Rajasthan: सियासी संकट से सचिवालय में पसरा सन्नाटा, फाइलों का मूवमेंट रूका, दुविधा में ब्यूरोक्रेसी
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Rajasthan: सियासी संकट से सचिवालय में पसरा सन्नाटा, फाइलों का मूवमेंट रूका, दुविधा में ब्यूरोक्रेसी
कोरोना वायरस के प्रभावी नियंत्रण के लिए उचित दिशा निर्देश भी जारी नहीं हो पा रहे हैं. इससे प्रभावी मॉनिटरिंग पर असर पड़ रहा है.

राजस्थान में सरकार फिलहाल बच गयी है. लेकिन ब्यूरोक्रेट्स भारी दुविधा में आ गये हैं कि किसकी सुनें और किसकी नहीं. उन्हें डर है कि आज ये सत्ता में हैं कल वो आ गये तो क्या होगा ?

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जयपुर. राजस्थान में सरकार फिलहाल बच गयी है. लेकिन ब्यूरोक्रेट्स (Bureaucrates) भारी दुविधा में आ गये हैं कि किसकी सुनें और किसकी नहीं. उन्हें डर है कि आज ये सत्ता में हैं कल वो आ गये तो क्या होगा ? इनकी ना सुनें तो मुश्किल उनकी ना सुने तो मुश्किल. राज्य में सत्ता बदलने के साथ ही ब्यूरोक्रेसी को बदलने की पुरानी रवायत रही है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) ने शपथ ग्रहण करते ही राज्य की संपूर्ण ब्यूरोक्रेसी का चेहरा बदल दिया था.

सचिवालय में पसरा सन्नाटा
प्रदेश में जब-जब भी सियासी संकट आया है या विधानसभा उपचुनाव हुए हैं. उसमें सत्तारूढ़ दल को आशा के अनुरुप सफलता नहीं मिलने पर ब्यूरोक्रेसी को कटघरे में खड़ा होना पड़ा है. वर्तमान हालात में भी आलम यह है कि सियासी संकट के बीच शासन सचिवालय में सन्नाटा पसरा हुआ है. ब्यूरोक्रेट्स मीटिंग नहीं ले रहे हैं और ना ही फाइलों का मूवमेंट हो रहा है. सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए होने वाली अधिकतर मीटिंग्स या तो रद्द कर दी गई है या फिर आगे के लिए खिसका दी है. हालांकि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा अपने समर्थक विधायकों की सूची राज्यपाल को सौंपने के बाद तस्वीर लगभग साफ हो गई है. इसके बावजूद भी ब्यूरोक्रेट्स दुविधा की स्थिति में है.

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मंत्रियों के आदेशों और निर्देशों का इंतजार


प्रदेश के लिए नीति नियम बनाने वाले शासन सचिवालय में फाइलों की गति पर विराम लग गया है. अब ब्यूरोक्रेट्स को भी फाइलों के मूवमेंट की जानकारी नहीं है. ऊपर से दिशा-निर्देश नहीं मिलने के चलते ब्यूरोक्रेट्स दुविधा की स्थिति में है. मुख्य सचिव राजीव स्वरूप दिनभर अपने चेम्बर में मौजूद रहते हैं. इसके बावजूद मीटिंग्स नहीं ले पा रहे हैं. ब्यूरोक्रेट्स की दुविधा की यह स्थिति राज्य में चल रहे सियासी संकट के चलते हुई है. विभागों के सचिवों को मंत्रियों के आदेशों और निर्देशों का इंतजार है.

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कोरोना की प्रभावी मॉनिटरिंग पर असर
प्रदेश में कोरोना वायरस तेजी से फैल रहा है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कोरोना को लेकर अफसरों के साथ प्रतिदिन संवाद मीटिंग कर फीडबैक लेते रहे हैं. लेकिन सियासी संकट के चलते कई दिनों से मीटिंग नहीं हो पा रही है. सरकार को उचित फीडबैक नहीं मिल रहा है. कोरोना वायरस के प्रभावी नियंत्रण के लिए उचित दिशा निर्देश भी जारी नहीं हो पा रहे हैं. इससे प्रभावी मॉनिटरिंग पर असर पड़ रहा है. चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा अधिकारियों के साथ मीटिंग नहीं कर पा रहे हैं.
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