Rajasthan: उत्कृष्ट विश्वविद्यालय को मिलेगा 'चांसलर अवार्ड', राज्यपाल कलराज मिश्र की पहल

राज्यपाल कलराज मिश्र इससे पहले भी कई नवाचार कर चुके हैं.
राज्यपाल कलराज मिश्र इससे पहले भी कई नवाचार कर चुके हैं.

प्रदेश के उत्कृष्ट विश्वविद्यालय को अब से 'चांसलर मैडल' (Chancellor Madel) और 'प्रशस्ति-पत्र' प्रदान किया जायेगा. राज्यपाल कलराज मिश्र (Governor Kalraj Mishra) ने इस नये अवॉर्ड की पहल की है.

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जयपुर. राज्य में विश्वविद्यालयों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा विकसित (Healthy competition) करने के लिए अब उत्कृष्ट विश्वविद्यालय को 'चांसलर मैडल' (Chancellor Madel) और 'प्रशस्ति-पत्र' प्रदान किया जायेगा. राज्यपाल कलराज मिश्र (Governor Kalraj Mishra) की पहल पर इसे शुरू किया जा रहा है. राजस्थान में इस तरह का यह पहला प्रयास है. इसके लिये विश्वविद्यालय की सभी तरह की गतिविधियों को शामिल कर उसका एसेसमेंट किया जायेगा. तय मानकों पर खरा उतरने वाले विश्वविद्यालय को यह मैडल और प्रमाण-पत्र प्रदान किया जायेगा.

शिक्षा का नया माहौल बनेगा और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा होगी
प्रदेश के राज्य वित्त पोषित विश्वविद्यालयों में से उत्कृष्ट विश्वविद्यालय को चांसलर मैडल और प्रशस्ति-पत्र प्रदान करने की पहल हुई है. राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा है कि इससे विश्वविद्यालयों में शिक्षा का नया माहौल बनेगा और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा होगी. इससे राज्य के युवा वर्ग को लाभ मिलेगा और विश्वविद्यालयों का बेहतर तरीके से विकास होगा. राज्यपाल कलराज मिश्र के निर्देश पर उनके सचिव सुबीर कुमार ने इस संदर्भ में राज्य के सभी राज्य वित्त पोषित विश्वविद्यालयों को पत्र भेजे हैं. राज्यपाल कलराज मिश्र इससे पहले भी विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक माहौल को सुधारने के लिये कई तरह की पहल कर चुके हैं.

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निर्धारित प्रपत्र में 20 अक्टूबर तक आवेदन करना होगा


राज्यपाल ने सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालय को प्रशस्ति-पत्र और चांसलर मैडल देने की घोषणा गत 4 नवंबर को हुई कुलपति समन्वय समिति की बैठक में की थी. इस संबंध में विश्वविद्यालयों को राजभवन से जारी किये गये निर्धारित प्रपत्र में 20 अक्टूबर तक आवेदन करना होगा. उसके बाद राज्यपाल उसका एसेसमेंट करेंगे. प्रपत्र में गवर्नेन्स, वित्तीय स्थिति, चांसलर इनिशिएटिव्स, शिक्षा, शोध, विद्यार्थी विकास, नवाचार और अन्य गतिविधियों की जानकारी मांगी गई है. गतिविधियों के लिए संबंधित विश्वविद्यालयों के कुलपति सेल्फ एसेसमेन्ट कर अंक देंगे. पारदर्शिता के लिए इस प्रपत्र को भरकर विश्वविद्यालय अपनी वेबसाइट पर भी प्रदर्शित करेंगे. इसमें विश्वविद्यालय 30 सितंबर तक की उपलब्धियों को शामिल कर सकेंगे.
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