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ब्रेन डेड सुनील बना देवदूत, 4 लोगों को दी नई जिंदगी, दुनिया से अलविदा होकर भी है जिंदा

एसएमएस अस्पताल में डॉक्टर्स के बेहतर प्रयासों के बावजूद सुनील ब्रेन डेड की स्थिति में चला गया था. 19 फरवरी को उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया था.

एसएमएस अस्पताल में डॉक्टर्स के बेहतर प्रयासों के बावजूद सुनील ब्रेन डेड की स्थिति में चला गया था. 19 फरवरी को उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया था.

Organ donation in Jaipur: राजस्थान में एक बार फिर अंग दान की बड़ी मानवीय कहानी सामने आई है. सड़क हादसे में घायल हुये सी ...अधिक पढ़ें

जयपुर. राजस्थान के सीकर जिले का 24 साल का सुनील (Sunil) असमय ही दुनिया से विदा होकर भी आज जिंदा है. सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुये सुनील का ब्रेन डेड (Brain dead) हो गया था. इस पर सुनील के परिजनों ने चिकित्सकों की उसके हार्ट, लीवर और किडनी (Heart, Liver and Kidney) को दान कर दिया. सुनील के अंग दान (Organ Donation) से चार लोगों को नई जिंदगी मिल गई है. अब सुनील का दिल किसी और के शरीर में धड़केगा. उसकी किडनियां दो लोगों की जिंदगी को सींचेगी. सुनील के शरीर से ये अंग निकालने के बाद उसके शव को ससम्मान उसके परिजनों को सौंप दिया गया है. सुनील के परिजनों के इस कदम के बारे में जिस किसी ने भी सुना वह उन्हें सराहे बिना नहीं रह सका.

दरअसल सीकर जिले के दूजोद गांव का निवासी सुनील गत 16 फरवरी को सड़क हादसे में घायल हो गया था. गंभीर चोट आने के कारण सुनील को पहले सीकर के एसके अस्पताल में भर्ती कराया गया. वहां उसकी हालत में सुधार नहीं होने पर उसे जयपुर सवाई मानसिंह अस्पताल लाया गया.

19 फरवरी को सुनील को ब्रेन डेड घोषित किया गया
एसएमएस अस्पताल में डॉक्टर्स के बेहतर प्रयासों के बावजूद सुनील ब्रेन डेड की स्थिति में चला गया. 19 फरवरी को सुनील का ब्रेन डेड होने के बाद न्यूरो सर्जरी यूनिट हेड डॉ. देवेंद्र पुरोहित और सोटो की टीम की ने उसके परिजनों को ऑर्गन डोनेशन के लिए समझाइश की गयी. इस पर सुनील के परिजनों ने सहमति दे दी. उसके बाद चिकित्सकों ने अंग प्रत्यारोपण की कार्रवाई शुरू की.

इन तीन अस्पतालों में मरीजों को लगाये गये अंग
सुनील की दोनों किडनियों को सवाई मानसिंह अस्पताल में दो जरुरतमंदों मरीजों को लगाया है. वहीं मैचिंग के बाद सुनील के हार्ट को इटर्नल हॉस्पिटल भेजा गया. जबकि लीवर ट्रांसप्लांट मणिपाल अस्पताल में मरीज को किया गया. सुनील के अंगों को सुरक्षित और जल्दी अस्पतालों में पहुंचाने के लिये ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया. अंगदान के बाद पुलिस कर्मचारियों ने सुनील को गार्ड ऑफ ऑनर दिया.

राजस्थान में तेज हुआ है अंगदान का सिलसिला
उल्लेखनीय है कि राजस्थान में बीते वर्षों में अंगदान का सिलसिला काफी तेज हुआ है. ब्रेन डेड होने वाले मरीजों के परिजन भी अब अंगदान के प्रति काफी जागरुक हो गये हैं. जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में पिछले कुछ समय से अंग प्रत्यारोपण की स्पीड बढ़ी है. इससे कई लोगों को नई जिंदगी मिल चुकी है.

Tags: Jaipur news, Organ Donation, Rajasthan latest news, Rajasthan news

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