Rajasthan Crisis: मरुधरा का सियासी संग्राम और सत्ता की चाबी का गणित, यह है पूरा खेल
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Rajasthan Crisis: मरुधरा का सियासी संग्राम और सत्ता की चाबी का गणित, यह है पूरा खेल
ताजा उपजे सियासी संकट में पायलट कैम्प का दावा था उनके पास 30 विधायक हैं. लेकिन 30 विधायकों के साथ दल-बदल नहीं हो सकता है.

राजस्थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच अब तक चला आ रहा राजनैतिक शीत युद्ध अब दो अलग अलग राहों पर चल पड़ा है.

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जयपुर. राजस्थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट (Ashok Gehlot and Sachin Pilot) के बीच अब तक चला आ रहा राजनैतिक शीत युद्ध अब दो अलग अलग राहों पर चल पड़ा है. वर्ष 2018 में विधानसभा चुनावों (Assembly elections) में कांग्रेस को मिले बहुमत के बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने को लेकर रस्साकसी का दौर शुरू हुआ था. लेकिन उसमें अशोक गहलोत ने बाजी मारी और सचिन पायलट के पास पीसीसी चीफ का पद यथावत रहा और उन्हें उप मुख्यमंत्री का ओहदा मिला. लेकिन एक पार्टी की सरकार में होने के बाद भी दोनों के सुर हमेशा अलग ही रहे.

क्या कहता है विधानसभा का गणित
राजस्थान विधानसभा में 200 सीटें हैं. इसमें कांग्रेस के पास 107 विधायक हैं तो बीजेपी के पास 72 विधायक हैं. वहीं निर्दलीय विधायकों की संख्या 13 है. 2 विधायक बीटीपी, 2 माकपा और 3 विधायक बीजेपी की सहयोगी आरएलपी के हैं. 1 विधायक राष्ट्रीय लोकदल के हैं जो कि सरकार में मंत्री बने हुए हैं. अब सवाल उठता है कि क्या 30 विधायक एक साथ किसी दूसरी पार्टी में मर्ज हो सकते हैं क्या ? दल बदल कानून के तहत किसी विधायक दल के दो तिहाई सदस्य किसी दूसरे दल में चले जाएं तो सदन की सदस्यता पर कोई फर्क नही पड़ेगा. लेकिन इससे कम होने पर सदन की सदस्यता खतरे में पड़ सकती है और सदस्य अगले पांच साल के लिए चुनाव भी नहीं लड़ पाते हैं.

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पायलट कैम्प का दावा कि उनके पास 30 विधायक हैं


ताजा उपजे सियासी संकट में पायलट कैम्प का दावा था उनके पास 30 विधायक हैं. लेकिन 30 विधायकों के साथ दल-बदल नहीं हो सकता है. पायलट अगर अलग फ्रंट बनाते हैं तो भी दल बदल कानून लागू होगा. ऐसे में सदन की सदस्यता खतरे में पड़ने की संभावना है. ऐसी स्थिति में 30 विधायकों को इस्तीफा देना होगा. सचिन पायलट के साथ 30 विधायक सदन की सदस्यता से इस्तीफा देते हैं तो प्रदेश की गहलोत सरकार पर संकट आ सकता है. लेकिन जब सदन में बहुमत साबित करने की बात आएं तो 200 सदस्य वाले सदन से 30 विधायकों के इस्तीफा देने पर 170 विधायक बचेंगे. बहुमत पाने के लिए 86 विधायकों की जरूरत होगी. ऐसे में कांग्रेस 30 के विधायक निकाले जाने के बाद कांग्रेस विधायक दल का आंकडा 77 पर ही आकर अटक जाएगा और उसे 9 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता पड़ेगी. ऐसे में निर्दलीय विधायक, बीटीपी और माकपा के विधायकों के सहयोग से ही सरकार कायम रह सकती है.

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बीजेपी के पास अभी 72 विधायक हैं
लेकिन अगर बीजेपी द्वारा सरकार बनाने के बात की जाए तो उसके पास अभी सदन में 72 विधायक हैं. उसके साथ आरएलपी के 3 विधायक हैं. ऐसे यह संख्या केवल 75 तक ही पहुंचती है. लेकिन उसे सरकार बनाने के लिए 86 का आंकड़ा चाहिए. ऐसे में अगर उसे कांग्रेस समर्थित 3 विधायकों का समर्थन मिल भी जाए तो भी यह आंकड़ा 78 तक पहुंचता है. उसके बावजूद बीजेपी को अन्य निर्दलियों और पार्टियों का सहारा लेना पड़ेगा. हालांकि एकबारगी गहलाेत कैम्प के पास मौजूदा संंख्या को देखते हुए सरकार पर से संकट टलता हुआ लग रहा है.
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