राजस्थान पंचायती राज चुनाव: दोबारा निकाली जायेगी आरक्षण लॉटरी, जानिये क्या है वजह

पहले कानूनी अड़चनों के कारण और फिर कोरोना के चलते प्रदेश के 12 जिलों में ये चुनाव नहीं हो सके थे.

पहले कानूनी अड़चनों के कारण और फिर कोरोना के चलते प्रदेश के 12 जिलों में ये चुनाव नहीं हो सके थे.

Rajasthan Panchayati Raj Elections: प्रदेश के 12 जिलों में होने वाले पंचायत राज संस्थाओं के चुनाव की तैयारियां फिर से शुरू हो गई हैं. राज्य चुनाव आयोग ने इसके लिये राज्य सरकार को कहा कि वह इनके लिये पुन: आरक्षण की लॉटरी निकाले.

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जयपुर. राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रदेश में 12 जिलों में शेष रह रहे जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनाव (Panchayati Raj Elections) के लिए राज्य सरकार को पुनः आरक्षण लॉटरी (Reservation lottery) निकालने के निर्देश दिए हैं. राज्य निर्वाचन आयोग ने ग्रामीण एवं पंचायती राज विभाग से कहा है कि वह आरक्षण की लाटरी पुनः कराए ताकि आगे की चुनावी प्रक्रिया शुरू की जाये.

राज्य निर्वाचन आयोग ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि नगर पालिकाओं के गठन से प्रभावित ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन एवं प्रभावित जिला परिषद, पंचायत समिति और ग्राम पंचायतों के निर्वाचन क्षेत्रों/ वार्डों के पुनगर्ठन तथा आरक्षण के पुनः निर्धारण के कार्य के लिए नया कार्यक्रम शीघ्र जारी कर आयोग को अवगत कराएं. आयोग का कहना है कि इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग प्रभावित पंचायती राज संस्थाओं के नवीन/ संशोधित परिसीमन के अनुसार इनकी मतदाता सूची तैयार करा कर इनके आम चुनाव की प्रक्रिया शुरू करेगा.

इन 12 जिलों में होने है पंचायती राज चुनाव

राज्य के 12 जिलों अलवर, बारां, दौसा, भरतपुर, धौलपुर जयपुर, जोधपुर, करौली, कोटा, सवाई माधोपुर, सिरोही और श्रीगंगानगर जिला परिषद एवं पंचायती समिति सदस्यों के चुनाव होने हैं. इनमें जनवरी 2020 में होने वाले आम चुनाव राज्य सरकार की ओर से पंचायती राज संस्थाओं के परिसीमन के लिये जारी की गई अधिसूचनाओं को कोर्ट में चुनौती देने कारण नहीं हो सके थे. उसके बाद कोविड-19 के कारण चुनाव नहीं हो सके.
इसलिए नहीं हो पाए थे तय समय पर चुनाव

प्रदेश के उपरोक्त 12 जिलों में पूर्व में निर्वाचित पंचायतीराज जनप्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्त हो गया है. ऐसे में इन जिलों में पंचायती राज संस्थाओं का कार्य राज्य सरकार की ओर से नियुक्त प्रशासक ही जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. राज्य में पंचायती चुनाव के इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है कि इतने लंबे समय तक जिला परिषद और पंचायत समिति की कमान चुने हुए प्रतिनिधियों की बजाय प्रशासकों के हाथ में है.

पहले कानूनी अड़चनें और फिर कोरोना ने किया मजबूर



इन जिलों का मामला बार-बार कानूनी अड़चनों में फंसने की वजह से आयोग तय समय पर चुनाव नहीं करवा सका. लेकिन जब कानूनी अड़चनें दूर हो गई तो उसके बाद कोरोना की वजह से आयोग चुनाव कराने से पीछे हट गया था.

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