Rajasthan crisis: फोन टेपिंग कांड गहलोत सरकार के लिए बना गले की हड्डी, पढ़ें इनसाइड स्टोरी
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Rajasthan crisis: फोन टेपिंग कांड गहलोत सरकार के लिए बना गले की हड्डी, पढ़ें इनसाइड स्टोरी
गहलोत सरकार को लगा कि अगर हाईकोर्ट ने ये केस एनआईए को सौंप दिया तो फिर फोन टेपिंग के पूरे केस की जांच होगी.

खबर है कि टेपिंग की इस लिस्ट से राजस्थान पुलिस (Rajasthan Police) इतनी परेशान हो गई कि उसे सफाई देनी पड़ी. उसे कहना पड़ा कि किसी विधायक का फोन टेप नहीं किया गया है

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  • Last Updated: August 8, 2020, 12:33 PM IST
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जयपुर. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) के खेमे के विधायकों की फोन टेपिंग (Phone Tapping) की एक लिस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है. इस लिस्ट में शामिल विधायक जैसलमेर में गहलोत खेमे के हैं. लेकिन ये वही विधायक हैं जिन पर गहलोत समर्थकों को शक है कि ये पाला बदल कर सचिन पायलट (Sachin Pilot) खेमे में जा सकते हैं. टेपिंग की इस लिस्ट में तीन विधायक बलजीत यादव, जाहिदा और रोहित बोहरा का नाम है. केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र शेखावत ने निशााना साधते हुए ट्वीट किया है कि जैसलमेर के होटल मे बंद विधायकों की फोन टेपिंग और इंटरकोम टेंपिंग की गई. जब इतना से मन नहीं भरा तो होटल के मोबाइल में जैमर तक फिट कर दिया गया. आखिर गहलोतजी को इतना भय और अविश्वास क्यों है?

खबर है कि टेपिंग की इस लिस्ट से राजस्थान पुलिस इतनी परेशान हो गई कि उसे सफाई देनी पड़ी. उसे कहना पड़ा कि किसी विधायक का फोन टेप नहीं किया गया है और न राजस्थान पुलिस अवैध रिकार्डिंग करती है. लेकिन गहलोत सरकार के संकट और सचिन पायलट के बगावत की असली वजह ही फोन टेपिंग कांड और इस केस में राजद्रोह की धारा है. इस केस में नोटिस से ही नाराज होकर पायलट ने बगावत का झंडा उठाया था.

एसीबी भी फिलहाल जांच करने से आगे- पीछे हो रही है
हैरानी की बात ये है कि कि जिस राजद्रोह की धारा में गहलोत, पायलट समेत बागी विधायकों और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिहं शेखावत का शिकार करने चले थे. अब यही राजद्रोह की धारा खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के लिए गले की हड्डी बन गई है. यही वजह है कि उन्हें न सिर्फ राजद्रोह का केस वापस लेना पड़ा, बल्कि बागी विधायकों और शेखावत का वाइस सैंपल लेने के लिए छापेमारी कर रही एसओजी को जांच से भी हटाना पड़ा. अब हालत ये हो गई कि टेपिंग और ओडियो रिकोर्डिंग के इस केस की जांच से न सिर्फ एसओजी को पीछे किया, बल्कि एसीबी भी फिलहाल जांच करने से आगे- पीछे हो रही है.
क्या है टेपिंग काडं और राजद्रोह का केस?


राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप यानी एसओजी ने दो तस्करों की फोन टेपिंग में विधायकों की खऱीद फरोख्त का दावा करते हुए पहला केस दर्ज किया था. इसमें  एसओजी ने राजद्रोह की धारा 124 व साजिश की धारा 120 बी में केस दर्ज कर सचिन पायलट समेत 18 विधायकों को नोटिस दिया. राजद्रोह के इस केस से पायलट इतने नाराज हुए कि 18 कांग्रेस विधायकों और तीन निर्दलीयो के साथ बगावत कर दी. दूसरा केस भी टेपिंग के आधार पर दर्ज किया. हालांकि, दावा किया कि ये रिकार्डिंग एसओजी को सोशल मीडिया से मिली है, लेकिन ये रिकार्डिंग जारी की थी खुद मुख्यमंत्री के ओएसडी लोकेश शर्मा ने. जिसमें केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, कांग्रेस विधायक भंवरलाल शर्मा और दलाल संजय जैन के बीच विधायकों की खरीद फरोख्त की बातचीत का दावा किया गया था. तीनों के खिलाफ एसओजी ने राजद्रोह की धारा में केस दर्ज किया  था. एसओजी ने इन दो केस में पूछताछ और वाइस सैंपल लेने के नाम पर पायलट केंप के विधायकों की तलाश में छापेमारी की और शेखावत को भी पूछताछ का नोटिस दिया था.

क्यों वापस लिया राजद्रोह का केस? 
सचिन पायलट खेमे के विधायक भंवरलाल शर्मा ने राजस्थान हाईकोर्ट में एसओजी के राजद्रोह के केस के खिलाफ याचिका दायर की. याचिका में मांग की गई कि केस में राजद्रोह का आरोप है. इसलिए जांच एसओजी से लेकर एनआईए को सौंपी जाए. हाईकोर्ट में इस याचिका पर सुनवाई चल ही रही थी कि अचानक एसओजी ने जयपुर के मेट्रोपोलिटिन कोर्ट 2 में आरोपी संजय जैन की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान राजद्रोह की धारा तीनों ही केस में हटाने और केस एसीबी को भिजवाने की सूचना दे दी.

यू-टर्न की असली वजह है गहलोत सरकार का एनआईए की जांच का डर
ऐसे में गहलोत सरकार को लगा कि अगर हाईकोर्ट ने ये केस एनआईए को सौंप दिया तो फिर फोन टेपिंग के पूरे केस की जांच होगी. टेपिगं किसके आदेश से हुई. सरकार के पास दूसरे केस में आई फोन रिकार्डिंग कहां से मिली. किसने रिकार्ड करवाए. यानी पूरे टेपिंग कांड से पर्दा उठना तय था. साथ ही अशोक गहलोत को डर ये था कि कहीं एनआईए ने जांच शुरु की तो टेपिंग कांड सरकार की स्थिरता पर संकट खड़ा न कर दे, ऐसे में जिसे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नजदीकी सरकार बचाने का हथियार समझ रहे थे, अब सरकार पर ही संकट नजर आने लगा.
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