Rajasthan: गांव-कस्बों के छोटे और मध्यम निजी स्कूलों का बड़ा फैसला, नये सत्र से नहीं बढ़ायेंगे फीस
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Rajasthan: गांव-कस्बों के छोटे और मध्यम निजी स्कूलों का बड़ा फैसला, नये सत्र से नहीं बढ़ायेंगे फीस
निजी स्कूल शिक्षा परिवार ने बताया कि उनसे प्रदेशभर के 30,000 हजार स्कूल जुड़े हुए हैं. इनमें 60 लाख स्टूडेंट्स अध्ययनरत हैं. (प्रतिकात्मक तस्वीर)

कोरोना लॉकडाउन (Corona lockdown) से गांव और कस्बों के छोटे स्कूलों की भी आर्थिक स्थिति खराब हो गई है. इसके बावजूद इन निजी स्कूलों ने नये शैक्षणिक सत्र से फीस नहीं बढ़ाने (Not increase fees) का फैसला किया है.

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जयपुर. कोरोना लॉकडाउन  (Corona lockdown) से गांव और कस्बों के छोटे स्कूलों की भी आर्थिक स्थिति खराब हो गई है. इसके बावजूद इन निजी स्कूलों ने नये शैक्षणिक सत्र से फीस नहीं बढ़ाने (Not increase fees) का फैसला किया है. निजी स्कूल शिक्षा परिवार (Private school education family) के अध्यक्ष अनिल शर्मा ने इसकी घोषणा की है. निजी स्कूल शिक्षा परिवार का दावा है कि प्रदेशभर में 30,000 हजार से ज्यादा स्कूल इस संगठन जुड़े हुए हैं. उन्होंने अभिभावकों की इस परेशानी को समझा है और यह बड़ा फैसला किया. शिक्षा परिवार का दावा 60 लाख बच्चों के अभिभावकों को मिलेगी राहत

निजी स्कूल शिक्षा परिवार के प्रदेशाध्यक्ष अनिल शर्मा ने बताया कि शिक्षा परिवार से प्रदेशभर की 30,000 हजार स्कूलों में 60 लाख स्टूडेंट्स अध्ययनरत हैं. कोरोना महामारी के कारण आर्थिक मंदी का असर शहर ही नहीं बल्कि गांव और छोटे कस्बों तक दिख रहा है. संकट की इस घड़ी में हमारी भी जिम्मेदारी बनती है कि हम भी सरकार के साथ कदम से कदम मिलाते हुए लोगों को राहत दें. हमने हमारे फैसले से मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को अवगत करा दिया है.

तीन के बजाय 09 किश्तों में लेंगे फीस
अनिल शर्मा ने कहा सालभर की फीस तीन बार में ली जाती है, लेकिन अभिभावकों की माली हालत को ध्यान में रखते हुए हमने इसे 09 किश्तों में लेने का निर्णय किया है ताकि अभिभावक धीरे धीरे फीस चुका सकें. यही नहीं जिन स्टूडेंट्स की पिछले तीन माह की फीस बकाया है और जो चुका पाने में असमर्थ हैं उनके लिए स्कूलों में प्रिंसिपल के नेतृत्व में टीम गठित की जायेगी. यह कमेटी स्टूडेंट्स के परिवार की आर्थिक स्थिति का आकलन करेगी. अगर अभिभावक वास्तव में फीस चुका पाने की स्थिति में नहीं है तो स्कूल फीस माफ भी कर सकती है. अनिल शर्मा ने कहा कि हमारी स्कूलों की औसतन फीस बीस हजार रुपये सालाना तक है. इसके बावजूद हम छात्रों के हित में इतना बड़ा फैसला ले रहे हैं.



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First published: May 29, 2020, 3:09 PM IST
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