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पहलू खां मॉब लिंचिंग केस : HC ने दिए सरकार और परिजनों की अपील अटैच करने के आदेश

इस मामले में एडीजे अलवर के फैसले के खिलाफ परिजनों और सरकार ने हाई कोर्ट में अपील की है. फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।
इस मामले में एडीजे अलवर के फैसले के खिलाफ परिजनों और सरकार ने हाई कोर्ट में अपील की है. फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।

अलवर के बहुचर्चित पहलू खां मॉब लिंचिंग (Pehlu Khan Mob Lynching Case) मामले में शुक्रवार को राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) की जयपुर पीठ में सुनवाई हुई. जस्टिस सबीना (Justice Sabina) की खंडपीठ ने परिजनों की अपील पर सुनवाई करते हुए आदेश (Order) दिया कि इसके साथ सरकार की ओर से पेश अपील को भी जोड़ (Attach) दिया जाए.

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जयपुर. अलवर के बहुचर्चित पहलू खां मॉब लिंचिंग (Pehlu Khan Mob Lynching Case) मामले में शुक्रवार को राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) की जयपुर पीठ में सुनवाई हुई. जस्टिस सबीना (Justice Sabina) की खंडपीठ ने परिजनों की अपील पर सुनवाई करते हुए आदेश (Order) दिया कि इसके साथ सरकार की ओर से पेश अपील को भी जोड़ (Attach) दिया जाए ताकि कोर्ट दोनों अपीलों पर एक साथ सुनवाई (Hearing) कर सके.

सरकार की अपील कोर्ट में लिस्ट नहीं हो सकी
इस मामले में एडीजे अलवर के फैसले के खिलाफ परिजनों और सरकार ने हाई कोर्ट में अपील की है. लेकिन आज सरकार की अपील कोर्ट में लिस्ट नहीं हो सकी. इसके कारण अदालत ने दोनों अपीलों को टैग करने के आदेश दिए. इसी वर्ष 14 अगस्त को अलवर की एडीजे-1 अदालत ने मामले से जुड़े सभी 6 आरोपियों को बरी कर दिया था, उसके बाद यह अपील पेश की गई हैं.

परिजनों के वकील की है ये दलील
परिजनों की अपील पर पैरवी करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता नासिर अली नकवी ने बताया कि हमने अपील के जरिए कोर्ट से प्रार्थना की है कि निचली अदालत के फैसले को रद्द किया जाए. वहीं जब तक कोर्ट अपील को तय नहीं कर देती है तब तक आरोपियों को गिरफ्तारी वारंट से तलब करके जेल में रखा जाए.



1 अप्रैल, 2017 को हुई थी घटना
उल्लेखनीय है कि 1 अप्रैल, 2017 को पहलू खां और उसके बच्चों के साथ गाय को ले जाते समय बहरोड़ थाना इलाके में कथित तौर पर मारपीट हुई थी. इसमें गंभीर रूप से घायल होने के कारण पहलू खां की मौत हो गई थी. इस पूरे घटनाक्रम के बाद पहलू और उसके परिजनों के खिलाफ भी पुलिस ने गो-तस्करी का मामला दर्ज किया था. उसे हाल ही में 30 अक्टूबर को हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया है. यह प्रकरण बाद में राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में रहा था.

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