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'तेरे सेहरे की ये सौगात किसे पेश करूं' जैसलमेर से निकले विधायकों ने ऐसे जाहिर की खुशी, देखें VIDEO

विश्वास मत के जरिए सत्ताधारी दल ये साबित करता है कि उसे सदन में बहुमत हासिल है (फाइल फोटो)

विश्वास मत के जरिए सत्ताधारी दल ये साबित करता है कि उसे सदन में बहुमत हासिल है (फाइल फोटो)

Rajasthan Political Crisis: जैसलमेर (Jaisalmer) से गहलोत (Ashok Gehlot) खेमे के विधायक जयपुर (Jaipur) के फेयरमाउंट होटल पहुंच गए हैं. वापस लौट रहे विधायकों ने बस में गाना भी गुनगुनाया.

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जयपुर. राजस्थान (Rajasthan) में तकरीबन एक महीने से चल रहा पॉलिटिकल ड्रामा खत्म होने की ओर है. अपनी पार्टी से बगावत करने वाले सचिन पायलट (Sachin Pilot) आलाकमान से मुलाकात के बाद मंगलवार को वापस जयपुर लौटे. वापस लौटकर उन्होंने फिर कहा, . सत्य को परेशान किया जा सकता है पराजित नहीं. पार्टी ने हमारी बात सुनी है. इस सबके बीच जैसलमेर (Jaisalmer) के सूर्यागढ़ होटल में ठहरे गहलोत खेमे के विधायकों की भी वापसी हो गई है. जयपुर आने के बाद भी सभी विधायकों की बाड़ेबंदी कर दी गई है. जयपुर (Jaipur) के फेयरमाउंट में सभी विधायकों को ठहराया गया है. साथ ही होटल के सुरक्षा के मद्देनजर एसटीएफ के जवानों की तैनाती कर दी गई है.

गहलोत समर्थक विधायक जब सूर्यागढ़ से बस में सवार होकर जैसलमेर एयरपोर्ट  के लिए रवाना हुए तो सभी के चेहरों पर खुशी साफ झलक रही थी. विधायक गुनगुनाने भी लगे.  ये मुरादों की हंसी रात किसे पेश करूं, ये गीत विधायकों ने गाया. सरकार बचने और जयपुर पहुंचने की खुशी विधायकों के चेहरे पर साफ झलक रही थी. कई तो विक्ट्री सिम्बल बनाकर प्रसन्नता का इजहार कर रहे थे. मालूम हो कि गहलोत खेमे के 90 विधायक और करीब दो दर्जन कांग्रेस नेता विशेष विमान से जैसलमेर से जयपुर लौटे हैं. सचिन पायलट और उनके समर्थक विधायकों की घर वापसी के बाद गहलोत सरकार पर आया संकट खत्म हो गया है.


रंग और नूर की बारात किसे पेश करूं
ये मुरादों की हंसीं रात किसे पेश करूं
मैने जज़बात निभाए हैं उसूलों की जगह  
अपने अरमान पिरो लाया हूं फूलों की जगह
तेरे सेहरे की ...
तेरे सेहरे की ये सौगात किसे पेश करूं
ये मुरादों की हसीं रात किसे पेश करूं, किसे पेश करूँ



विधायकों की सुरीली वापसी

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत खेमे के विधायकों की 31 दिन बाद बुधवार को जैसलमेर की बाड़ेबंदी खत्म हो गई. सभी विधायक विशेष विमान से जयपुर लौटे. होटल से एयरपोर्ट तक के करीब आधे घंटे के सफर में कांग्रेस विधायक रिलेक्स नजर आए. बाड़ेबंदी खत्म होने की खुशी उनके चेहरों पर साफ दिखी. रास्ते में मुख्य सचेतक महेश जोशी ने गाने गुनगुनाया तो उन्हें बाकी विधायकों को भी खूब साथ दिया. और फिर बस में शेर ओ शायरी के साथ नगमों की बारिश होती रही. पुराने जमाने के गाने ऐसे गाए गए जैसे उनका आज की सच्चाई से वास्ता हो.

देखें वीडियो



ये भी पढ़ें: जैसलमेर से लौटे गहलोत खेमे के विधायकों की फिर से बाड़ेबंदी, होटल में STF तैनात
बस में वाह-वाह की गूंज

मुख्य सचेतक महेश जोशी ने सबसे पहले मोहम्मद रफी का गाना 'रंग और नूर की बारात किसे पेश करूं, ये मुरादों की हंसीं रात किसे पेश करूं' गाकर सुनाया. बस में बैठे अन्य विधायकों ने जोशी से कुछ और नगमे पेश करने की इल्तजा की. जोशी ने एक के बाद एक कई तराने गाए, तो माहौल खुशगवार हो गया. मानों विधायकों को उनके दिल की मुराद मिल गई हो. जोशी यहीं नहीं रूके, पंकज उधास की गजल 'ला पिला दे साकिया पैमाना पैमाने के बाद, होश की बातें करूंगा, होश में आने के बाद सुनाया तो बस में ही महफिल जवां होती दिखी. फिलहाल अभी भी गहलोत कैंप की बाड़ेबंदी कब तक चलेगी,ये तय नहीं है. मगर जब भी विधायक बोर होते दिखेंगे, शेर ओ शायरी की महफिल जमती रहेगी. अगले दो चार-दिन और मायूस होकर ही सही, ऐसे शेर,शायरी,गीत और गजल ही बरसाती माहौल में विधायकों में उत्साह का संचार करते दिखाई देंगे.

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