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प्रतीक झाझड़िया रिश्वत केस: प्रतिनियुक्ति पर आये अधिकारियों की नियुक्तियों पर उठने लगे सवाल

राजस्थान में 247 आईएएस अधिकारी हैं. इनमें 214 ऑफिसर्स की राजस्थान में पोस्टिंग है. 18 आईएएस सेंट्रल डेपुटेशन पर हैं. 2 आईएएस की तैनाती बिहार और उत्तरप्रदेश में है.

Bribery scandal in Labor Department: राजस्थान के श्रम विभाग में सामने आये घूस कांड के बाद बीजेपी गहलोत सरकार पर हमलावर है. वहीं अब राज्य में प्रतिनियुक्ति पर आये अन्य अफसरों के लंबे समय से एक ही पद पर जमे रहने से सवाल उठने लगे हैं.

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जयपुर. प्रदेश में श्रम विभाग में रिश्वत कांड (Bribery Case) के खुलासे के बाद अब डेपुटेशन (Deputation) पर आए अफसरों की नियुक्ति और प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं. राज्य में प्रतीक झाझड़िया (Prateek Jhajharia) ही अकेले ऐसे ऑफिसर नहीं हैं जो प्रतिनियुक्ति पर आए हैं. प्रदेश में आधा दर्जन ऐसे ऑफिसर्स हैं जो दूसरे राज्यों से प्रतिनियुक्ति पर यहां आए हैं. इनमें 3 आईएएस और 2 आईआरएस और एक डाक सेवा के अधिकारी शामिल हैं.

इन ऑफिसरों की तैनाती सीएमओ से लेकर मलाईदार पोस्टों पर है. आलम यह है कि कुछ ऑफिसरों को छोड़कर कई अधिकारी ढाई साल से एक पद पर जमे हैं. राज्य की ब्यूरोक्रेसी में हर 6 महीने बाद बदलाव होता रहा है. ऑफिसर इधर से उधर होते रहे हैं. लेकिन ये अधिकारी अपने राजनीतिक रसूख के चलते लगातार उन्हीं पदों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

राजनीतिक पकड़ बेहद मजबूत है
बताया जाता है कि इन ऑफिसर्स की राजनीतिक पकड़ बेहद मजबूत है. इसकी ब्यूरोक्रेसी में अक्सर चर्चा भी रहती है. प्रदेश में 247 आईएएस अधिकारी हैं. इनमें 214 अफसरों की राजस्थान में पोस्टिंग है. 18 आईएएस सेंट्रल डेपुटेशन पर हैं. 2 आईएएस की तैनाती बिहार और उत्तरप्रदेश में है.

आरोप- प्रत्यारोप का दौर चरम पर
राज्य के श्रम विभाग में रिश्वतकांड के बाद राज्य की ब्यूरोक्रेसी के साथ-साथ राज्य की सियासत में आरोप-प्रत्यारोप का दौर चरम पर है. पिछली सरकार में खनन घोटाले के आरोपी सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अशोक सिंघवी के मामले में कांग्रेस हमलावर हुई थी वैसे ही अब बीजेपी भी सरकार पर हमलावर हो गई है. उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ लगातार सरकार पर इस मामले को लेकर हमला कर रहे हैं. राठौड़ का कहना है कि प्रतिनियुक्ति पर आए अफसरों की नियुक्ति में कहीं न कहीं गड़बड़ है. पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह राठौड़ का कहना है कि भारतीय डाक सेवा के ऑफिसर प्रतीक झाझड़िया को किसकी सिफारिश पर राजस्थान में लेबर कमिश्नर बनाया गया.

वसुंधरा सरकार पर लगे थे सिंघवी को बचाने के आरोप
उल्लेखनीय है कि पिछली वसुंधरा सरकार के समय में खनन घोटाले के आरोपी सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अशोक सिंघवी के मामले पर भी कांग्रेस ने सत्तारूढ़ दल बीजेपी को कठघरे में खड़ा किया था. उस समय कांग्रेस विपक्ष में थी. कांग्रेस का कहना था कि पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की नजदीकी के चलते अशोक सिंघवी को मलाईदार पोस्ट पर लगाया गया. वसुंधरा सरकार पर सिंघवी को बचाने के आरोप भी लगे थे.

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