देते हुए नहीं थक रहे हैं जिन्होंने इस विकट समय में उनको राशन बांटा. लेकिन अब ट्रेनें शुरू होने के नाम पर वो मदद मिलना भी बंद हो गई. लिहाजा एक ट्रेन पर गुजारा कर रहे कुली ना इधर के रहे ना उधर के. इन्हें अब इंतज़ार है कि जल्द से जल्द जयपुर जंक्शन से चलने वाली सभी ट्रेनें शुरू हों, ताकि उनके घरों में नियमित रूप से चूल्हा जलता रहे और दो वक्त की रोटी का जुगाड़ हो सके.



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Tags: Indian railway, Jaipur news, Rajasthan News Update

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