Rajasthan Crisis : पुलिस ने कहा, किसी भी सांसद या विधायक का फोन टैप नहीं हो रहा

फोन टैपिंग के आरोपों को अफवाह बताया राजस्थान पुलिस ने.

राजस्थान पुलिस ने यह स्पष्ट किया है कि उसकी किसी भी यूनिट ने किसी भी विधायक या सांसद की फोन टैपिंग न तो पहले की थी और न ही वर्तमान में कर रही है. इंटरकॉम से हुई बातचीत को रिकॉर्ड करने का आरोप भी मिथ्या व काल्पनिक है.

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    जयपुर. राजस्थान (Rajasthan) के सियासी संकट (Political Crisis) के बीच एक बार फिर यह अफवाह फैलाई गई कि जैसलमेर (Jaisalmer) के सूर्यगढ़ में रुके सांसद और विधायकों के फोन टैप (Phone Tap) कराए जा रहे हैं. इस बारे में राजस्थान पुलिस (Rajasthan Police) ने यह स्पष्ट किया है कि राजस्थान पुलिस की किसी भी यूनिट ने किसी भी विधायक या सांसद की फोन टैपिंग न तो पहले की थी और न ही वर्तमान में कर रही है. पुलिस ने यह भी कहा कि इंटरकॉम से हुई बातचीत को रिकॉर्ड करने का आरोप भी मिथ्या व काल्पनिक है. राजस्थान पुलिस हमेशा आपराधिक कृत्य को रोकने का काम करती है और अवैधानिक टैपिंग एक आपराधिक कृत्य है.

    उल्लेखनीय है कि सोशल मीडिया पर सर्वथा आधारहीन, मिथ्या व भ्रम फैलाने की दृष्टि से एक तथाकथित सूचना प्रसारित की जा रही है कि जैसलमेर के सूर्यगढ़ पैलेस में ठहरे आधा दर्जन विधायकों के फोन अवैधानिक तरीके से टैप किए जा रहे हैं. इस मिथ्या सूचना को बल देने और भ्रम फैलाने के लिए एक टाइपशुदा सूची भी संलग्न कर प्रसारित की जा रही है.

    राजस्थान पुलिस ने आमजन से कतिपय शरारती तत्त्वों द्वारा दुर्भावनावश और निहित स्वार्थवश सोशल मीडिया के जरिए फैलाई जा रही अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की है. पुलिस द्वारा यह भी स्पष्ट किया गया है कि मिथ्या सूचनाओं का प्रसारण अवैधानिक है, अतः आमजन को मिथ्या सूचनाओं के प्रसारण से बचने की सलाह दी गई है.

    गौरतलब है कि इससे पहले भी फोन टैपिंग किए जाने का मामला गंभीर रूप से उछला था. तब केंद्र सरकार गंभीर हो गई थी. केंद्रीय गृह मंत्रालय (Home Ministry) ने राजस्थान सरकार (Rajasthan Government) के मुख्‍य सचिव से फोन टैपिंग मामले पर रिपोर्ट मांगी गई थी. गृह मंत्रालय ने मुख्‍य सचिव से पूछा था कि किस मकसद से और किन-किन लोगों के फोन टैप किए गए? राजस्थान में सरकार को गिराने एवं पार्टी तोड़ने का प्रयास करने के कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इस घटनाक्रम को झूठ और फरेब की कथा करार दिया था. बीजेपी ने पलटवार करते हुए कहा था कि सारा षड्यंत्र उन्हीं के घर में रचा जा रहा था और संवैधानिक प्रावधानों को ताक पर रखकर फोन टैंपिंग किए जाने सहित विभिन्न प्रकरण की सीबीआई से जांच कराई जानी चाहिए.

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