राजस्थान में उद्योग लगाना हुआ आसान, 3 साल तक सरकारी मंजूरी की जरूरत नहीं

राजस्थान में अब नया उद्योग लगाना आसान हो गया है. अब 3 साल तक नया उद्योग लगाने के लिए सरकारी मंजूरी की जरूरत नहीं होगी. इससे जुड़ा एमएसएमई बिल मंगलवार को राजस्थान विधानसभा में पारित कर दिया गया.

News18 Rajasthan
Updated: July 9, 2019, 9:25 PM IST
राजस्थान में उद्योग लगाना हुआ आसान, 3 साल तक सरकारी मंजूरी की जरूरत नहीं
विधानसभा। फाइल फोटो।
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Updated: July 9, 2019, 9:25 PM IST
राजस्थान में अब नया उद्योग लगाना आसान हो गया है. अब 3 साल तक नया उद्योग लगाने के लिए सरकारी मंजूरी की जरूरत नहीं होगी. पहले नया उद्योग लगाने के लिए कई तरह की सरकारी मंजूरियां लेनी पड़ती थी. इससे उद्यमियों का बहुत सा वक्त जाया होता था, लेकिन अब बिना किसी मंजूरी के सीधे उद्योग लगा सकेंगे. इससे जुड़ा एमएसएमई बिल मंगलवार को विधानसभा में ध्वनिमत से पारित कर दिया गया है. यह बिल पारित करने वाला राजस्थान अग्रणी राज्य बन गया है.

सरकार अध्यादेश लाकर इसके प्रावधान पहले ही लागू कर चुकी है
बिल पारित होने से अब नया उद्योग लगाना बेहद आसान हो जाएगा. लोकसभा चुनाव से पहले सरकार एमएसएमई संशोधन अध्यादेश लाकर इसके प्रावधान लागू कर चुकी है. अध्यादेश को छह माह के भीतर बिल के तौर पर सदन में रखकर पारित करवाना होता है. मंगलवार को विधानसभा में एमएसएमई बिल बहस के बाद ध्वनिमत से पारित कर दिया गया है. अब उद्योग लगाने के 3 साल बाद छह माह के भीतर सरकारी मंजूरियां लेनी होंगी.

बीजेपी ने की मत विभाजन की मांग

बिल पर बहस के दौरान नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया और उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने इसकी खामियां गिनाते हुए इसे जनमत जानने के लिए भेजने की मांग की. बीजेपी ने एमएसएमई बिल पर मत विभाजन की मांग की, लेकिन अध्यक्ष ने मत विभाजन नहीं करवाया. इस दौरान संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल की ओर से नेता प्रतिपक्ष पर की गई टिप्पणी से हंगामा हो गया. संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल ने पूछा बीजेपी राज में कितने बिल जनमत जानने के लिए भेजे गए.

धारीवाल ने कटारिया पर की टिप्पणी, सदन में हुआ हंगामा
धारीवाल ने कटारिया पर की टिप्पणी करते हुए कहा कि जब आप शिक्षक थे तो बच्चों की हाजिरी लेते थे, अब विधायकों की हाजिरी लेने लग गए. इस पर कटारिया सहित बीजेपी विधायकों ने कड़ी आपत्ति की. इससे सदन में कुछ देर के लिए तनाव की स्थिति बन गई और काफी देर तक हंगामा होता रहा. उसके बाद अध्यक्ष ने संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल की टिप्पणी को कार्यवाही से निकालने का आश्वासन दिया. तब जाकर हंगामा शांत हुआ. इसके बाद एमएसएमई बिल को पारित किया गया.
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First published: July 9, 2019, 8:46 PM IST
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