राजस्थान फोन टैपिंग केस: केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने दर्ज कराई FIR, क्राइम ब्रांच को जांच का जिम्मा

फोन टैपिंग मामले में गजेंद्र सिंह शेखावत की शिकायत पर दर्ज केस.

फोन टैपिंग मामले में गजेंद्र सिंह शेखावत की शिकायत पर दर्ज केस.

Rajasthan phone tapping case: राजस्थान में आठ महीने पुराना फोन टैपिंग विवाद राजस्थान की गहलोत सरकार के गले की फांस बनता जा रहा है. केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत (Gajendra Singh Shekhawat) की शिकायत पर दर्ज फोन टैपिंग केस के खुलासे के बाद गहलोत सरकार हैरान परेशान नजर आई.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 26, 2021, 9:12 PM IST
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जयपुर. राजस्थान (Rajasthan) में आठ महीने पहले के फोन टैपिंग  मामले (Rajasthan phone tapping case) में तब नया मोड़ आ गया जब केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत (Gajendra Singh Shekhawat) की शिकायत पर दर्ज केस क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया. राजस्थान की गहलोत सरकार इतनी बैचेन हो गई कि एक के बाद एक मंत्री सफाई देने और जवाबी हमला करने मैदान में उतरे. केस दर्ज कराने को सरकार गिराने की साजिश तक करार दे दिया. गजेंद्र सिंह शेखावत से एक बार फिर वाइस सैंपल देने की मांग कर डाली. बीजेपी (BJP) ने पलटवार किया और पूछा कि अगर शेखावत के वाइस सैंपल लेने थे तो जांच में एफआर क्यों दी थी. अपनी ही पार्टी के उन विधायकों के पहले वाइस सैंपल ले जिनके नाम एफआईआर में है.

राजस्थान में आठ महीने पुराना फोन टेपिंग विवाद राजस्थान की गहलोत सरकार के गले की फांस बनता जा रहा है. केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की शिकायत पर दर्ज फोन टैपिंग केस के खुलासे के बाद गहलोत सरकार हैरान परेशान नजर आई. सवाल उठाया कि आठ महीने बाद केस क्यों दर्ज कराया. जयपुर के बजाय दिल्ली में क्यों दर्ज कराया. ये भी आरोप जड़़ा कि केस दर्ज कराना सरकार गिराने की साजिश है. शेखावत के खिलाफ इस मामले में दर्ज केस में डोटासरा ने शेखावत से मांग की कि वे एसीबी के सामने पेश होकर अपने वाइस सैंपल दें.

बीजेपी नेता ने किया ट्वीट

बीजेपी नेता राजेंद्र राठौड़ ने ट्वीट कर गहलोत सरकार से पूछा कि पहले सरकार ये बताए कि सरकार के मुख्य सचेतक की ओर से फोन टैपिंग मामले में शेखावत और कांग्रेस के दो विधायकों के खिलाफ दर्ज कराए केस में एसीबी ने एफआर क्यों दी. राठौड़ ने मुख्य सचेतक महेश जोशी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. राठौड़ ने पूछा कि अगर शेखावत का वाइस सैंपल लेना चाहते हैं तो पहले अपने यानी इस केस में जिन कांग्रेस विधायकों के नाम है उनके सैंपल ले ले. बीजेपी के हमले के बाद गहलोत सरकार बचाव की मुद्रा में नजर आ रही है. मुख्य सचेतक महेश जोशी ने सफाई दी कि उनकी सरकार डरती नहीं है सब कुछ नियमानुसार हुआ.
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पढ़ें क्या है पूरा मामला

दरअसल, पिछले साल जुलाई में जब सचिन पायलट ने अपने गुट के 19 विधायकों के साथ बगावत की थी. तब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के ओएसडी लोकेश शर्मा ने एक ओडियो टेप मीडिया को जारी किया. इस ओडियो टेप में जिक्र किया कि गजेंद्र सिंह नाम का शख्स विधायकों की खरीद फरोख्त के लिए कांग्रेस के एक विधायक और एक दलाल से बात कर रहा है. दावा किया ये वायरल ओडियो टेप है. मुख्य सचेतक महेश जोशी ने इस वायरल ओडियो टेप को एसीबी को सौंपकर शेखावत समेत कांग्रेस के दो विधायकों के खिलाफ केस दर्ज करा दिया था. सरकार गिराने के लिए शेखावत पर विधयाकों की खरीद फरोख्त का आरोप लगाया था. इस मामले में नया मोड़ तब आया जब केस दर्ज कराने के दो महीने बाद ही एसीबी ने इस मामले में एफआरआर लगा दी थी. कुछ दिन पहले राजस्थान विधानसभा में सरकार के एक सवाल के जबाब में फोन टैपिंग करना स्वीकार करने के बाद बीजेपी ने घेरा और सीबीआई जांच की मांग की. हालांकि सरकार ने दावा किया कि किसी जनप्रतिनिधि का फोन टेप नहीं किया, अपराधियों का किय़ा था. मुख्य़मंत्री को सफाई देनी पड़ी कि अगर किसी जनप्रतनिधि यानी का फोन टेप हुआ तो वो इस्तीफा दे देंगे.
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