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नवगठित हेरिटेज नगर निगम का लोगों को नहीं मिल रहा फायदा, वजह कर देगी आपको हैरान

जल्द व्यवस्थाएं पटरी पर आ जाएंगी: मेयर
जल्द व्यवस्थाएं पटरी पर आ जाएंगी: मेयर

जयपुर (Jaipur) में भले ही अब एक की बजाय दो नगर निगम बनने के साथ मेयर से लेकर पार्षद तक काम संभाल चुके हों, लेकिन हालत ये है कि शहर के हेरिटेज नगर निगम (Heritage Municipal Corporation) के पास अभी तक ना तो खुद के पूरे कर्मचारी हैं और ना ही इलाके की पूरी फाइलें हैं.

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जयपुर. राजस्‍थान की राजधानी जयपुर (Jaipur) में अब एक नहीं बल्कि दो-दो शहरी सरकार हैं, क्योंकि एक नगर निगम से बढ़कर अब दो नगर निगम बन चुके हैं. वार्ड भी 91 से बढ़कर 250 हो चुके हैं. हकीकत ये है कि नवगठित हेरिटेज नगर निगम (Heritage Municipal Corporation) के पास खुद के भवन के अलावा फिलहाल ज्यादा कुछ संसाधन नहीं हैं. अधिकारी और कर्मचारी हेरिटेज नगर निगम को अलॉट हो चुके है, लेकिन अधिकांश ने ज्वाइन तक नहीं किया है. विभिन्न श्रेणी के 405 कार्मिकों की नियुक्ति हेरिटेज नगर निगम मुख्यालय और जोन में की गई है. हालांकि काफी लोगों ने अब तक ज्वाइन नहीं किया. ऐसे में उसका सीधा असर जनता से जुड़े कार्यों पर पड़ रहा है. यही नहीं, लालकोठी स्थित नगर निगम मुख्यालय से हेरिटेज निगम के हिस्से की फाइल्स तक ट्रान्सफर नहीं हुई है. ऐसे में बिना रिकॉर्ड कई काम अटके हुए हैं जिसे अब खुद हेरिटेज निगम मेयर मुनेश गुर्जर (Munesh Gurjar) भी स्वीकार रही हैं. हालांकि उन्‍होंने जल्द व्यवस्थाएं पटरी पर आने का दावा भी किया है.

दरअसल मेयर ने अभी भले ही 17 दिन पहले पद संभाला हो, लेकिन पिछले कई महीनों से आयुक्त का पद संभाल रहे लोकबन्धु के पास भी कोई ख़ास जवाब नहीं है. वे अब इस सवाल पर कह रहे है कि ज्वाइन ना करने वाले कर्मचारी और अधिकारियो की डिटेल मंगवाई गई है. जबकि कुछ को नोटिस भी जारी किये गए हैं.





इस वजह से हो रही है मुश्किल
दरअसल हेरिटेज नगर निगम प्रशासन के पास अभी तक ये भी जानकारी नहीं है कि कुल कितने कार्मिकों ने पद नहीं संभाला है. जब न्यूज़ 18 राजस्थान ने इस मामले को उठाया तो उपायुक्त कार्मिक के मार्फत विभिन्न शाखाओ को ये रिकॉर्ड भेजने के लिए ताकीद किया गया है. वही़, निगम से जुड़े जानकार बताते हैं कि कर्मचारियों के बंटवारे में जिन कर्मचारियों को हेरिटेज निगम में लगाया गया है उनमें से कई हेरिटेज की बजाय ग्रेटर नगर निगम में रहना चाहते हैं और आखिरी दौर तक वहीं बने रहने की जोर आजमाइश में लगे हैं.
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