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Rajasthan: अब कोविड-19 का मेडिकल वेस्ट भी बढ़ा रहा है संक्रमण का खतरा, बढ़ता जा रहा है इसके कचरे का अंबार

राजस्थान में अक्टूबर में 171 मीट्रिक टन से ज्यादा का कोविड वेस्ट निकला. सितंबर में इसकी तादाद 145.08 मीट्रिक टन थी.
राजस्थान में अक्टूबर में 171 मीट्रिक टन से ज्यादा का कोविड वेस्ट निकला. सितंबर में इसकी तादाद 145.08 मीट्रिक टन थी.

कोविड-19 के संक्रमण के दौर में अब नई मुसिबत (New problem) भी खड़ी होने लगी है. कोविड से खुद को सुरक्षित रखने के लिये उपयोग में लिये जा रहे संसाधनों का कचरा (Covid Medical West) दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है.

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जयपुर. कोविड-19 के संक्रमण के बीच अब कोविड मेडिकल वेस्ट (Covid Medical West) से भी कोरोना संक्रमण (Infection) का खतरा बढ़ता जा रहा है. आज कोरोना से खुद को महफूज रखने के लिए मास्क, पीपीई किट, ग्लब्ज और हैंड सेनेटाइजर हर किसी की जरूरत बन चुके हैं. कोविड मेडिकल वेस्ट डिस्पोज होने के बाद यह सारा कचरा लैंडफिल साइट्स में पहुंचता है. यह उसके आस-पास रहने वालों के साथ-साथ पर्यावरण (Environment) के लिये भी खतरा पैदा कर रहा है.

राजस्थान में कोराना से सुरक्षा के लिए जो संसाधन काम में लिये जा रहे हैं उनकी उपयोगिता बढ़ने से कोविड वेस्ट काफी ज्यादा बढ़ गया है. सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की रिपोर्ट को देखा जाए तो हर महीने अकेले राजस्थान में सैंकड़ों मीट्रिक टन कोविड मेडिकल कचरा निकल रहा है. सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान से अक्टूबर माह में 171.554 मीट्रिक टन कोविड वेस्ट निकला है. वहीं सितंबर में इसकी तादाद 145.08 मीट्रिक टन थी. जबकि अगस्त माह में यह 50.43 मीट्रिक टन और जुलाई में महज 7.15 मैट्रिक टन कोविड कचरा निकला था.

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भारत में रोजाना 702 मीट्रिक टन मेडिकल वेस्ट निकल रहा है


कोरोना वायरस संक्रमण के बाद से मेडिकल वेस्ट और ज्यादा बढ़ गया है. सेन्ट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के मुताबिक भारत में रोजाना 702 मीट्रिक टन मेडिकल वेस्ट निकल रहा है. इसमें से 17% यानी 101 मीट्रिक टन मेडिकल वेस्ट सिर्फ कोरोना की वजह से निकल रहा है. राजस्थान में अक्टूबर में 171.554 मीट्रिक टन का कोविड वेस्ट निकला. सितंबर में इसकी तादाद 145.08 मीट्रिक टन थी. राजधानी जयपुर में एक ओर कोरोना को लेकर लोगों की जागरुकता बढ़ रही है तो दूसरी ओर इसकी वजह से दूसरी समस्या भी खड़ी हो रही है.

सेनेटाइजर की खाली बोतलों का अंबार लगा है
अब कचरे के ढेर में सेनिटाइजर की खाली बोतलों का अंबार लगा है. इसी तरह दस्ताने और दूसरे ऐसे कबाड़ काफी आने लग गये हैं. शहर के लाल डूंगरी डिपो में करीब 50 मजदूर ऐसे हैं जो बिना सुरक्षा संसाधनों के यहां कचरा छांटने का काम कर रहे हैं. यहां काम करने वाली यास्मीन का कहना है कि हम लोग यहां कई साल से काम कर रहे हैं. इस साल भी कोरोना की शुरुआत से हम यहां काम कर रहे हैं. ये अपने आप मे कुदरत का एक करिश्मा ही है कि यहां काम करने वाले 50 से ज्यादा मजदूर बिना किसी सुरक्षा संसाधन के 8-9 महीने से काम कर रहे हैं, लेकिन अभी तक किसी को कोरोना नहीं हुआ. लेकिन खतरा लगातार बना हुआ है. ऐसे में ये लोग मांग कर रहे है कि उन जैसे कोरोना वारियर्स के लिए भी मास्क और सेनिटाइजर मुहैया कराए जाने चाहिए ताकि वे सुरक्षित रह सकें.
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