Rajastan: पायलट खेमे की बगावत के समय हुई थी फोन टैपिंग, गहलोत सरकार ने पहली बार स्वीकारा

बीजेपी विधायक के सवाल पूछने के वक्त (अगस्त) को देखते हुए इस जवाब को बागी विधायकों और केन्द्रीय मंत्रियों के फोन टेपिंग से जुड़ा माना जा रहा है.

बीजेपी विधायक के सवाल पूछने के वक्त (अगस्त) को देखते हुए इस जवाब को बागी विधायकों और केन्द्रीय मंत्रियों के फोन टेपिंग से जुड़ा माना जा रहा है.

Phone Tapping Case: राजस्‍थान में गत वर्ष हुए सियासी संग्राम के दौरान फोन टैपिंग के मसले को लेकर मचे बवाल के बाद अब गहलोत सरकार ने भी इसे स्वीकार कर लिया है.

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जयपुर. गहलोत सरकार (Gehlot Government) ने पहली बार स्वीकार किया है कि राज्य में फोन टैपिंग (Phone tapping) की घटनाएं हुई हैं. सरकार ने पिछले साल सचिन पायलट खेमे (Pilot group) की बगावत के समय फोन टेप करने की बात स्वीकार कर ली है. हालांकि, सरकार ने अपने जवाब में विधायकों या केन्द्रीय मंत्रियों के फोन टेप करने जैसी कोई बात नहीं कही है. उस समय राज्य के गृह विभाग ने प्रदेश में फोन टेप करने की संभावनाओं से पूरी तरह से इनकार किया था.

विधानसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में राज्य सरकार ने फोन टेप करने की बात स्वीकार की है. सरकार ने जवाब में कहा है कि सक्षम स्तर से मंजूरी लेकर फोन टेप किए जाते हैं. नवंबर 2020 तक फोन टेप के सभी मामलों की मुख्य सचिव स्तर पर समीक्षा भी की जा चुकी है. बीजेपी विधायक कालीचरण सराफ की ओर से गत वर्ष अगस्त में पूछे गए सवाल का गृह विभाग ने अब जवाब दिया है. सवाल का जवाब राजस्थान विधानसभा की वेबसाइट पर तो डाल दिया गया, लेकिन विधायक के पास लिखित रूप में नहीं पहुंचा है. बीजेपी विधायक के सवाल पूछने के वक्त (अगस्त) को देखते हुए इस जवाब को बागी विधायकों और केन्द्रीय मंत्रियों के फोन टेपिंग से जुड़ा माना जा रहा है.

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यह था बीजेपी विधायक का सवाल
प्रश्न. क्या यह सही है कि विगत दिवस में फोन टेप किए जाने के प्रकरण सामने आए हैं? यदि हां तो किस कानून के अंतर्गत और किसके आदेश पर? पूरा ब्यौरा सदन की मेज पर रखें.

इसके जवाब में गृह विभाग ने कहा है कि लोगों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को खतरा होने पर सक्षम अधिकारी की अनुमति लेकर फोन सर्विलांस पर टेप किए जाते हैं. भारतीय तार अधिनियम-1885 की धारा 5-2 और आईटी एक्ट की धारा-69 में दिए प्रावधानों के अनुसार फोन टेप किए जाते हैं. राजस्थान पुलिस ने इन प्रावधानों के तहत ही सक्षम अधिकारी से मंजूरी लेकर फोन टेप किए हैं. सर्विलांस पर लिए गए फोनों की मुख्य सचिव के स्तर पर बनी समिति समीक्षा करती है. मुख्य सचिव समीक्षा कर चुके हैं.

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विधानसभा की वेबसाइट पर डाला गया जवाब.




पायलट खेमे ने की थी बगावत

सचिन पायलट खेमे के 19 विधायकों ने पिछले साल गहलोत सरकार के खिलाफ बगावत की थी. ये विधायक हरियाणा के मानेसर के एक होटल में अलग से बाड़ेबंदी में चले गए थे. उसके बाद 15 जुलाई 2020 को गहलोत गुट की तरफ से कुछ ऑडियो टेप जारी किए गए थे. उस समय जारी किये गये इन ऑडियो टेप में अशोक गहलोत खेमे की तरफ से दावा किया गया था कि यह केन्द्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह, कांग्रेस विधायक भंवरलाल शर्मा और तत्कालीन मंत्री विश्वेंद्र सिंह की बातचीत है. इसमें सरकार गिराने और पैसों के लेनदेन की बातें शामिल थीं. सीएम अशोक गहलोत ने कई बार कहा कि सरकार गिराने के षड्यंत्र करने में हुए करोड़ों के लनेदेन के सबूत हैं. राजस्थान में यह सियासी संकट काफी लंबा चला था और यह यह राष्ट्रीय स्तर पर छाया रहा था.
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