उत्तर पश्चिमी रेलवे: जल्द खत्म होगा जयपुर जंक्शन के विद्युतीकरण का इंतजार, डीजल इंजनों की होगी विदाई
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उत्तर पश्चिमी रेलवे: जल्द खत्म होगा जयपुर जंक्शन के विद्युतीकरण का इंतजार, डीजल इंजनों की होगी विदाई
जयपुर रेलवे स्टेशन की पूरी लाइन पर विद्युत पोल का जाल बिछा दिया गया है. जल्द यहां से डीजल के इंजनों की विदाई हो जाएगी.

ट्रेनों (Trains) में आधुनिक सुविधाओं का विस्तार करने में जुटा उत्तर पश्चिमी रेलवे (North Western Railway) गत 5 बरसों में 1,620 किलोमीटर ट्रैक का विद्युतीकरण (Electrification) कर चुका है.

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जयपुर. ट्रेनों में आधुनिक सुविधाओं का विस्तार करने में जुटा उत्तर पश्चिमी रेलवे (North Western Railway) गत 5 बरसों में 1,620 किलोमीटर ट्रैक का विद्युतीकरण (Electrification) कर चुका है. इस वित्तीय वर्ष में 370 किलोमीटर ट्रैक का विद्युतीकरण किया गया है. हाल ही में आए केन्द्रीय बजट (Central budget) में NWR के ट्रैक को इलेक्ट्रीफाई करने की प्राथमिकता दी गई है. ये बजट पूरे NWR को इलेक्ट्रीफाई कर देगा. NWR के सबसे बड़े जंक्शन जयपुर (Jaipur Junction) का भी विद्युतीकरण का इंतज़ार जल्द खत्म होने वाला है. जयपुर रेलवे स्टेशन की पूरी लाइन पर विद्युत पोल का जाल बिछा दिया गया है और जल्द यहां से डीजल के इंजनों की विदाई हो जाएगी.

इस बार का लक्ष्य लगभग 2,946 किलोमीटर का है
उत्तर पश्चिमी रेलवे पिछले डेढ़ साल में कई बार ब्लॉक और ट्रैक के दोहरीकरण के चलते सैंकड़ों ट्रेनों को रद्द कर चुका है. ये ब्लॉक अमूमन 15 से 20 दिनों का रहता है इससे यात्रियों को असुविधा का सामना भी करना पड़ता है, लेकिन अब इसके सकारात्मक नतीजे भी आने लगे हैं. उत्तर पश्चिमी रेलवे के सीपीआरओ अभय शर्मा ने बताया कि उम्मीद है कि इस बार के बजट से सभी रेलवे स्टेशन का विद्युतीकरण कर दिया जाएगा. इस बार का लक्ष्य लगभग 2,946 किलोमीटर का है. इससे कुल इलेक्ट्रिफाई ट्रैक लगभग 5000 किलोमीटर हो जाएगा. NWR के तहत 4 बड़े रेलवे स्टेशन अजमेर, जयपुर, जोधपुर और बीकानेर आते हैं. छोटे रेलवे स्टेशनों को मिलाकर इनकी कुल संख्या 545 के करीब है.

वर्ष 2019-20 में जिन ट्रैक का विद्युतीकरण किया गया



1. सूरतगढ़-विरधवाल 27.48 किलोमीटर


2. भीनवालिया-रानी जवाई बांध 61.96 किलोमीटर
3. सवाईमाधोपुर-शिवदासपुरा 106.54 किलोमीटर
4. कनकपुरा-फुलेरा 48.60 किलोमीटर
5. रेवाड़ी-महेन्द्रगढ़ 50.09 किलोमीटर
6. अलवर-बांदीकुई 62.25 किलोमीटर
7. मदार-अजमेर-आदर्श नगर 12.81 किलोमीटर

ये होंगे फायदे

1. रेलों की औसत गति में इज़ाफ़ा होगा.
2. डीज़ल इंजन के धुएं से होने वाले प्रदूषण से छुटकारा मिलेगा.
3. भार वहन करने की क्षमता बढ़ेगी.
4. ज़्यादा रेलों का संचालन मुमकिन होगा.
5. आधुनिक सुविधाओं का विस्तार हो सकेगा.
6. ईंधन आयात पर निर्भरता कम होगी.
7. यात्रियों की यात्रा समय पर पूरी होगी.
8. राजस्व की बचत होगी.
9. इंजन बदलने के समय में कमी आएगी.

 

 

अब ट्रेन में आराम से सोएं, रेलवे कहेगा- जाग जाइए, आपका स्टेशन आने वाला है

 

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