स्कूली शिक्षा में 'सावरकर' पर तेज हुई सियासत, शिक्षामंत्री ने दिए ये तर्क

राजस्थान में स्कूली शिक्षा पर सियासत तेज हो गई है. सत्ता परिवर्तन के साथ ही कांग्रेस सरकार द्वारा पूर्ववर्ती बीजेपी सरकार के फैसले बदलने का शुरू हुआ सिलसिला अब सिलेबस पर आ गया है.

Sandeep Rathore | News18 Rajasthan
Updated: May 14, 2019, 12:52 PM IST
Sandeep Rathore
Sandeep Rathore | News18 Rajasthan
Updated: May 14, 2019, 12:52 PM IST
प्रदेश में स्कूली शिक्षा पर सियासत तेज हो गई है. सत्ता परिवर्तन के साथ ही कांग्रेस सरकार द्वारा पूर्ववर्ती बीजेपी सरकार के फैसले बदलने का शुरू हुआ सिलसिला अब सिलेबस पर आ गया है. कांग्रेस सरकार ने सावरकर को लेकर स्कूलों में पढ़ाई जा रही सामग्री में बदलाव करते हुए उन्हें वीर नहीं, बल्कि अंग्रेजों से दया मांगने वाला बताया है. इस मुद्दे पर अब बीजेपी भी आक्रामक होती दिखाई दे रही है. वहीं कांग्रेस का तर्क है कि बीजेपी ने पाठ्यक्रम का भगवाकरण करने का जो प्रयास किया है उसे ठीक किया गया है.

कांग्रेस ने स्कूल की किताबों में किया बदलाव, सावरकर को अंग्रेजों से दया मांगने वाला बताया



प्रदेश के शिक्षा राज्यमंत्री गोविंद डोटासरा का कहना है कि पूर्ववर्ती बीजेपी सरकार ने स्कूली पाठ्यक्रम में अपनी राजनीतिक विचारधारा थोपने के लिए उसमें बदलाव किया था. इस बदलाव के तहत आजादी में जिन महापुरुषों का योगदान था, उनको कम दिया गया था. जबकि जिनका आजादी के समय कोई योगदान नहीं था, उनको ज्यादा महिमामंडित करके दिखाया गया था.

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जो भी लिखा गया है उसके प्रमाण शिक्षाविदों के पास हैं
बकौल डोटासरा जब हमारी सरकार बनी तो पाठ्यक्रम की समीक्षा के लिए शिक्षाविदों की एक समिति बनाई गई थी. उस समीति ने पाठ्यक्रम की समीक्षा की. उन्होंने बड़े ही ठोस आधारों के आधार पर पुस्तकों में जो वर्णन किया है वह सही किया है. वीर सावरकर के बारे में पुस्तकों में जो भी लिखा गया है उसके प्रमाण शिक्षाविदों के पास हैं.

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आरएसएस की सोच के मुताबिक पाठ्यक्रम में बदलाव किया गया था
डोटासरा ने बीजेपी के आरोपों को नकारते हुए कहा कि यह कहना बिल्कुल गलत है कि सावरकर का अपमान किया गया है. यह उन लोगों की सोच थी. उन्होंने अपनी पार्टी को पुर्नजीवित करने और अपने छिपे हुए एजेंडे को साधने के लिए आरएसएस की सोच के मुताबिक पाठ्यक्रम में बदलाव किया था.

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सावरकर से जुड़े हिस्से में किए बदलाव
उल्लेखनीय है कि माध्यमिक शिक्षा के सिलेबस की समीक्षा के लिए गठित कमेटी ने दसवीं कक्षा के सामाजिक विज्ञान के पाठ में अंग्रेजी साम्राज्य का प्रतिकार एवं संघर्ष में कई बदलाव किए हैं. इस पाठ में देश के कई महापुरुषों की जीवनी शामिल हैं. इसमें सावरकर से जुड़े हिस्से में काफी बदलाव किए गए हैं.

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