Rajasthan: कांग्रेस में अब पायलट नहीं माकन फॉर्मूला चलेगा, PCC में बंद हुई जनसुनवाई, जिलों में जाएंगे मंत्री

पिछले साल सितंबर में सत्ता और संगठन की हुई साझा बैठक में पीसीसी में मंत्रियों द्वारा जनसुनवाई किये जाने का सिस्टम शुरू करने का फैसला किया गया था.
पिछले साल सितंबर में सत्ता और संगठन की हुई साझा बैठक में पीसीसी में मंत्रियों द्वारा जनसुनवाई किये जाने का सिस्टम शुरू करने का फैसला किया गया था.

Rajasthan Congress: प्रदेश कांग्रेस कमेटी कार्यालय में होने वाली जनसुनवाई को बंद कर दिया गया है. अब मंत्री नये प्रदेश प्रभारी अजय माकन के फॉर्मूल पर काम करते हुये जिलों में जनसुनवाई करेंगे.

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जयपुर. पूर्व पीसीसी चीफ सचिन पायलट (Sachin Pilot) के समय राजस्‍थान कांग्रेस कमेटी कार्यालय (PCC) में शुरू जनसुनवाई का सिस्टम अब स्थायी रूप से बंद कर दिया गया है. सरकार के मंत्री अब पीसीसी में जनसुनवाई नहीं करेंगे. इसके बजाय अब वे प्रदेश प्रभारी अजय माकन (Ajay Maken) के नये फॉर्मूले पर काम करते हुए जिलों में जाकर जनसुनवाई करेंगे. तय फॉर्मूले के अनुसार अब मंत्रियों को हर महीने जिले में जनसुनवाई करके अपनी रिपोर्ट कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष और सीएम को देनी होगी.

नए प्रदेश प्रभारी के रूप में कार्यभार संभालने वाले अजय माकन ने पीसीसी की बजाय जिलों में जनसुनवाई का सिस्टम शुरू कर दिया है. बताया जा रहा है कि पीसीासी में होने वाली मंत्रियों की जनसुनवाई का ग्रासरूट स्तर पर आम जनता और कार्यकर्ताओं में कोई खास प्रभाव नहीं पड़ रहा था. कांग्रेस के रणनीतिकारों का मानना है कि पीसीसी की जनसुनवाई की बजाय जिलों में आम जनता की सुनवाई से ज्यादा प्रभाव पड़ता है.

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नई व्यवस्था से मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड भी तैयार होगा
नई व्यवस्था में मंत्री जिलों के दौरों में वहां पार्टी के दफ्तरों में जाकर पदाधिकारियों से भी मिलेंगे. नई व्यवस्था का मकसद मंत्रियों का जिलों में पार्टी के कार्यकर्ताओं तक सीधा संवाद कायम करना और जमीनी स्तर तक सरकार और पार्टी का फीडबैक लेना है, ताकि स्थानीय स्तर पर अगर जनता या कार्यकर्ताओं में नाराजगी हो तो उसे दूर किया जा सके. इस व्यवस्था से मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड भी तैयार होगा. माकन के नए फार्मूले के मुताबिक मंत्रियों ने जिलों में जनसुनवाई का एक दौर पूरा कर लिया है.

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पीसीसी में जनसुनवाई का हाल
उल्लेखनीय है कि पिछले साल सितंबर में सत्ता और संगठन की हुई साझा बैठक में पीसीसी में मंत्रियों द्वारा जनसुनवाई किये जाने का सिस्टम शुरू करने का फैसला किया गया था. उसके बाद पीसीसी में मंत्रियों की जन सुनवाई का सिलसिला बमुश्किल तीन माह ही चल पाया. फरवरी में विधानसभा का बजट सत्र और फिर कोराना महामारी के कारण पीसीसी में जनसुनवाई नहीं हुई.
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