पाकिस्‍तान से आई लड़की का सपना पूरा करने के लिए सुषमा स्वराज ने किया था ये काम

सुषमा स्वराज ने मसल के एडमिशन की खातिर पाकिस्तान विस्थापितों के लिए अलग से मेडिकल कॉलेजों में दाखिले का आरक्षण का कोटा तय करवाया.

Bhawani Singh | News18 Rajasthan
Updated: August 7, 2019, 5:24 PM IST
पाकिस्‍तान से आई लड़की का सपना पूरा करने के लिए सुषमा स्वराज ने किया था ये काम
मशाल माहेश्‍वरी के लिए मां थीं सुषमा स्‍वराज...
Bhawani Singh
Bhawani Singh | News18 Rajasthan
Updated: August 7, 2019, 5:24 PM IST
जयपुर की मशाल माहेश्वरी आज बेहद दुखी है. सुषमा स्वराज का निधन मानो उसके लिए किसी पहाड़ टूटने से कम नहीं. मशाल के शब्दों में वे मां जैसी थीं, जिसे आज खो दिया. जबकि उनके पिता डॉ. अशोक माहेश्वरी ने खुद के आंसू रोकते हुए कहा कि जिस वक्त ये डर था कि हिंदुस्तान में उनके बच्चों का भविष्य है या नहीं, तब सुषमा स्वराज उम्मीद बनी और भरोसे का हाथ उसकी बेटी के सिर पर रखा था.

मशाल कहती है कि सुषमा स्वराज ही थीं जिसने डॉक्टर बनने के उसके सपने को पूरा किया, जिसे शायद वे टूटा हुआ मानने लगी थी.

आपको बता दें कि सुषमा स्वराज की बदौलत आज मशाल माहेश्वरी जयपुर के एसएमएस मेडिकल क़ॉलेज में डॉक्टरी की पढ़ाई कर रही है.

ये है असली कहानी

दरअसल, मशाल के पिता डॉ. अशोक माहेश्वरी और मां डॉ. निर्मला माहेश्वरी पाकिस्तान में डॉक्टर थे, लेकिन 2014 में एक काली रात पाकिस्तानी के जुल्मों सितम की रात बनी. पाकिस्तान के कट्टरपंथियों से जान बचाने के लिए डॉक्टर दंपति को आनन-फानन में पाकिस्तान छोड़ना पड़ा था और शरण का आशियाना भारत दिखा. परिवार खाली हाथ तीन बच्चों को लेकर जयपुर पहुंचा.

हालांकि मशाल ने दसवीं तक की पढ़ाई पाकिस्तान में ही की थी और फिर जयपुर में आगे की पढ़ाई की. वे माता-पिता की तरह डॉक्टर बनना चाहती थीं, लेकिन खुद माता-पिता डॉक्टर होते हुए भारत में बतौर डॉक्टर प्रेक्टिस नहीं कर सकते थे, क्‍योंकि पाकिस्तान की डॉक्टर की डिग्री भारत में मान्य नहीं थी. हालांकि मशाल का डॉक्टर बनने का सपना था और 2016 में मसल को मेडिकल एंट्रेस परीक्षा में बैठने की इजाजत नहीं मिली. हालांकि मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए भारत की नागरिकता की शर्त थी.

न्‍यूज़ 18 की पहल बनी...
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तब मशाल की परेशानी को न्यूज़18 नेटवर्क ने दिखाया था और सुषमा स्वराज ने चैनल पर मशाल की कहानी देखकर उसको भरोसा दिलाते हुए ट्वीट किया कि ' मशाल परेशान मत हो मेरी बच्ची, मैं मेडिकल कॉलेज में एडमिशन के तुम्हारे मामले को पर्सनली उठाऊंगी.'

इसके बाद सुषमा स्वराज ने मशाल और उसके परिवार से फोन पर बात की और दिल्ली बुलाया. मशाल की मां निर्मला माहेश्वरी के मुताबिक, जिस वक्त मिलने के लिए बुलाया, उस वक्त वे बीमार थीं और निमोनिया था. रीनल ट्रांसप्लांट होना था. बावजूद इसके उन्‍होंने (सुषमा) एक घंटे परिवार के साथ बिठाकर बात की और यकीन दिलाया.

मसल के लिए कर डाला ये काम
मशाल के एडमिशन के लिए पाकिस्तान विस्थापितों के लिए अलग से मेडिकल कॉलेजों में दाखिले का आरक्षण का कोटा तय करवाया. फिर उसका एडमिशन उसकी पसंद की जयपुर की सवाई मानसिंह मेडिकल क़ॉलेज में करवाया. आज मशाल इस क़ॉलेज में एमबीबीएस के सातवें सेमिस्टर की छात्रा है.

मशाल के बाद सैंकड़ों पाकिस्तानी विस्थापित छात्रों को इस आरक्षण कोटे के चलते मेडिकल क़ॉलेजों में दाखिला मिला, लेकिन मशाल इकलौती या पहली नहीं थी जिसकी मदद सुषमा स्वराज ने की. वह पहली राजनेता थी, जिसने विदेश मंत्रालय को देश और विदेश में आम आदमी की मदद का मंत्रालय बना दिया था.

सुषमा स्वराज ने अपने ट्विटर हैंडल को लोगों की मदद का जरिया बना लिया था. मशाल जैसी सैंकड़ों कहानियां जिनके लिए सुषमा स्वराज सिर्फ नेता नहीं,तारणहर्ता रही.

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First published: August 7, 2019, 5:22 PM IST
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