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जयपुर में शराबियों की पौ-बारह, शराब की दुकानों से ज्यादा खुले बीयर बार

जयपुर में शराबियों की पौ-बारह, शराब की दुकानों से ज्यादा खुले बीयर बार

शराब के तलबगार लोगों के लिए राजधानी में शराब की कोई कमी नहीं. आबकारी विभाग ने शराब की दुकानों से ज्यादा शहर में बार खोल दिए हैं जो कि रात 11 बजे तक शराब के तलबगारों का गला तर कर रहे हैं और जेब हल्की.

शराब के तलबगार लोगों के लिए राजधानी में शराब की कोई कमी नहीं. आबकारी विभाग ने शराब की दुकानों से ज्यादा शहर में बार खोल दिए हैं जो कि रात 11 बजे तक शराब के तलबगारों का गला तर कर रहे हैं और जेब हल्की.

शराब के तलबगार लोगों के लिए राजधानी में शराब की कोई कमी नहीं. आबकारी विभाग ने शराब की दुकानों से ज्यादा शहर में बार खोल दिए हैं जो कि रात 11 बजे तक शराब के तलबगारों का गला तर कर रहे हैं और जेब हल्की.

    शराब के तलबगार लोगों के लिए राजधानी में शराब की कोई कमी नहीं. आबकारी विभाग ने शराब की दुकानों से ज्यादा शहर में बार खोल दिए हैं जो कि रात 11 बजे तक शराब के तलबगारों का गला तर कर रहे हैं और जेब हल्की.

    हर कॉलोनी में कई बार
    मद्य निषेध से दूर राजस्व महकमा बने आबकारी विभाग ने लघु काशी कही जाने वाली राजधानी जयपुर को शराब का केंद्र बना दिया है. शहर में जहां अंग्रेजी शराब की 206 दुकानें हैं जो सुबह दस बजे खुलकर रात आठ बजे बंद हो जाती हैं वहीं होटल, क्लब, रेस्टारेंट में 251 बार खोल दी हैं. इन बार से आबकारी विभाग को लाइसेंस फीस के तौर पर सालाना 20 करोड़ से अधिक राजस्व मिलता है वहीं करीब सौ करोड़ रुपए शराब खपत से भी प्राप्त होते हैं.

    जमकर कमाई
    दूसरे शब्दों में कहें तो शहर में शराब की उपलब्धता अब सुबह से लेकर रात ग्यारह बजे तक है.यह अलग बात है कि रात्रि आठ बजे बाद आपको गला तर करने के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ेंगे.दरअसल आबकारी विभाग जानता है कि शहर में अंग्रेजी शराब की दुकानों की संख्या निश्चित है लेकिन होटल, रेस्टारेंट और क्लबों में बार के कितने ही लाइसेंस दिया जा सकते हैं.ऐसे में विभाग ने शराब की दुकानों से ज्यादा बार लाइसेंस जारी कर मद्य निषेध की भावना को तार तार कर दिया है. सूत्रों का कहना है कि राजस्व के लालच में विभाग के ही कुछ अधिकारी होटल, रेस्टारेंट मालिकों से जमकर याराना निभा रहे हैं. ऐसे में राजधानी में शराब का चलन तो बढ़ ही रहा है साथ ही साथ अपराध का ग्राफ भी बढ़ता जा रहा है.
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