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पंचायत चुनाव: राज्य निर्वाचन आयोग ने अस्वीकार किया डिप्टी सीएम पायलट का अनुरोध, कहा- संभव नहीं
Jaipur News in Hindi

Prem Meena | News18 Rajasthan
Updated: January 18, 2020, 10:24 AM IST
पंचायत चुनाव: राज्य निर्वाचन आयोग ने अस्वीकार किया डिप्टी सीएम पायलट का अनुरोध, कहा- संभव नहीं
आयोग ने कहा कि डिप्टी सीएम के पत्र से यह प्रतीत होता है कि कुछ तथ्य उनके ध्यान में नहीं लाए गए.

राज्य निर्वाचन आयोग (State election commission) ने डिप्टी सीएम सचिन पायलट (Deputy CM Sachin Pilot) के प्रदेश की सभी पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव समय पर करवाने के अनुरोध (Request) को अस्वीकार (Reject) कर दिया है. आयोग ने कहा है कि पंचायतों के चुनाव (Panchayat elections) तय समय पर कराना संभव नहीं (Not possible) है.

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जयपुर. राज्य निर्वाचन आयोग (State election commission) ने डिप्टी सीएम सचिन पायलट (Deputy CM Sachin Pilot) के प्रदेश की सभी पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव समय पर करवाने के अनुरोध (Request) को अस्वीकार (Reject) कर दिया है. आयोग ने कहा है कि पंचायतों के चुनाव (Panchayat elections) तय समय पर कराना संभव नहीं (Not possible) है. आयोग ने अपने जवाब में चुनाव को लेकर पंचायती राज विभाग से किए गए पत्राचार (Correspondence) और अन्य तर्कों का विस्तार से उल्लेख किया है. डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने हाल ही में आयोग को चिट्ठी लिखकर समय पर चुनाव कराने का अनुरोध किया था. चिट्ठी में पायलट ने कहा था कि सरकार की प्रशासक (Administrator) लगाने की कोई मंशा नहीं है.

अपने स्तर से हरसंभव प्रयास किए
राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायती राज विभाग को लिखी चिट्ठी में स्पष्ट कहा है कि आयोग ने समय पर चुनाव कराने के लिए अपने स्तर से हरसंभव प्रयास किए हैं, लेकिन डिप्टी सीएम के पत्र से यह प्रतीत होता है कि ये तथ्य उनके ध्यान में नहीं लाए गए. आयोग ने अपनी चिट्ठी में यह भी कहा कि विशेष अनुमति याचिका में पारित अंतरिम आदेश के संदर्भ में राज्य के महाधिवक्ता से राय ली गई थी. यह राय उन्होंने 10 जनवरी, 2020 से अपने पत्र के माध्यम से विभाग को उपलब्ध करवा दी थी. यदि इस प्रकरण में महाधिवक्ता द्वारा दी गई राय से सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराया जाता है तो स्थिति अपने आप में स्पष्ट हो जाती है. इसके अतिरिक्त यह भी स्पष्ट नहीं है कि पंचायती राज विभाग महाधिवक्ता द्वारा दी गई राय से सहमत है अथवा नहीं.

लगातार अधिसूचना जारी करते रहने से आई समस्या

आयोग ने कहा कि इस विषय की गंभीरता एवं संवैधानिक दायित्व को समझते हुए समय-समय पर गंभीर प्रयास किए गए हैं. लेकिन विभाग द्वारा पंचायती राज संस्थाओं के परिसीमन में अत्यधिक समय एवं लगातार अधिसूचना जारी करते रहने से उनको कठिनाइयां आती रही. फिर भी इन विषम परिस्थितियों में भी आयोग की ओर से सर्वोत्तम संभव विकल्प एवं न्यायालय के निर्णय को ध्यान में रखते हुए सरपंच और पंचों के चुनाव का कार्यक्रम जारी किया गया, जो जारी है.

आयोग ने ये भी दिए तर्क
आयोग द्वारा 26 फरवरी, 2019 को पहला पत्र पंचायती राज विभाग को लिखा गया था. इसमें यह अपेक्षा की गई कि परिसीमन संबंधी कार्रवाई मई 2019 तक पूर्ण कर ली जाए. जबकि विभाग द्वारा इसके ठीक विपरीत इस कार्य के शुरुआत ही जून 2019 में की गई. अंतिम अधिसूचना 12 दिसंबर, 2019 को जारी की गई. इससे स्पष्ट है कि पंचायती राज विभाग द्वारा इस कार्य को पूरा करने में 6 माह का समय लिया गया, जबकि चुनाव को ध्यान में रखते हुए यह कार्य 3 माह में भी संपादित किया जा सकता था. 

 

पंचायती राज विभाग को कई पत्र लिखे
आयोग ने अपने प्रथम पत्र के स्मरण के लिए पंचायती राज विभाग को 3 सितंबर, 24 सितंबर, 9 नवंबर और 2 दिसंबर 2019 को पत्र लिखे. 9 नवंबर और 2 दिसंबर 2019 में तो विभाग का ध्यान आकर्षित करने के लिए उक्त सवैधानिक एवं विधिक बाध्यता का भी स्पष्ट उल्लेख किया गया था. लेकिन पंचायती राज विभाग के अधिकारी डिप्टी सीएम को समय पर सही जानकारी नहीं दे सके. इसके कारण शेष ग्राम पंचायतों के चुनाव तय समय पर कराना संभव नहीं है.

 

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First published: January 18, 2020, 10:21 AM IST
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