कहीं खुशी, कहीं गम: भारी बारिश ने किया किसानों का नफा-नुकसान, अब बरसात थमने की प्रार्थना

Dinesh Sharma | News18 Rajasthan
Updated: August 20, 2019, 11:38 AM IST
कहीं खुशी, कहीं गम: भारी बारिश ने किया किसानों का नफा-नुकसान, अब बरसात थमने की प्रार्थना
भारी बारिश वाले इलाकों में फसलें 25 फीसदी तक खराब हो गई। फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।

प्रदेश में पिछले दिनों हुई कई इलाकों में हुई भारी बारिश (heavy rains) किसानों के लिए मुसीबत (problem) बन गई. प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में जहां इस बारिश से फसल (crop) को जीवनदान मिला है, वहीं भारी बारिश वाले इलाकों में खेत जलमग्न होने से बड़े स्तर पर फसल बर्बाद (damage ) भी हो गई है.

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प्रदेश में पिछले दिनों हुई कई इलाकों में हुई भारी बारिश (heavy rains) किसानों के लिए मुसीबत (problem) बन गई. प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में जहां इस बारिश से फसल (crop) को जीवनदान मिला है, वहीं भारी बारिश वाले इलाकों में खेत जलमग्न होने से बड़े स्तर पर फसल बर्बाद (damage ) भी हो गई है. जिन इलाकों में खेतों में 24 घंटों से ज्यादा समय से पानी भरा है उनमें 15 से 25 फीसदी तक फसल की बर्बादी हो चुकी है.

कई इलाकों में खेत बन गए तरणताल
राजस्थान में तीन हफ्ते पहले तक जो किसान भगवान से बारिश की फरियाद कर रहे थे वही किसान अब ईश्वर से बारिश थमने की गुहार लगा रहे हैं. पिछले कुछ दिनों में बरसी झमाझम बारिश ने कई इलाकों में फसल को चौपट कर दिया. हाड़ौती के कोटा, बारां, झालावाड़, बूंदी के साथ ही मारवाड़ के पाली व जालोर समेत अजमेर और भीलवाड़ा में कई इलाकों में भारी बारिश से किसानों के खेत तरणताल बन गए। वहां बड़े स्तर पर फसलें बर्बाद हुई है.

हाड़ौती में हुआ ज्यादा नुकसान

कोटा और बारां जिले में सबसे ज्यादा सोयाबीन की फसल प्रभावित हुई है. बूंदी जिले में मक्का, सोयाबीन और उड़द की फसल में खराबा हुआ. वहीं भीलवाड़ा जिले में मक्का व उड़द, अजमेर जिले में मूंग व उड़द, और पाली जिले में मूंग व तिल की फसल में काफी नुकसान हुआ है. हालांकि कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश से भले ही कुछ इलाकों में फसल को नुकसान हुआ हो, लेकिन ओवरऑल बारिश प्रदेश के लिए फायदे का सौदा ही साबित हुई है.

बुवाई का आंकड़ा लक्ष्य के मुकाबले 90 फीसदी के पार पहुंचा
दम तोड़ने के कगार पर पहुंची खरीफ की फसल को बारिश से संजीवनी मिल गई है और फसल बेहद अच्छी स्थिति में है. प्रदेश में 16 अगस्त तक बुवाई का आंकड़ा लक्ष्य के मुकाबले 90 फीसदी के पार पहुंच गया है. इस बार उत्पादन भी अच्छा रहने की संभावनाएं जताई जा रही है. इतना ही नहीं रबी की फसल के लिए भी यह बारिश बेहद फायदेमंद साबित होने वाली है.
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8-10 दिन बारिश का थमना जरुरी
झालावाड़ और चूरू जिले में 100 फीसदी से भी ज्यादा बुवाई हुई है. वहीं जैसलमेर में सबसे कम 70 फीसदी क्षेत्र में बुवाई हुई है. राज्य के 21 जिलों में बुवाई 90 फीसदी से ज्यादा हो चुकी है. कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक अब फसल की बेहतरी के लिये करीब 8-10 दिन बारिश का थमना जरुरी है. अन्यथा चिंता बढ़ेगी. वहीं 10 दिन बाद होने वाली बारिश फसल के लिए फायदेमंद होगी.

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First published: August 20, 2019, 11:38 AM IST
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