जयपुर: कोरोना महामारी में प्रेक्टिल परीक्षा कराना प्रतिष्ठित MGD स्कूल को पड़ा भारी, DM ने थमाया नोटिस

कलक्टर ने कहा कि अभिभावकों को भ्रमित करवा कर प्रायोगिक परीक्षा करवाना गलत है. यह बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है.

कलक्टर ने कहा कि अभिभावकों को भ्रमित करवा कर प्रायोगिक परीक्षा करवाना गलत है. यह बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है.

Practical exam conducted in corona epidemic : जयपुर जिला कलक्टर अंतर सिंह नेहरा ने इस मामले को लेकर राजधानी की प्रतिष्ठित निजी एमजीडी स्कूल की प्रिंसिपल को कारण बताओ नोटिस (Show cause notice) जारी कर जवाब तलब किया है.

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जयपुर. प्रदेश में तेजी से बढ़ रहे कोरोना संक्रमण (Corona infection) के खतरनाक समय में इसे थामने के लिये लागू किये गये 'जन अनुशासन पखवाड़े' (Curfew) के बीच नियमों की धज्जियां उड़ाकर छात्राओं की प्रेक्टिल परीक्षा (Practical Exam) कराना राजधानी जयपुर की प्रतिष्ठित एमजीडी स्कूल (MGD School) को भारी पड़ गया है. जिला कलक्टर ने स्कूल की प्रिंसिपल को कारण बताओ नोटिस (Show cause notice) जारी कर जवाब तलब किया है.

इस मामले में अभिभावक संघ की ओर से मुकदमा दर्ज कराने के बाद अब जिला कलक्टर ने स्कूल को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. जिला कलेक्टर ने एमजीडी स्कूल की प्रिंसिपल को जिला प्रशासन से लिखित अनुमति प्राप्त किए बिना अभिभावकों को भ्रमित कर प्रायोगिक परीक्षा करवाने के लिए एवं राज्य सरकार की ओर से जारी कोविड-19 गाइडलाइन के उल्लंघन का दोषी मानते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया है.

जांच टीम को भी 3 घंटे तक बिठाये रखा

जिला कलक्टर अंतर सिंह नेहरा ने बताया कि स्कूल प्रशासन ने प्रायोगिक परीक्षा करवाने के लिए जिला प्रशासन से कोई लिखित अनुमति नहीं ली थी. मामला संज्ञान में आने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी को तुरंत प्रभाव से कार्रवाई करने के निर्देश दिए गये. इस पर जब जांच के लिए स्कूल में टीम भेजी गई तो एमजीडी स्कूल प्रशासन ने जांच टीम को भी 3 घंटे तक बिठाये रखा. यह निंदनीय कृत्य है.
VIDEO: कोरोना संक्रमण के बीच जयपुर में इस स्कूल ने करवा डाली प्रैक्टिल परीक्षा, जांच अधिकारी को धमकाया

राजस्थान महामारी अधिनियम- 2020 के तहत थमाया नोटिस

बकौल नेहरा कोरोना कोराना वायरस संक्रमण के दौर में जिला प्रशासन मुस्तैदी के साथ कार्य कर रहा है और आमजन को जागरुक भी कर रहा है. ऐसे में अभिभावकों को भ्रमित करवा कर प्रायोगिक परीक्षा करवाना गलत है. यह बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है. नेहरा ने आपदा प्रबंधन अधिनियम- 2005 की धारा 51 से 60 एवं राजस्थान महामारी अधिनियम- 2020 के तहत प्रिंसिपल को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है.
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