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जयपुर: पाले ने किया कबाड़ा, सब्जियों की फसल हुई चौपट, किसानों की मेहनत और पैसा हुआ बर्बाद

किसानों के मुताबिक खेतों में बर्फ जमी रहने से मटर की फलियां सफेद हो गई हैं और उनके भीतर पानी भर गया है. अब इन फलियों में मटर का दाना नहीं पनपेगा और फसल बर्बाद हो जाएगी.
किसानों के मुताबिक खेतों में बर्फ जमी रहने से मटर की फलियां सफेद हो गई हैं और उनके भीतर पानी भर गया है. अब इन फलियों में मटर का दाना नहीं पनपेगा और फसल बर्बाद हो जाएगी.

हाल ही में पड़े पाले ने सब्जी उत्पादक किसानों (Farmers) को बर्बाद कर दिया है. पाले से सब्जियों की फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है. जयपुर जिले में कई किसानों की मटर की फसल (Crop) 90 फीसदी तक नष्ट हो गई.

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जयपुर. प्रदेश में पिछले दिनों पड़े पाले से किसानों (Farmers) को भारी नुकसान हुआ है. सब्जियों की फसल उपजाने वाले किसानों पर इसका कहर देखने को मिला है. मटर और टमाटर (Peas and tomatoes) जैसी फसलों को पाले ने चौपट कर दिया है. पाला सब्जियों की फसल (Vegetable crops) को खास तौर पर नुकसान पहुंचाता है. इससे बचाव के जतन करने से नुकसान को कुछ कम किया जा सकता है. दिसम्बर के अंत और जनवरी महीने में पाला पड़ने की घटनाएं खास तौर से होती हैं. लिहाजा किसानों को आने वाले दिनों में पाले से अपनी फसल को बचाने के लिए खास ऐहतियात बरतनी होगी.

कई इलाकों में तो मटर की फसल 90 फीसदी तक चौपट हो गई है. जयपुर जिले के चेतावाला गांव के किसान हरफूल का कहना है कि उसने 6 बीघा खेत में मटर उगाए थे. लेकिन पिछले दिनों पड़े पाले ने उसे बर्बाद कर दिया है. खेतों में जमीं बर्फ के चलते मटर की फसल चौपट हो गई है. अब उसमें 10 फीसदी पैदावार की भी उम्मीद नहीं बची है. किसान का कहना है कि उसने करीब ढाई सौ रुपए किलो के भाव के मटर के बीज खरीदे थे. इसके साथ ही अच्छी पैदावार के लिए पिछले कई दिनों से खेतों में पूरा परिवार मेहनत भी कर रहा था. लेकिन पाले ने पैसों के साथ ही मेहनत पर भी पानी फेर दिया है.

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बर्फ जमी रहने से मटर की फलियां सफेद हो गई हैं


किसानों के मुताबिक खेतों में बर्फ जमी रहने से मटर की फलियां सफेद हो गई हैं और उनके भीतर पानी भर गया है. अब इन फलियों में मटर का दाना नहीं पनपेगा और फसल बर्बाद हो जाएगी. अगर थोड़ी बहुत फसल बचेगी भी तो उसके मण्डियों में अच्छे भाव नहीं मिलेंगे. हरफूल की ही तरह धन्नालाल ने भी 6 बीघा खेत में मटर की फसल की थी. लेकिन पाले से पूरी फसल चौपट हो गई है. धन्नालाल के मुताबिक उसने पाले से फसल को बचाने के लिए जतन भी किए थे लेकिन प्रकृति के प्रकोप के आगे सब फेल हो गए.
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