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Rajasthan Political Crisis: नियुक्तियों को लेकर कांग्रेस पहली बार उठाने जा रही ऐसा बड़ा कदम, जानें पूरा मामला

सियासी हलकों में इसके और भी कई तरह के मायने निकाले जा रहे हैं.

सियासी हलकों में इसके और भी कई तरह के मायने निकाले जा रहे हैं.

Rajasthan Congress Crisis: राजस्थान कांग्रेस के इतिहास में यह पहली बार होगा जब प्रदेश प्रभारी स्तर के नेता ब्लॉक स्तर तक की नियुक्तियों को लेकर विधायकों से वन-टू-वन चर्चा करेंगे. अब तक इनके लिये पैनल दिल्ली भेजे जाते रहे हैं और आलाकमान की मंजूरी के बाद उन पर मुहर लगती रही है.

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जयपुर. राजस्थान कांग्रेस (Rajasthan Congress) में इन दिनों संगठनात्मक नियुक्तियों (Organizational Appointments) की कवायद तेज हो रही है. जल्द ही जिला और ब्लॉक स्तर की नियुक्तियों के कयास लगाए जा रहे हैं. हालांकि संगठन की इन नियुक्तियों को लेकर भी खेमेबाजी और विवाद बड़े स्तर पर है. अपने लोगों को संगठन में काबिज करने के लिए कई बड़े नेता बड़े स्तर पर लॉबिंग कर रहे हैं. संगठन की इन नियुक्तियों को लेकर जिला और ब्लॉक स्तर के नेताओं में एक राय नहीं है जो पार्टी के लिए सिरदर्द बनी हुई है. अब इन विवादों को सुलझाने के लिए प्रदेश प्रभारी अजय माकन 28 और 29 जुलाई को फिर से राजस्थान दौरे पर आ रहे हैं.

इस दो दिन के दौरे में माकन सभी विधायकों से वन टू वन चर्चा करेंगे. माकन के मुताबिक इस दौरे में जिला और ब्लॉक स्तर की नियुक्तियों को लेकर चर्चा की जाएगी. इसके साथ ही बोर्ड-निगमों में नियुक्तियों को लेकर भी उनसे सुझाव लिए जाएंगे. यह पहली बार होगा जब प्रदेश प्रभारी स्तर के नेता इस तरह ब्लॉक स्तर तक की नियुक्तियों को लेकर विधायकों से वन टू वन चर्चा करेंगे. अब तक इन नियुक्तियों के लिए पैनल दिल्ली भेजे जाते रहे हैं और आलाकमान की मंजूरी के बाद उन पर मुहर लगती रही है. अब माकन द्वारा ब्लॉक स्तर तक की नियुक्तियों के लिए वन टू वन संवाद से यह माना जा रहा है कि पार्टी में विवाद और गुटबाजी निचले स्तर तक है जिसे सुलझाने के प्रयास किए जा रहे हैं.

चर्चा को लेकर और भी कई कयास
माकन हालांकि इस वन टू वन संवाद के दौरान जिला अध्यक्ष और ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्तियों के साथ ही राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर चर्चा की बात कह रहे हैं लेकिन सियासी हलकों में इसके और भी कई तरह के मायने निकाले जा रहे हैं. ऐसा माना जा रहा है कि माकन अपने इस मंथन के दौरान मंत्रिमंडल विस्तार जैसे मसलों पर भी विधायकों की नब्ज टटोलने का प्रयास कर सकते हैं. पार्टी में संगठनात्मक नियुक्तियों की कवायद भी लंबे समय से चल रही है लेकिन उसमें कई तरह के विवाद सामने आ रहे हैं. जिला प्रभारियों, वरिष्ठ नेताओं और विधायकों को आपस में चर्चा कर नामों के पैनल भिजवाने थे. लेकिन कई क्षेत्रों में इन नेताओं में पैनल पर एक राय नहीं बन पा रही ह. कई विधायक खुद जिला अध्यक्ष बनने की दौड़ में हैं.

बड़े स्तर पर लॉबिंग की जा रही है
जिला अध्यक्ष और ब्लॉक अध्यक्ष बनने के लिए बड़े स्तर पर लॉबिंग भी की जा रही है. इन मतभेदों को देखते हुए अब तक संगठनात्मक नियुक्तियां में अटकी हुई हैं. प्रदेश में पिछले साल हुए सियासी संकट के बाद जिला और ब्लॉक स्तर की सभी कार्यकारिणियां भंग कर दी गईं थी. उसके बाद से निवर्तमान पदाधिकारियों के भरोसे संगठन का काम चल रहा है. अब विवादों को निपटाकर नियुक्तियों की कवायद तेज है और उम्मीद जताई जा रही है कि कुछ ही दिनों में संगठनात्मक नियुक्तियां हो जाएंगी.

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