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राजस्थान: बदले सियासी समीकरणों में अब नजरें खींवसर और मंडावा विधानसभा सीटों पर

फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।

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लोकसभा चुनाव के बाद अब पार्टियों की नजरें प्रदेश में खाली हुई दो महत्वपूर्ण विधानसभा सीटों खींवसर और मंडावा पर लगी हुई हैं. ये वो सीटें हैं, जहां के विधायक लोकसभा चुनाव-2019 में चुनाव लड़कर अब सांसद बन चुके हैं.

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लोकसभा चुनाव हो चुके हैं. नरेन्द्र मोदी आज शाम को दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे. लोकसभा चुनाव के बाद अब बीजेपी-कांग्रेस की नजरें प्रदेश में खाली हुई दो महत्वपूर्ण विधानसभा सीटों पर लगी हुई हैं. ये वो सीटें हैं, जहां के विधायक लोकसभा चुनाव-2019 में चुनाव लड़कर अब सांसद बन चुके हैं. नागौर जिले की खींवसर और झुंझुनूं की मंडावा विधानसभा पर पार्टियों के साथ-साथ लोगों की टकटकी लग गई है. इनमें से एक सीट बीजेपी के पास थी, वहीं दूसरी सीट राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLTP) के पास थी. हालांकि अभी इन सीटों पर उपचुनाव होने में काफी वक्त बाकी है, लेकिन इनके अगले विधायकों पर चर्चा जरूर शुरू हो गई है.

बेनीवाल तीसरी बार जीते थे खींवसर से
नागौर जिले की खींवसर से विधानसभा चुनाव-2018 में RLTP के संयोजक हनुमान बेनीवाल विधायक बने थे. उसके बाद हुए लोकसभा चुनाव-2019 में बेनीवाल नागौर से सांसद चुने जा चुके हैं. उनके सांसद बनने के बाद अब इस सीट पर उपचुनाव होना है. बेनीवाल खींवसर से लगातार तीसरी बार चुनाव जीते थे. विधानसभा चुनाव-2008 में बीजेपी के टिकट पर खींवसर से विधायक चुने गए बेनीवाल की बाद में पूर्व सीएम वसुंधरा राजे से नहीं बनी तो वे अलग हो गए थे. उसके बाद वे विधानसभा चुनाव-2013 में निर्दलीय के रूप में वहां से जीते थे.

हनुमान बेनीवाल। फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।

लोकसभा चुनाव में हुआ था बीजेपी से गठबंधन


विधानसभा चुनाव-2018 से पहले बेनीवाल ने राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के नाम से नई पार्टी बनाई और बाद में इसी के बैनर पर लगातार तीसरा चुनाव खींवसर से जीता. यहां बेनीवाल की जड़ें काफी मजबूत हैं. लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने बेनीवाल की पार्टी से गठबंधन किया था. बेनीवाल यहां एनडीए के प्रत्याशी के तौर चुनाव मैदान में उतरे थे. अभी आगे की स्थिति स्पष्ट नहीं है कि उपचुनाव में भी उनका गठबंधन जारी रहेगा या फिर बीजेपी और बेनीवाल की पार्टी अलग-अलग लड़ेगी. इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं.

नरेन्द्र ने मंडावा में पहली बार खिलाया था कमल
झुझुनूं की मंडावा विधानसभा सीट का सियासी समीकरण भी काफी रोचक है. यहां के बीजेपी विधायक नरेन्द्र खीचड़ भी इस बार झुंझुनूं लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़कर सांसद बन चुके हैं. कांग्रेस की परंपरागत सीट रही मंडावा में विधानसभा चुनाव-2018 में नरेन्द्र खीचड़ ने आजादी के बाद पहली बार कमल खिलाया था. अब उनके सांसद बनने के बाद यह सीट खाली हो गई है. नरेन्द्र खीचड़ इससे पहले 2013 में यहां से निर्दलीय विधायक जीते थे.

नरेन्द्र खीचड़। फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।


रोचक होगा मुकाबला
गत विधानसभा चुनाव में 100 सीटें जीतने वाली कांग्रेस के लिए अपना आंकड़ा इससे ऊपर पहुंचाने के लिए यह अहम मौका होगा. यह बात दीगर है कि विधानसभा चुनाव के बाद लोकसभा चुनाव में बदले सियासी समीकरणों में वह सफल हो पाएगी या नहीं. वहीं बीजेपी भी बमुश्किल हाथ आई इस सीट को वापस खोना नहीं चाहेगी. वह भी बदले सियासी समीकरणों में इस सीट को बरकरार रखने की कोशिश करेगी. लिहाजा यहां का उपचुनाव भी रोचक होगा.

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