50 साल तक प्राइवेट कंपनी संभालेगी जयपुर एयरपोर्ट, महंगा हो सकता है हवाई सफर
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50 साल तक प्राइवेट कंपनी संभालेगी जयपुर एयरपोर्ट, महंगा हो सकता है हवाई सफर
केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में निजीकरण पर फैसला लिया गया है.

जयपुर एयरपोर्ट (Jaipur Airport) का संचालन अब प्राइवेट कंपनी द्वारा किया जाएगा. उम्मीद जताई जा रही है कि निजी हाथों (PPP Model) में आने के बाद एयरपोर्ट पर सुविधाएं बढ़ेंगी. 

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जयपुर. 19 अगस्त को आखिरकार आधिकारिक तौर पर केन्द्र सरकार ने जयपुर एयरपोर्ट (Jaipur Airport) को निजी हाथों में सौंप दिया. पिछले एक साल से देश के 6 एयरपोर्ट को निजी हाथों में सौंपने की प्रक्रिया चल रही थी जो अब अंतिम रूप ले चुकी है. जानकारी के मुताबिक, अडानी ग्रुप अब जयपुर एयरपोर्ट का संचालन करेगा. जयपुर समेत 3 एयरपोर्ट के निजीकरण को मंजूरी दे दी गई है. दिल्ली में केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी ने इसे अंतिम रूप दिया. जयपुर, गुवाहाटी और त्रिवेंद्रम एयरपोर्ट अब पीपीपी मोड पर संचालित किया जाएगा.  तीनों एयरपोर्ट को ही अडानी ग्रुप संचालित करेगा. इससे पहले लखनऊ, अहमदाबाद और मंगलुरू एयरपोर्ट के निजीकरण को भी अप्रूव किया जा चुका है.

अब अगले 50 सालों तक अब जयपुर एयरपोर्ट निजी हाथों में चला गया है. उम्मीद जताई जा रही है निजी हाथों में चले जाने के बाद एयरपोर्ट पर सुविधाओं का अंबार लगेगा. लेकिन वर्तमान की तुलना में हवाई यात्रा महंगा होने का भी अंदेशा है. एयर टिकट से लेकर एयरपोर्ट की पार्किग और अंदर मिलने वाले सामान तक की कीमतें बढ़ सकती हैं. लेकिन पहले की बजाय यात्रियों की सफर ज्यादा सुविधाजनक हो सकता है. बहरहाल, ग्रुप के संभालने के बाद ही तस्वीर साफ हो पाएगी कि पहले की यात्रा और अब की यात्रा में क्या कुछ बदला है.

पीपीपी मॉडल पर दिया लीज



मालूम हो कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में एयरपोर्ट के निजीकरण पर भी मुहर लगाई है. कैबिनेट ने जयपुर, गुवाहाटी और तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट को पीपीपी मॉडल के तहत लीज पर देने का फैसला किया है. ये एयरपोर्ट 50 साल के लिए लीज पर दिए जाएंगे. केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कैबिनेट फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि इससे 1070 करोड़ रुपये मिलेंगे. इस रकम का इस्तेमाल एयपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया छोटे शहरों में एयरपोर्ट बनाने पर करेगी. साथ ही, यात्रियों को भी कई सुविधाएं मिलेंगी.
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केंद्र सरकार ने बीते साल सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत परिचालन, प्रबंधन और विकास के लिए लखनऊ, अहमदाबाद, जयपुर, मंगलुरु, तिरुवनंतपुरम और गुवाहाटी में हवाई अड्डों का निजीकरण कर दिया था. माना जा रहा है कि एयरपोर्ट लीज पर देने से निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा. एयरपोर्ट चलाने में होने वाले नुकसान में कमी होगी. आपको बता दें कि देश में Airport Authority of India के पास अभी भी 100 से ज्यादा एयरपोर्ट हैं. AAI के 90 से ज्यादा एयरपोर्ट घाटे में चल रहे हैं.
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