Rajasthan Crisis: गुलाब कटारिया बोले- हंगामेदार होगा सत्र, फ्लोर टेस्ट के बिन नहीं बढ़ेगी कार्यवाही
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Rajasthan Crisis: गुलाब कटारिया बोले- हंगामेदार होगा सत्र, फ्लोर टेस्ट के बिन नहीं बढ़ेगी कार्यवाही
गुलाब कटारिया ने सरकार पर निशाना साधा है. (File)

Rajasthan Political Crisis Update: नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया (Gulab Chand Kataria) ने कहा कि जिन परिस्थितिय़ों में यह सत्र आहूत किया गया है यह निश्चित है कि सदन हंगामेदार रहेगा. इस बात का निर्णय हो जाएगा कि सरकार बहुमत में है या नहीं.

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जयपुर. राजस्थान की सबसे बड़ी पंचायत यानी विधानसभा का सत्र (Assembly Session) 14 अगस्त से होने जा रहा है जो कि काफी हंगामेदार और निर्णायक रहने वाला है. यह बात नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया (Gulab Chand Kataria) ने न्यूज 18 से बातचीत में कही. कटारिया ने कहा कि जिन परिस्थितिय़ों में यह सत्र आहूत किया गया है यह निश्चित है कि सदन हंगामेदार रहेगा. इस बात का निर्णय हो जाएगा कि सरकार बहुमत में है या नहीं. उसके बाद ही सदन में व्यवस्थित काम हो सकेगा. कटारिया ने कहा कि सदन में जिस तरह की परिस्थिया होगी उसी हिसाब से भाजपा विधायक दल अपना स्टैण्ड लेगा. राजस्थान के सियासी हलचल के बीच नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया ने न्यूज 18 के सवालों का बेबाकी से जवाब दिया.

सवाल. 14 अगस्त को होने वाले सत्र में विपक्ष की भूमिका क्या रहेगी -सदन किस तरह का रहने वाला है?
जवाब. जिन परिस्थितियों में विधानसभा का सत्र बुलाया गया है ,इससे यह निश्चित है कि यह सत्र हंगामेदार रहने वाली है. मैं सोचता हूं कि जो लोग बाडेबंदी में हैं, वह भी अपने-अपने हिसाब से रहेंगे जहां तक मुझे अंदाजा है बातें कम होगी. फ्लोर टेस्ट के बिना आगे सदन नहीं बढ़ पाएगा. सदन एक तरह से अवरुद्ध सा ही रहने वाला है. सदन में जब यह निर्णय हो जाएगा कि इस सरकार को समर्थन है या नहीं है तब जाकर यह व्यवस्थित काम के ऊपर आएगी ,बाकी तो हंगामा ही रहने वाला है.

सवाल. सरकार विश्वासमत सदन में रखेगी या विपक्ष के तौर पर बीजेपी अविश्वास प्रस्ताव सदन में लाएगी?
जवाब.बीएसपी के सदस्यों के बारे में कोर्ट का निर्णय पर किस दिशा में जाता है बहुत कुछ उस पर डिपेन्ड है. सरकार का काम समर्थन जुटाने का होता तो यह पहले ही हो जाता. अगर सरकार विश्वास प्रस्ताव नहीं करेंगी तो भाजपा अविश्वास प्रस्ताव पर विचार करेंगी. अगर सरकार पर हमला करना है तो है विश्वास प्रस्ताव पर के माध्यम से लाने का प्रयास करेंगे. सदन चल पाएगा नहीं चल पाएगा यह भी प्रश्नवाचक चिन्ह के रूप में है. इस सदन को हंगामेदार और निर्णायक सदन कह सकते हैं. यह राजस्थान की राजनीति का अजीब परिदृश्य के रूप में यह विधानसभा दिखेगी क्योंकि जो घटनाक्रम इस महीने भर में गुजरा है वह जनता ने देखा है और जनता इस समय निराश है. भाजपा पर बार-बार इस बात का आरोप लगाया जा रहा है कि वो ये सब कर रही है. एक ही पार्टी के लोग दो खेमे में बंद है. समय रहते अपने घर को संभाल लेते तो यह हालत होती ही नहीं. यह घर 1 दिन में नहीं बिगड़ा है. जिस दिन से सरकार बनी उसी दिन से बिगड़ा है. इसका परिणाम इकट्ठे होते होते बारूद की तरह यह फटा है. इन लोगों में आपसी समन्वय नहीं होने के कारण ऐसा हुआ है. हमारी संख्या ही कम है हम तो सरकार पलटने के बारे में सोच भी नहीं सकते हैं. लेकिन जब आपस का झगड़ा दिख रहा है तो दर्शक के रूप में हम देखेंगे जरूर की राजनीति किस करवट जा रही है. उन्होंने कहा कि जो भी उस समय भाजपा को निर्णय करना होगा निश्चित रूप से किया जाएगा.



