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विद्युत तंत्र के कुप्रबंधन के कारण पनपा राजस्थान में बिजली का संकट! पढ़ें इनसाइड स्टोरी

राजस्थान में शॉर्ट फॉल के लिये एक्शन प्लान तक नहीं बनाया गया.

राजस्थान में शॉर्ट फॉल के लिये एक्शन प्लान तक नहीं बनाया गया.

राजस्थान में बिजली संकट: राजस्थान में भीषण गर्मी के बीच आया बिजली संकट (Power crisis) बिजली की कमी से नहीं बल्कि विद्युत तंत्र के कुप्रबंधन (Mismanagement of power system) के पनपा बताया जा रहा है. विद्युत निगम के सूत्रों की मानें तो वर्ष 2022 में बिजली की खपत का संभावित एसेसमेंट तक ही नहीं किया गया है. जबकि इसको लेकर बीते वर्ष दिसंबर माह में ही बैठक होनी थी वह हुई ही नहीं. और तो और संभावित शॉर्ट फॉल को लेकर एक्शन प्लान तक नहीं बनाया गया. लिहाजा संकट तो आना ही था.

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हाइलाइट्स

बिजली की खपत का आंकलन नहीं होना बड़ा कारण माना जा रहा है
बिजली संकट के पीछे अधिकारियों की लापरवाही भी मानी जा रही है

जयपुर. प्रचंड गर्मी से हलकान हो रहे राजस्थान के विद्युत तंत्र के कारण लोगों को बिजली कटौती (Power cut) का सामना करना पड़ रहा है. गर्मी में आये इस बिजली संकट के पीछे बिजली की कमी से ज्यादा सरकार के पॉवर मैनेजमेंट का फेलियर (Mismanagement of power system) ज्यादा माना जा रहा है. इसके पीछे ठोस तर्क भी गिनाये जा रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक दिसंबर में होने वाली एनर्जी एसेसमेंट कमेटी की बैठक भी इस बार नहीं हुई. इसके चलते इस साल बिजली की मांग कितनी रहेगी इस बात का भी आंकलन ही नहीं हो पाया. यह बात दीगर है कि लॉग टर्म बिजली की कितनी जरुरत होगी उसका आंकलन कर लिया गया.

बिजली सिस्टम के फेलियोर का एक बड़ा कारण बिजली की खरीद फरोख्त करने वाली कंपनी ऊर्जा विकास निगम में लगे उच्चाधिकारियों को भी माना जा रहा है. उनमें विद्युत वितरण और बिजली की मांग तथा आपूर्ति के बारे में व्यवहारिक जानकारी अभाव बताया जाता है. इसकी वजह है कि ऊर्जा विकास निगम में अहम पदों पर तैनात अधिकारी विद्युत उत्पादन निगम से आते हैं.

एनर्जी एसेसमेंट कमेटी की बैठक ही नहीं हुई
लिहाजा कभी तो बिजली मंहगें दामों पर खरीद की जा रही है और कभी कम दरों में बाजार में बेची जा रही है. ऊर्जा विभाग के सूत्रों की मानें तो पिछले साल दिसंबर में साल 2022 में कितनी बिजली की जरूरत होगी इसके लिए गठित एनर्जी एसेसमेंट कमेटी की बैठक ही नहीं हुई. इसके कारण यह पता ही नहीं चल पाया कि वर्ष दौरान 2022 के दौरान कितनी बिजली की जरुरत होगी. बिजली का सही आंकलन नहीं होने को ही बिजली कटौती को बड़ा कारण माना जा रहा है.

शॉर्ट फॉल के लिये एक्शन प्लान तक नहीं बनाया गया
गर्मी के कारण होने वाले बिजली के शॉर्ट फाल के लिए एक्शन प्लान तक नहीं बनाया गया. जबकि यह कमेटी इतनी पावरफुल होती है कि इसमें सभी बिजली कंपनियों के आला अधिकारी सदस्य होते हैं. अभी राजस्थान की विद्युत उत्पादन इकाइयों में बिजली संकट पर कोयले की उपलब्धता को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं. लेकिन हकीकत यह है कि कोयले की कमी के चलते एक भी यूनिट से बिजली उत्पादन नहीं रुका है.

अधिकारियों की कार्यशैली पर उठ रहे हैं सवाल
वहीं विद्युत वितरण निगमों में बिजली का सही प्रबंधन हो सके इसके लिए ऊर्जा विकास निगम नाम के एक सफेद हाथी को भी खड़ा कर दिया गया है. इसका काम वितरण निगमों में सही तरीके से आंकलन कर बिजली उपलब्ध करवाना है लेकिन यह कागजी ही साबित हो रहा है. इसकी एक वजह यह भी कि बिजली की मांग और उपलब्धता की जिम्मेदारी विद्युत उत्पादन निगम के ऐसे अभियंताओ को दी गई है जो इतने बड़े बिजली संकट में भी पावर कन्ट्रोल के दफ्तर तक जाकर नहीं देख रहे हैं. केवल माबोइल पर मिल रही जानकारी से काम चला रहे हैं.

Tags: Ashok Gehlot Government, Jaipur news, Power Crisis, Rajasthan news

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