सूबे की गहलोत सरकार के सामने अब मंत्रिमंडल का गठन बड़ी चुनौती

सचिन पायलट और अशोक गहलोत
सचिन पायलट और अशोक गहलोत

प्रदेश के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण करने के बाद अब अशोक गहलोत के सामने मंत्रिमंडल का गठन बड़ी चुनौती होगी. सोमवार को गहलोत के साथ उप मुख्यमंत्री के तौर पर केवल सचिन पायलट ने शपथ ग्रहण की है.

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प्रदेश के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण करने के बाद अब अशोक गहलोत के सामने मंत्रिमंडल का गठन करना बड़ी चुनौती होगी. सोमवार को गहलोत के साथ उप मुख्यमंत्री के तौर पर केवल सचिन पायलट ने शपथ ग्रहण की है. मंत्री के रूप में अभी तक किसी को शपथ नहीं दिलाई गई है. इस बारे में गहलोत पहले ही कह चुके हैं कि राष्ट्रीय नेतृत्व से बातचीत कर इसका निर्णय लिया जाएगा.

इस बार गहलोत के लिए मंत्रिमंडल का गठन इसलिए भी चुनौतीपूर्ण होगा, क्योंकि इसमें पार्टी के दोनों पावर सेंटर के लोगों का समायोजन करना होगा. फिर विधानसभा चुनावों के बाद लगे हाथ कुछ माह बाद लोकसभा के चुनाव भी होने हैं. लिहाजा लोकसभा चुनावों के मद्देनजर राजनीतिक, क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को पूरी तरह से साधकर मंत्रिमंडल का गठन करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है.

हाड़ौती, शेखावाटी और जयपुर से सबसे ज्यादा दावेदार
इस बार कांग्रेस ने अपने परपंरागत गढ़ शेखावाटी के अलावा बीजेपी के गढ़ जयपुर और हाड़ौती (कोटा) संभाग में भी अपना परचम लहराया है. इन्हीं क्षेत्रों से सबसे ज्यादा दावेदार हैं. वहीं पार्टी के कई पुराने और दिग्गज विधानसभा पहुंचे हैं तो कई नए और साधारण नेता बीजेपी के दिग्गजों को हराकर विजेता बने हैं. दूसरी तरफ कुछ बड़े ऐसे नेता भी हैं, जिन्होंने टिकट नहीं मिलने से नाराज होकर बगावत कर दी और चुनाव मैदान में डट गए थे. इनमें से भी कुछ विधानसभा पहुंचने में सफल हुए हैं. हालांकि बागियों को पार्टी ने छह साल के लिए निष्कासित कर दिया था, लेकिन उनकी जीत का अंतर और लोकसभा चुनावों को देखते हुए उनकी वापसी की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता.
कांग्रेस ये दिग्गज बगावत कर पहुंचे हैं विधानसभा


खंडेला से महादेव सिंह, दूदू बाबूलाल नागर और सिरोही से संयम लोढ़ा. लोकसभा चुनावों के मद्देनजर अगर इनकी पार्टी में वापसी होती है तो ये भी प्रबल दावेदारों की सूची में शामिल होंगे

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