Positive India :जयपुर में जन्म लेते ही लड़ी कोरोना से लड़ाई, 11 दिन में जीत गया मासूम, सफलता की बड़ी कहानी

सोमवार को 11 दिन बाद बच्चा बिना ऑक्सीजन के और किसी भी तरह की तकलीफ के बिना दूध पी रहा है. उसको पचा पा रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

सोमवार को 11 दिन बाद बच्चा बिना ऑक्सीजन के और किसी भी तरह की तकलीफ के बिना दूध पी रहा है. उसको पचा पा रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

Big success story on Corona: राजस्थान के जयपुर में कोरोना के खिलाफ जंग में सफलता की बड़ी कहानी सामने आई है. यहां एक नवजात बच्चे (Newborn baby) ने महज 11 दिन में कोरोना को मात देकर जिंदगी की जंग जीत ली है.

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जयपुर. कोरोना (COVID-19) की दूसरी खतरनाक लहर में राजधानी जयपुर में 11 दिन के एक मासूम (Innocent) ने कोरोना को हरा दिया. जन्म के साथ ही पॉजिटिव पाये गये नवजात ने महज 11 दिन की जद्दोजहद के बाद कोरोना को मात दे दी. यह दीगर बात है कि नवजात की मां अभी वेंटिलेटर पर है. चिकित्सक उसकी देखरेख में जुटे हैं.

जानकारी के अनुसार पूरा मामला जयपुर के इटर्नल हॉस्पिटल से जुड़ा है. यहां एक अनोखा केस सामने आया. यहां कोरोना पॉजिटिव महिला की डिलीवरी हुई तो बेटा भी पॉजिटिव निकला. जन्म लेते ही ‘अजय’ का सामना उस दुश्मन से हो गया जिससे पूरी दुनिया लड़ रही है. लेकिन नन्हें से अजय ने सिर्फ 11 दिन में कोरोना को हरा दिया. अब वह अपनी मां के स्वस्थ होने का इंतजार कर रहा है. जयपुर के इटर्नल हॉस्पिटल में हुए इस अनोखे मामले में शिशु को जन्मजात कोरोना संक्रमित होने के बावजूद डॉक्टर्स की मेहनत और मेडिकल मैनेजमेंट की बदौलत बचा लिया गया.

बाइपेप पर ही हुई सिजेरियन डिलीवरी

इटर्नल हॉस्पिटल के पीडियाट्रिक विभाग डायरेक्टर और अध्यक्ष डॉ. एस.डी. शर्मा ने बताया कि गत 28 अप्रैल को विमला देवी (परिवर्तित नाम) को अस्पताल में भर्ती कराया गया था. वे कोरोना पॉजिटिव थीं और उनकी डिलीवरी कराना भी अत्यंत आवश्यक था. संक्रमण गंभीर होने के कारण भर्ती होने के साथ ही उन्हें बाइपेप पर ले जाया गया. बाइपेप पर ही उनकी सिजेरियन डिलीवरी की गई. इसमें उन्होंने बेटे को जन्म दिया. डॉ. शर्मा ने बताया कि शिशु को सांस लेने में कठिनाई होने पर हमने उसे ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा. नवजात की कोविड जांच कराई तो वह भी पॉजिटिव निकला.
कोविड प्रोटोकॉल से ही ही नन्हें ‘अजय’ का हुआ ट्रीटमेंट

शिशु के कोरोना पॉजिटिव होने पर पूरे नियोनेटोलॉजी वॉर्ड में सिर्फ ‘अजय’ को ही रखा गया. उसकी देखभाल करने वाला नर्सिंग स्टाफ और डॉक्टर्स पीपीई किट पहनकर ही उसके पास जाते थे. डॉ. एसडी शर्मा ने बताया कि शिशु को सीपेप ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया और हृदय संबंधित समस्या मालूम करने के लिए उसकी 2डी ईको जांच भी की गई. इसमें पलमोनरी आर्टरी प्रेशर बढ़े हुए मिले. इसके कारण बच्चे को लम्बे समय तक ऑक्सिजन की जरूरत पड़ी. शिशु की कोरोना रिपोर्ट छह दिन बाद नेगेटिव आ गई थी. लेकिन फिर भी बच्चे को ऑक्सीजन की जरूरत थी. धीरे-धीरे शिशु की स्थिति में सुधार आया और 9वें दिन हम ऑक्सिजन को हटा पाए.

नवजात को अस्पताल से डिस्चार्ज किया



सोमवार को 11 दिन बाद बच्चा बिना ऑक्सीजन के और किसी भी तरह की तकलीफ के बिना दूध पी रहा है. उसको पचा पा रहा है. बच्चे को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है. अब शिशु के पिता उसकी देखभाल कर रहे हैं. इस केस में डॉ. स्वतंत्र राठौड़, डॉ. आवेश सैनी, डॉ. सुरेंद्र व्यास, नर्सिंग स्टाफ प्रिंसी, पवन, मंजू, विनोद और चंद्रशेखर का विशेष सहयोग रहा.

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