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जयपुर में बन रहा राजस्थान का सबसे ऊंचा कृष्ण-बलराम मंदिर, 200 फीट होगी ऊंचाई

मंदिर का प्रस्तावित मॉडल. (File Photo)
मंदिर का प्रस्तावित मॉडल. (File Photo)

Jaipur Temple: वृंदावन की तर्ज पर 70 करोड़ की लागत से 4 एकड़ परिक्षेत्र में बन रहे अनूठे कृष्ण-बलराम मंदिर (Krishna Balarama Mandir) में देखने को मिलेगा आधुनिक और राजस्थानी पारंपरिक वास्तु व शिल्पकला का अनोखा मिश्रण.

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जयपुर. महान कृष्ण भक्त मीराबाई के राजस्थान में कृष्ण भक्ति की एक और इबारत लिखी जा रही है. यूपी के वृंदावन की तर्ज पर राजधानी जयपुर में भगवान कृष्ण और बलराम का एक अनोखा मंदिर (Krishna Balarama Temple) बन रहा है. करीब 70 करोड़ की लागत से निर्माणाधीन 200 फीट ऊंचा यह मंदिर राज्य का सबसे ऊंचा मंदिर होगा. इस मंदिर की विशेषता यह है कि इसके शिल्प और वास्तु में न केवल राजस्थानी और आधुनिक शिल्पकला का अनूठा मेल होगा, बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक ज्ञान का केंद्र भी होगा.

जयपुर के जगतपुरा इलाके में बन रहे इस मंदिर का लगभग 70 फीसदी काम पूरा हो चुका है और इसे 2024 तक पूरा करने और भक्तों के लिए खोल दिए जाने का लक्ष्य रखा गया है. हरे कृष्णा मूवमेंट जयपुर के अमितासना दास ने बताया कि इस अनोखे मंदिर में 108 कलात्मक मयूरों से सुसज्जित राधा-कृष्ण-बलराम और गौर-निताई की प्रतिमा रहेंगी. इसके समीप ही सीता-राम-लक्ष्मण और हनुमानजी का विग्रह रहेगा. राजस्थानी और आधुनिक शिल्पकला के अनूठे मेल वाला यह मंदिर सांस्कृतिक और आध्यात्मिक ज्ञान का केंद्र भी होगा.

एनीमेशन से मिलेगा वेद पुराण का ज्ञान
अमितासना दास ने बताया कि मंदिर निर्माण में राजस्थान के कई पारंपरिक मंदिरों और ऐतिहासिक स्मारकों में पाए गए वास्तुकला तत्वों का उपयोग किया जा रहा है. खास बात यह होगी कि मंदिर में आने वाले भक्तों को एनीमेशन से वेद पुराण का ज्ञान परोसा जाएगा. साथ ही लाइट एंड वाटर शो, एनिमेट्रॉनिक्स आदि आधुनिक तकनीकों से प्रस्तुत किया जाएगा.
एक पत्र से हुई शुरुआत और अब बन रहा मंदिर


हरे कृष्णा मूवमेंट से जुड़े पदाधिकारी सिद्धस्वरूप दास ने बताया कि श्रील प्रभुपाद ने जयपुर में एक बड़ा कृष्ण बलराम मंदिर और सांस्कृतिक केंद्र की स्थापना करना चाहते थे. श्रील प्रभुपाद ने 13 जुलाई 1975 को जयपुर के जाने-माने प्रमुख व्यक्ति महावीर प्रसाद जयपुरिया को पत्र लिखकर जयपुर में वृंदावन जैसे एक भव्य मंदिर का निर्माण करने का अग्रह किया था. पत्र में कहा गया कि जयपुर वैष्णवों द्वारा पवित्र तीर्थस्थल के रूप माना जाता है. विशेष रूप से गौड़ीय वैष्णव गोविंदजी, राधा दामोदरजी, आदि वृंदावन के प्रमुख विग्रहों का दर्शन के लिए वहां जाते हैं. इसलिए वे जयपुर में भी एक कृष्ण बलराम मंदिर बनाना चाहते हैं.
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