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राजस्थान में सरपंचों और पंचों पर शिकंजा कसने की तैयारी, आ सकते हैं लोकायुक्त की जांच के दायरे में

राजस्थान के नए लोकायुक्त पीके लोहरा सरपंचों और पंचों को जांच के दायरे में लाना चाहते हैं.

राजस्थान के नए लोकायुक्त पीके लोहरा सरपंचों और पंचों को जांच के दायरे में लाना चाहते हैं.

Rajasthan News: राजस्थान में जल्द ही पंचों और सरपंचों पर नकेल कसी जा सकती है. राज्य लोकायुक्त पीके लोहरा (Lokayukta PK Lohra) सरपंचों और पंचों को जांच के दायरे में लाना चाहते हैं. इसके लिये मसौदा तैयार कर लिया गया है. अब उसे सीएम अशोक गहलोत के अनुमोदन के लिये भेजा जायेगा.

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जयपुर. जनसाधारण को स्वच्छ प्रशासन देने के लिए लोकायुक्त अब पंच और सरपंच (Panch and Sarpanch) पर भी नकेल कसने की तैयारी कर रहा है. लोकायुक्त (Lokayukta) की जांच के दायरे में अधिकारी/ कर्मचारियों के अलावा अब सरपंच-पंच भी आ सकेंगे. राज्य लोकायुक्त ने इसके लिये एक प्रस्ताव तैयार किया है. प्रस्ताव को जल्द मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा. लोकायुक्त का प्रस्ताव यदि अमल में आ जाता है ग्रामीण पंचायती राज विभाग की वेबसाइट के अनुसार 11320 सरपंच और 1 लाख 7 हजार 707 वार्ड पंच लोकायुक्त की जद में आ जाएंगे. अभी तक पंच-सरपंच और सहकारी संस्थाओं के कर्मचारी/ अधिकारी लोकायुक्त की जांच के दायरे में नहीं आते हैं.

दरअसल 1973 के लोकायुक्त अधिनियम में सरपंचों और पंचों को जांच के दायरे से बाहर रखा गया था, लेकिन प्रदेश के नए लोकायुक्त पीके लोहरा सरपंचों और पंचों को जांच के दायरे में लाना चाहते हैं. लोकायुक्त संबंधित केंद्रीय कानून में लोकायुक्त को भ्रष्ट सरकारी अधिकारियों और मंत्रियों पर लगे आरोपों की जांच करने के अधिकार देने का प्रावधान है. मंत्री से लेकर आईएएस अफसर के खिलाफ लोकायुक्त में शिकायत की जा सकती है. लेकिन सरपंचों के खिलाफ शिकायत नहीं की जा सकती. लोकायुक्त अब इसमें बदलाव करना चाहते हैं. लोकायुक्त मंत्री से लेकर आईएएस के खिलाफ शिकायत होने पर जांच कर सकता है और उसका खुलासा कर सकता है. लोक सेवकों द्वारा अपने पदीय स्थिति का दुरुपयोग करने पर लोकायुक्त संस्थान जांच का अधिकार रखता है.



जांच के दायरे में मंत्री से लेकर प्रधान तक
लोकायुक्त राज्य के मंत्रियों से लेकर आईएएस अफसरों की शिकायतों की जांच कर सकता है. विभागों के सचिव, विभागाध्यक्षों, लोकसेवक भी इसकी जांच के दायरे में हैं. जिला परिषदों के प्रमुखों व उप प्रमुखों, पंचायत समितियों के प्रधानों व उप-प्रधान, नगर निगम के महापौर, उपमहापौर, नगर परिषद और नगर पालिका के चेयरमैन की भी लोकायुक्त में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है. नगर विकास न्यासों के अध्यक्षों व उपाध्यक्षों, राजकीय कम्पनियों व निगमों अथवा मण्डलों के अध्यक्षों, अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध शिकायतों की जांच का भी प्रावधान है.

ये नहीं आते लोकायुक्त की जांच के दायरे में
मुख्यमंत्री, महालेखाकार,आरपीएससी अध्यक्ष और सदस्य, सरपंच- पंच, विधानसभा सचिवालय के अधिकारी-कर्मचारी, सेवानिवृत्त लोकसेवक और सुप्रीम कोर्ट तथा हाईकोर्ट के न्यायाधीश.

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