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लोकसेवा गारंटी: 10 साल में 8 करोड़ शिकायतें, अफसरों पर महज 31 हजार 750 रुपये जुर्माना

लोकसेवा गारंटी: 10 साल में 8 करोड़ शिकायतें, अफसरों पर महज 31 हजार 750 रुपये जुर्माना


लोकसेवा गारंटी में नहीं हो रहे तय समय में काम

लोकसेवा गारंटी में नहीं हो रहे तय समय में काम

Government carelessness : जिलों में यूडीएच, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ,राजस्व एवं उपनिवेशन, नगरीय विकास, गृह विभाग और वित्त विभाग से जुड़े प्रकरण लंबित चल रहे हैं. 8 करोड़ 79 लाख 73 हजार 561 शिकायतों का निस्तारण. अभी भी 82 हजार शिकायतें पेंडिंग हैं.

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जयपुर. प्रदेश में सरकारी अधिकारी और कर्मचारी जनता का काम करने में कितनी कोताही बरत रहे हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले दस सालों काम समय से न होने की आठ करोड़ से ज्यादा सरकार के पास पहुंची हैं. पिछले 10 सालों में अफसरों ने इस कानून की जमकर धज्जियां उड़ाई हैं. यह दीगर है कि शिकायतें करने के बाद काम हो रहे हैं. अभी भी 82 हजार शिकायतें पेंडिंग हैं।

लोगों को विभिन्न कार्यालयों में सरकारी सेवा समय पर उपलब्ध कराने के लिए वर्ष 2011 में राजस्थान लोक सेवा गारंटी अधिनियम लागू किया गया था. शिकायतों के मामलों में टॉप 2 जिले जयपुर और जोधपुर है. राजस्थान लोक सेवा प्रदान करने की गारंटी अधिनियम में काम करने की अवधि तय इसलिए की गई थी ताकि भ्रष्टाचार को बढ़ावा नहीं मिले. साथ ही अधिकारी जनता के काम तय समय में ही पूरा करें.

अफसरों पर लगा महज 31 हजार जुर्माना
तय समय में काम नहीं होने पर अधिकारी पर जुर्माने का प्रावधान भी किया गया था. चौंकाने वाली बात यह है कि समय पर काम नहीं होने की शिकायतों की इतनी बड़ी संख्या होने के बावजूद महज 31 हजार 750 रुपये हजार रुपए का जुर्माना अफसरों पर लगाया गया है. तय समय पर सुनवाई नहीं होने पर 500 से 5 हजार रुपए तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान है.

25 विभागों की 221 सेवाएं दायरे में
कांग्रेस शासन में 14 नवंबर, 2011 को राजस्थान लोक सेवा प्रदान करने की गारंटी अधिनियम-2011 को लागू किया गया था. सरकार ने 25 विभागों की 221 सेवाओं को इस कानून के दायरे में शामिल किया है. प्रदेश में 14 नवम्बर 2011 से 31 मई 2021 तक 8 करोड़ 80 लाख 55 हजार 985 शिकायतें जन अभियोग निराकरण विभाग में दर्ज हुई. विभाग का दावा है कि 8 करोड़ 79 लाख 73 हजार 561 का निस्तारण कर दिया गया. वर्तमान में केवल 82 हजार 424 शिकायतें ही लंबित है.

सरकारी अधिकारी—कर्मचारी नहीं है गंभीर
सरकार ने पवित्र मंशा से आमजन को गुड गवर्नेंस देने के लिए राजस्थान लोक सेवा गारंटी अधिनियम लागू किया. लेकिन अफसरशाही के सुस्त और लापरवाह छवि के कारण समय सीमा पर शिकायतों की सुनवाई नहीं हो रही है. टेबल पर बैठा अफसर टेबल के उस पार बैठे व्यक्ति की समस्याओं के निस्तारण प्रति गंभीर दिखाई नहीं दे रहे है. जिलों में यूडीएच, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड,राजस्व एवं उपनिवेशन, नगरीय विकास, गृह विभाग और वित्त विभाग से जुड़े प्रकरण लंबित चल रहे हैं.

जिलेवार समय सीमा से बाहर लंबित शिकायतें
जोधपुर - 615
जयपुर - 509
चूरू - 481
झालावाड़ - 444
भरतपुर - 45
बीकानेर - 13
टोंक - 9
पाली - 8
जैसलमेर - 7

Tags: Administrative Officer, Jaipur news, Officer, Rajasthan news, Revenue Department, Transport department

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