पाक‍िस्‍तान विस्थापितों को वैक्सीनेशन सेंटर से ब‍िना टीका लगाए भेजा जा रहा है वापस, जानें क्‍यों?


कोरोना से बचाव का एक ही कवच है वैक्सीन, 18 से अधिक आयु वालों को देशभर में वैक्सीन लगाई जा रही है, लेकिन पाकिस्तान से आए विस्थापितों को नहीं

कोरोना से बचाव का एक ही कवच है वैक्सीन, 18 से अधिक आयु वालों को देशभर में वैक्सीन लगाई जा रही है, लेकिन पाकिस्तान से आए विस्थापितों को नहीं

Rajasthan News: पाक विस्थापितों की बस्तियां कोरोना की दहशत से गुजर रही हैं. महामारी से बचाव का टीका इन बस्तियों या ट्रांजिट कैंप में रहने वाले हजारों लोगों को नहीं लग रहा है.

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नई दिल्ली. कोरोना से बचाव का एक ही कवच है वैक्सीन. 18 से अधिक आयु वालों को देशभर में वैक्सीन लगाई जा रही है, लेकिन पाकिस्तान से आए विस्थापितों को नहीं. वजह है इनके पास आधार कार्ड नहीं है. इन विस्थापितों को वैक्सीनेशन सेंटर से लौटाया जा रहा है. विस्थापितों ने अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मांग की है कि बिना आधार कार्ड उनके यात्रा दस्तावेज के आधार पर उन्हें टीका लगाया जाए जिससे वे जान बचा सकें. विस्थापितों का कहना है कि जब साधु संतों और घर विहिन लोगों को बिना पहचान कार्ड से वैक्सीन लगाई जा रही तो फिर उनको क्यों नहीं?

भारत-पाकिस्तान के बीच चलने वाली थार एक्सप्रेस बंद होने से पहले इस ट्रेन से सैकड़ों विस्थापित पाक हिंदू पाकिस्तान में अत्याचार से तंग आकर भारत आ रहे थे. जोधपुर पाकिस्तान विस्थापितों का देश में सबसे बड़ा ठिकाना है. जोधपुर की पाक विस्थापितों की बस्तियां कोरोना की दहशत से गुजर रही हैं. महामारी से बचाव का टीका अब इन बस्तियों या ट्रांजिट कैंप में रहने वाले हजारों लोगों को नहीं लग रहा है. उन्हें वैक्सीनेशन सेंटर से खाली हाथ लौटाया जा रहा है. वजह है आधार कार्ड नहीं होना. आधार कार्ड तब बनता है जब कोई भारत का नागरिक हो. विस्थापितों की बड़ी आबादी नागरिकता का इंतजार कर रही है.

ये परेशानी सिर्फ जोधपुर में नहीं, जयपुर, जैसलमेर समेत राजस्थान और देश के कई इलाकों में है. जोधपुर जयपुर औऱ जैसलमेर में ही 30 हजार से अधिक पाक विस्थापित हैं, जिनके पास आधार कार्ड नहीं है. विस्थापितों के लिए काम कर रहे सीमांत लोक संगठन ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मांग की कि जिस तरह साधु संतों और घर विहीन लोगों के लिए बिना आधार कार्ड वैक्सीनेशन की मंजूरी दी गई है उसी तरह विस्थापितों को दें. संगठन के अध्यक्ष हिंदू सिंह सोढ़ा ने कहा कि पाक विस्थापितों के पास यात्रा दस्तावेज हैं. रहने के लिए लोगों के पास टर्म वीजा और अनुमति है. इन दस्तावेजों से टीका लगाएं.

राजस्थान सरकार ने हालांकि भरोसा दिलाया है कि विस्थापितों की टीकाकरण की समस्या के समाधान का, लेकिन पूरा मसला केंद्र सरकार से भी जुड़ा है. सीएएन बिल पास होने के बाद विस्थापितों को उम्मीद थी कि उन्हें नागरिकता जल्द मिलेगी औऱ पहचान का संकट खत्म होगा, लेकिन कोरोनाकाल में परेशानियां यथावत हैं.

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