OPINION- राजस्थान में किसका खेल बिगाड़ेंगे हनुमान बेनीवाल?

हनुमान बेनीवाल की अपनी सियासी ताकत है. पश्चिम राजस्थान में जाट समुदाय में खासे लोकप्रिय हैं. ऐसे में नई पार्टी बनने के बाद सभी की नजरें जाट वोट बैंक पर होंगी.

भवानी सिंह | News18Hindi
Updated: October 11, 2018, 6:33 PM IST
OPINION- राजस्थान में किसका खेल बिगाड़ेंगे हनुमान बेनीवाल?
निर्दलीय विधायक हनुमान बेनीवाल (File photo/twitter)
भवानी सिंह | News18Hindi
Updated: October 11, 2018, 6:33 PM IST
खींवसर से निर्दलीय विधायक हनुमान बेनीवाल ने नई पार्टी के गठन का ऐलान कर दिया है. 29 अक्टूबर को जयपुर में किसान हुंकार रैली के साथ ही पार्टी के नाम का ऐलान होगा. पार्टी का आकार क्या होगा, कौन-कौन नेता होंगे, पार्टी कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी, किसके साथ गठजोड़ करेगी, इसकी पूरी तस्वीर 29 अक्टूबर को ही साफ होगी. ऐसे में बड़ा सवाल है कि बेनीवाल विधानसभा चुनाव में सत्ताधारी बीजेपी या फिर विपक्षी कांग्रेस में से किसका खेल बिगाड़ेंगे.

राजस्थान में 7 दिसंबर को विधानसभा चुनावों के लिए मतदान होगा. उससे करीब एक महीने पहले जिस पार्टी का गठन होगा, उसकी चुनौती को लेकर संशय हो सकता है. लेकिन हनुमान बेनीवाल की अपनी सियासी ताकत है. पश्चिम राजस्थान में जाट समुदाय में खासे लोकप्रिय हैं. ऐसे में नई पार्टी बनने के बाद सभी की नजरें जाट वोट बैंक पर होंगी.

राजस्थान की करीब 40 सीटों पर जाटों का खासा प्रभाव है. खासकर पश्चिम राजस्थान के 7 जिलो में. हनुमान बेनीवाल ने जाट बहुलता वाले जिले बाड़मेर, सीकर और बीकानेर में किसान हुंकार रैलियों में भारी भीड़ जुटाकर अपनी ताकत दिखा चुके हैं. लेकिन उनके पास अपना सियासी मंच नहीं होने से अब तक इस भीड़ के सियासी समर में असर डालने की उम्मीद कम मानी जा रही थी.

मीणा समुदाय में लोकप्रिय किरोड़ीलाल मीणा के साथ गठजोड़ कर हनुमान बेनीवाल ने राजस्थान में तीसरा मोर्चा बनाने की कोशिश की थी, लेकिन मीणा के बीजेपी का दामन थामने के साथ ही तीसरा मोर्चा या फिर बीजेपी कांग्रेस को किसी तीसरी चुनौती की राजस्थान में उम्मीद खत्म हो चुकी थी.

अब सवाल यह है कि चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद बेनीवाल के पार्टी बनाने का असर क्या होगा. चुनावी विश्षेलक दावा कर रहे हैं कि हनुमान बेनीवाल पश्चिम राजस्थान की जाट प्रभाव वाली सीटों पर वोट कटवा साबित हो सकते हैं. ऐसे में कांटे की टक्कर वाली सीट पर अगर बेनीवाल का मजबूत जाट उम्मीदवार हो तो बीजेपी या कांग्रेस प्रत्याशी का खेल बिगाड़ सकते हैं.

वरिष्ठ पत्रकार सत्येंद्र चौधरी का मानना है जाट समुदाय अरसे से खुद की जाति के सीएम का सपना देख रही है. कांग्रेस की सियासत में जाटों के दबदबे के बावजूद पहले अशोक गहलोत के सीएम बनने और इस बार सचिन पायलट के रूप में दूसरा बड़ा दावेदार आने से जाटों का सीएम का सपना टूट गया है, जिसका फायदा हनुमान बेनीवाल उठा सकते हैं. सत्ता विरोधी लहर में बीजेपी से नाराज जाट समुदाय कांग्रेस के पक्ष में पूरी तरह जाने के बजाय बंट सकता है, जिससे कांग्रेस को नुकसान हो सकता है.

जब हनुमान बेनीवाल से पूछा गया कि चुनावी शंखनाद के बाद उनकी पार्टी क्या कोई असर डाल पाएगी, क्या बीजेपी या कांग्रेस का खेल बिगाड़ पाएगी तो बेनीवाल ने दावा किया कि उनकी पार्टी दोनों पार्टियो का खेल बिगाड़ेगी. बेनीवाल ने दावा किया कि वे दूसरी पार्टियों के साथ गठजोड़ कर विकल्प देने की कोशिश करेंगे.
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राजस्थान के चुनाव पर नजर रखने वाले विश्लेषकों का मानना है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह के बेटे मानवेंद्र सिंह अगर कांग्रेस में शामिल होते हैं तो जाट समुदाय के वोट बैंक में हनुमान बेनीवाल जाट बहुल सीटों पर, खासकर जैसलमेर और बाड़मेर जिले की सीटों पर सेंध लगा सकते हैं. पश्चिम राजस्थान में जाट और राजपूतों के बीच सियासी वर्चस्व की जंग चलती रही है.
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