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Rajasthan Bypolls: वल्लभनगर में चतुष्कोणीय मुकाबला, जानिए धरियावद का हाल

Rajasthan Bypolls: वल्लभनगर में चतुष्कोणीय मुकाबला, जानिए धरियावद का हाल

वल्लभनगर में चुनावी घमासान इतना पेंचीदा है कि दावा करना फिलहाल मुश्किल है कि कौन रेस में आगे निकलेगा.

वल्लभनगर में चुनावी घमासान इतना पेंचीदा है कि दावा करना फिलहाल मुश्किल है कि कौन रेस में आगे निकलेगा.

Rajasthan Bypolls Ground Report: वल्लभनगर में चुनावी घमासान इतना पेचीदा है कि दावा करना फिलहाल मुश्किल है कि कौन रेस में आगे निकलेगा. आदिवासी लैंड धरियावद में मुकाबला रोचक हो चला है. कन्हैयालाल मीणा के मैदान से हटने के बाद बीजेपी ने थोड़ा राहत की सांस ली है.

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जयपुर. राजस्थान में उपचुनाव का रण शुरू हो गया है. बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही दलों के लिए ये चुनाव जीतना जरूरी है, भले ही इन नतीजों से सरकार की सेहत पर फर्क नहीं पड़ेगा लेकिन कई नेताओं का भविष्य ये चुनाव प्रभावित जरूर करेगा. वल्लभनगर में चार-चार योद्धा मैदान में हैं. कांग्रेस को सहानुभूति की लहर का सहारा है. प्रीति शक्तावत को गहलोत सरकार के कामकाज पर भरोसा है. शक्तावत खानदान की राजनीतिक विरासत को आगे बढाने का जिम्मा उन पर है. उनके ससुर गुलाब सिंह शक्तावत ने छह बार वल्लभनगर की नुमाइंदगी की. प्रदेश के गृहमंत्री तक के ओहदे तक पहुंचे. पति गजेंद्र शक्तावत देा बार चुनाव जीते. उनका निधन हुआ तो पार्टी ने अब प्रीति को मैदान में उतारा है.

पति के असामयिक निधन से वल्लभनगर के मतदाताओं के बीच प्रीति शक्तावत को लेकर हमदर्दी दिखाई देती है लेकिन चुनाव तक विकास और सहानुभूति का मुददा कितना कायम रह पाएगा, ये देखना होगा. फिलहाल प्रीति जनता का भरेासा जीतने की कोशिश कर रही है.

वल्लभनगर में चुनावी घमासान इतना पेचीदा है कि दावा करना फिलहाल मुश्किल है कि कौन रेस में आगे निकलेगा. बीजेपी ने हिम्मत सिंह झाला को मैदान में उतारा है. वो नए चेहरे हैं. समाज सेवी हैं. सिक्योरिटी एजेंसी के कारोबार से जुड़े हैं. हालांकि गुलाबचंद कटारिया उनके टिकट से अंदरखाने नाराज बताये जाते हैं. चितौड़गढ सांसद सीपी जोशी से उनकी नजदीकियां भी उन्हें टिकट दिलवाने में मददगार साबित हुई. अब झाला मतदाताओं का भरोसा जीतने में लगे हैं मगर लंबी लड़ाई अभी बाकी है.

वल्लभनगर में रणधीर सिंह भींडर भी मैदान में हैं जो दो बार विधायक रह चुके हैं. एक बार भाजपा से तो दूसरी बार खुद की पार्टी जनता सेना से. भींडर का गुलाबचंद कटारिया से छत्तीस का आंकड़ा है, तो वसुंधरा राजे से नजदीकियां. नामांकन दाखिल करने से पहले वो जयपुर आए और वसुंधरा राजे से मुलाकात तक की. चर्चाएं भी चलीं कि शायद भींडर को पार्टी टिकट दे दे लेकिन गुलाबचंद कटारिया की जिद भारी पड़ गई.

भींडर दावा करते हैं कि जीत उनकी होगी. वो ये भी कहते हैं कि मेरा मुकाबला कांग्रेस से हैं. भींडर की वजह से ही भाजपा यहां एक बार चुनाव जीत पाई है मगर अब चतुष्कोणीय मुकाबले में भींडर के पूर्व राव साहब बुरी तरह फंसे हैं. एक और उम्मीदवार ने तीनों ही उम्मीदवारों का खेल बिगाड़ दिया है. वो हैं उदयलाल डांगी. 2018 में भाजपा की टिकट से डांगी ने चुनाव लड़ा, 46 हजार से ज्यादा वोट हासिल किए. इस बार आठ महीनों से डांगी चुनाव की तैयारी कर रहे थे मगर ऐन वक्त पर भाजपा ने टिकट देने से इनकार कर दिया.

गुलाब चंद कटारिया के भरोसेमंद नेताओं में डांगी की गिनती होती है मगर कटारिया भी उन्हें मना पाने में नाकाम रहे. अब डांगी आरएलपी की टिकट पर मैदान में ताकत झोंक रहे हैं. गैर-राजपूत मतदाताओं को लामबंद करने में जुटे हैं.

धरियावद में मुकाबला रोचक
इधर, आदिवासी लैंड धरियावद में मुकाबला रोचक हो चला है. कन्हैयालाल मीणा के मैदान से हटने के बाद बीजेपी ने राहत की सांस ली है मगर भाजपा के उम्मीदवार खेत सिंह मीणा का जरूरत से ज्यादा लो प्रोफाइल होना उसके लिए मुसीबत का सबब है. सूबे में कांग्रेस की सरकार होने का फायदा नगराज मीणा के पक्ष में हैं, मगर लगातार दो बार चुनाव हारने के बावजूद टिकट देने से कांग्रेस के कार्यकर्ता अंदरखाने पार्टी से नाराज बताये जाते हैं. हालांकि मुख्यमंत्री के सामने पार्टी ने सब को एक मंच पर लाकर एकता का प्रदर्शन किया. सरकार ने धरियावद को 300 करोड़ की योजनाओं की सौगात दी है इसलिए नामांकन रैली में कांग्रेस ने अच्छी खासी भीड़ जुटाकर कांग्रेस ने अपना मनोबल बढ़ाने की कोशिश की है. बीजेपी लगातार यहां दो चुनाव जीती है इसलिए उसके हौंसले बुलंद है मगर सरकार कांग्रेस होने का फायदा नगराज मीणा को है.

वल्लभनगर और धरियावद में चुनावी शोर शुरू हो चुका है. नेता मतदाताओं का भरेासा जीतने निकल पड़े हैं. तमाम बड़े नेता मैदान में अपनों को जिताने में जुटे हैं. बीजेपी जीती तो सतीश पूनियां के नंबर बढ़ेंगे, पार्टी में उनका कद और मजबूत होगा. कांग्रेस हारी तो अंसतुष्ट धड़ा सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं चूकेगा. फिलहाल मुकाबला कड़ा है जो पार्टी आखिर तक मैदान में लोहा लेती रहेगी, उसकी जीत तय है.

Tags: Ashok gehlot, Assembly bypoll, Rajasthan news, Rajasthan news in hindi, Vasundhara raje

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