सवाल. भाजपा लगातार मीडिया में कह रही है कि सरकार अल्पमत में है, तो भाजपा क्यों नहीं अविश्वास प्रस्ताव ला रही है ?

जवाब. हमारी संख्या अभी कम है. बिना इनके आपस के तोड़फोड़ के बिना तो हम कुछ भी नहीं कर सकते. इन 19 लोगों को अयोग्य घोषित करने के जो स्टेप उठाए गए उनका इसके पीछे मंतव्य यह था कि 19 की संख्या कम हो तो सरकार कंफर्टेबल स्थिति में आ जाएंगे. वास्तव में बीएसपी के निर्णय के बाद कोई गणित बदलती है तो निश्चित रूप से सरकार जाने की स्थिति में आ जाएगी. लेकिन अगर बीएसपी रूकती है तो इन दोनों के आपस के टकराव पर ही निर्भर करता है. अगर सरकार के बारे में कोई निर्णय होगा तो दो ही रास्तों से होगा या तो विश्वास मत अर्जित करना होगा. सरकार इसे स्वयं लेकर आए वही प्रतिपक्ष अविश्वास प्रस्ताव लाकर करें. अब अविश्वास प्रस्ताव रखने का जो तरीका है उस पर बहुत कुछ अध्यक्ष पर निर्भर करता है. प्रस्ताव तो भाजपा रख सकती है, लेकिन अध्यक्ष उसकी बहस के लिए कौन सा समय तय करें यह अधिकार तो स्पीकर का ही रहता है.

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सवाल. सदन कोरोना कॉल में आहूत हो रहा है, ऐसे में किस तरह विपक्ष अपना विरोध सदन में दर्ज करवाएगा?

जवाब. भाजपा भी अपने विधायक दल की बैठक करेगा. अकेले गुलाबचंद कटारिया इसमें कुछ नहीं कर सकता. जैसी परिस्थितियां सामने आएगी उनके अनुसार ही सब लोग विचार करेंगे और उसी के हिसाब से एक्शन सदन में करेंगे.

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सवाल. मौजूदा हालात में छोटी पार्टियों और निर्दलीयों की भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण है, उनको विपक्ष के तौर पर किस तरह से देखते हैं?
जवाब. जब इस तरह की परिस्थिति सरकार के सामने आती है तो जोड़-तोड़ की राजनीति शुरू होती है. जहां मुख्यमंत्री अशोक गहलोत यह कह रहे हैं कि बीजेपी हमको तोड़ने की कोशिश कर रही है जिन लोगों को आपने अपने साथ मिलाया वह प्रेम भाव से साधु बनकर आपके साथ आए थे क्या ,यह सब राजा हरिश्चंद्र के अनुयाई है क्या ,जो आपके अंदर आकर बैठ गए हैं. निश्चित रूप से आपने इनकी कोहनी पर गुड़ लगाया होगा कितना लगाया कैसे लगाया यह तो ईश्वर ही जाने या फिर आप जानो. आप का प्रलोभन साबित है, कामरेड पार्टी कह रही है अपने विधायकों को नहीं जाना वह जा रही है. बीटीपी कह रही है नहीं जाना उनके विधायक जा रहे हैं. जब सरकार अस्थिर होती है तो सबसे ज्यादा आनंद का समय निर्दलीय विधायकों के लिए होता है. निर्दलीय इस समय यह सोचता है कि समय का फायदा किस तरह से उठाया जाए सब कामों की और वह आकर्षित होता है.

राजा हरिश्चंद्र की तरह जो बात अशोक गहलोत कह रहे हैं राम धर्म से अगर वह महात्मा गांधी के शिष्य है और उनके अनुयाई है तो वह सच्चाई कह दे कि जिनको बाडे में बंद किया है. बाड़े बंदी हिंदुस्तान में इतिहास बना गया है. मैंने तो ऐसा कभी समय देखा नहीं कि एक 1 महीने तक बाड़े में बंद हो और दोनों बॉडी कांग्रेस के हैं. भाजपा का कोई बाड़ा नहीं है. हमारा इंटरेस्ट इस बात पर नहीं है कि क्या होगा और क्या नहीं होगा. सरकार की गाड़ी अभी खतरे में है. सरकार की गाड़ी आराम में नहीं है. खतरे में इसलिए जैसलमेर जाने की जरूरत पड़ी है. मेरा अनुभव यह कहता है कि सरकार की स्थिति अच्छी नहीं है.
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