डर की राजनीति, विकास की राजनीति का विकल्प नहीं हो सकती- डॉ. मनमोहन सिंह

नए विधायकों को सदन के नियम और परंपराओं से अवगत कराने के लिए रविवार को विधानसभा में प्रबोधन कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में विधायकों को दिनभर संसदीय आचरण और विधानसभा के भीतर उठाए जाने वाले मुद्दों पर पाठ पढ़ाया गया.

News18 Rajasthan
Updated: July 7, 2019, 10:56 PM IST
डर की राजनीति, विकास की राजनीति का विकल्प नहीं हो सकती- डॉ. मनमोहन सिंह
पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह। फाइल फोटो
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Updated: July 7, 2019, 10:56 PM IST
नए विधायकों को सदन के नियम और परंपराओं से अवगत कराने के लिए रविवार को विधानसभा में प्रबोधन कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम के तहत विधायकों को दिनभर संसदीय आचरण और विधानसभा के भीतर उठाए जाने वाले मुद्दों पर पाठ पढ़ाया गया. कार्यक्रम का शुभारंभ सुबह लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने किया, वहीं शाम को समापन-सत्र में मुख्य अतिथि पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने विधायकों को संबोधित किया.

सदन की मर्यादा, परंपरा और नियमों की दी जानकारी
लोकसभा स्पीकर बिरला और पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने विधायकों को सदन की मर्यादा, परंपरा, विधायी कार्य और नियमों की जानकारी देते हुए उनसे आह्वान किया कि वे निष्ठापूर्वक अपने दायित्व का निर्वहन करें. इस दौरान सीएम अशोक गहलोत, विधानसभाध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी समेत बीजेपी-कांग्रेस और अन्य सभी दलों के विधायक मौजूद रहे.

विधायक सरकार पर निगाह रखें

पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा कि विधायकों का दायित्व है कि वे सरकार पर निगाह रखें. बजट पारित करने के अलावा विधायकों का विकास में भी अहम रोल है. विधायक निधि का बहुत सा भाग बिना खर्च किए रह जाता है. विधायक अपने विधायक कोष का पूरा पैसा जनता के विकास में लगाएं. अपने क्षेत्र की जनता की जरूरतों और समस्याओं का समाधान करने पर ध्यान दें. विधायक सदन में नियमित रूप से मौजूद रहें.

विधायक मुद्दों के अध्ययन में कुछ वक्त लगाएं
डॉ. सिंह ने कहा सदन की कार्यवाही की लाइव होती है. ऐसे में सदन में शोरगुल और अमर्यादित आचरण देश के युवाओं के मन में गलत तस्वीर पेश करता है, लिहाजा इसका ध्यान रखें. सिंह ने कहा विधायक को एक अच्छा श्रोता होना चाहिए. एक अच्छा श्रोता होना किसी भी सफल विधायक की मुख्य खूबी है. विधायक मुद्दों के अध्ययन में कुछ वक्त लगाएं. डर की राजनीति विकास की राजनीति का विकल्प नहीं हो सकती. विधायकों के प्रति जनता के मन में विश्वास होना चाहिए.
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Prabodhan program in Rajasthan assembly राजस्थान विधानसभा में प्रबोधन कार्यक्रम
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला। फाइल फाेटो


सदन की मर्यादा और अनुशासन को बनाए रखें
इससे पहले सुबह लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने दीप प्रज्जवलन कर कार्यक्रम की शुरुआत की. बिरला ने कहा कि सदन की मर्यादा और अनुशासन को बनाए रखना लोकसभा और विधानसभाओं के सदस्यों की सामूहिक जिम्मेदारी है. लोकसभा या विधानसभा की कार्यवाही जितनी अधिक चलेगी, सरकार उतनी ही अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनेगी. जिस मंत्री को जितने अधिक प्रश्नों का उत्तर देने का अवसर मिलेगा, वह मंत्री अपने विभाग को उतना ही बेहतर तरीके से समझ पाएगा.

सदन सभी सदस्यों का होता है
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा सदन कभी भी पक्ष या प्रतिपक्ष का नहीं होता है. यह सभी सदस्यों का सदन होता है, इसलिए सदन की मर्यादा और अनुशासन को कायम रखना सभी सदस्यों की जिम्मेदारी होती है. सदन का पीठासीन अधिकारी होने के नाते अध्यक्ष की यह जिम्मेदारी है कि वह पक्ष और विपक्ष के सभी सदस्यों का संरक्षण करे और उन्हें अपने क्षेत्र के लोगों की समस्याओं को सदन में उठाने का अवसर दे. लोकसभा अध्यक्ष ने विधानसभा की नई वेबसाइट और मोबाइल एप को भी लॉन्च किया.

(सुधीर शर्मा एवं गोवर्धन चौधरी की  रिपोर्ट)

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First published: July 7, 2019, 7:40 PM IST
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